Shahjahanpur News: टीवी कलाकार मंजू बोलीं- फिल्मों में कुछ खास नहीं, छोटे पर्दे पर काम से मिल रही संतुष्टि
टीवी कलाकार मंजू बृजनंदन शर्मा ने कहा कि नाटक करते रहना चाहिए। उनके पापा ने भी थियेटर किया, वह हमेशा से प्रेरणा रहे। एक सवाल के जबाव में कहा कि फिल्मों में अब कुछ खास नहीं रहा।
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भारतीय सेना में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली मंजू बृजनंदन शर्मा आज टीवी शो का जाना-माना नाम है। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में मंजू बृजनंदन शर्मा बिंदु की मम्मी समेत कई किरदार निभाकर दर्शकों को लोट-पोट कर चुकी हैं। उनका मानना है कि फिल्मों में अब कुछ खास नहीं रहा, उसमें मां-बहनों के किरदार दिखाई ही नहीं देते। वहीं छोटे पर्दे पर काम करने से संतुष्टि मिलती हैं।
शाहजहांपुर के गांधी भवन में आयोजित चार दिवसीय संभागीय नाट्य समारोह में नाटक की प्रस्तुति देने आईं मंजू बृजनंदन शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने अनुभव को साझा किया। बताया कि बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में डॉक्टर बनने का था, इसका कारण उनके पापा बृजनंदन शर्मा का आर्मी में होना भी रहा। इसके लिए उन्होंने बीएससी बायोलॉजी से किया। लेकिन बाद में लिटरेचर और ड्रामा किया।
यहां से आया नाटक में रुझान
एमए संस्कृत से करने के दौरान ही पहली बार नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम में शकुंतला का किरदार निभाया। इसके साथ ही नाटकों में रुझान आ गया। बीएनए से 1999 बैच की पासआउट रहीं। मंजू ने बताया कि उन्होंने करीब 40 नाटकों में काम किया है। सबसे खास ताजमहल का टेंडर और कशमकश रहा। इसके अलावा तीन फिल्मों शोबिज, लव का तड़ाका और गलती से मिस्टेक हो गई... में नजर आ चुकी हैं। फिर छोटे पर्दे पर आने का मन बना लिया। मंजू धारावाहिक 'परसाई कहते हैं' सब टीवी पर आने वाले एफआईआर और उसके बाद कॉमेडी नाइट्स कपिल में आईं।
मंजू ने कहा कि नाटक करते रहना चाहिए। उनके पापा ने भी थियेटर किया, वह हमेशा से मेरी प्रेरणा रहे। एक सवाल के जबाव में कहा कि फिल्मों में अब कुछ खास नहीं रहा। उनमें मां-बहनों के किरदार दिखाई ही नहीं देते। जबकि छोटे पर्दे पर पारिवारिक माहौल बना रहता है, इसलिए यहां काम करने से संतुष्टि मिलती हैं। उन्होंने राजनीति में आने की संभावनाओं से भी इन्कार नहीं किया गया। उन्होंने नए कलाकारों के लिए कहा कि वह आज के समय में थियेटर के लिए रिसर्च कर सकते हैं, पहले यह संभव नहीं था।