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लखनऊ-दिल्ली रूट पर आठ घंटे थमी रही ट्रेनों की रफ्तार
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शाहजहांपुर। लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे स्थित मीरानपुर कटरा-बिलपुर स्टेशन के बीच गेट संख्या 345 पर ट्रेन संख्या 05012 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस के वाहनों से टकराने पर पांच लोगों की मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त हुई इंजन के अगले पहिया पटरी से नीचे उतर गए। इसके बाद लखनऊ-दिल्ली रेलवे रूट पर करीब आठ घंटे यातायात बाधित रहा। मौके पर पहुंचे रेलवे अधिकारियों ने हादसे की ज्वाइंट रिपोर्ट बनाकर मुरादाबाद मंडल मुख्यालय भेज दी है।
बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे हुलासनगरा क्रॉसिंग पर हादसा होने के बाद अप लाइन पर तीन और डाउन लाइन पर आठ घंटे ट्रेनों की रफ्तार थमी रही। इस दौरान रोजा रेलवे स्टेशन पर कर्मभूमि एक्सप्रेस दो घंटे, अवध आसाम एक्सप्रेस सवा दो घंटे, राप्ती गंगा एक्सप्रेस दो घंटे खड़ी रहीं। सुबह करीब आठ बजे अप लाइन पर रास्ता साफ होने के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। इसके बाद कर्मभूमि एक्सप्रेस, अवध आसाम एक्सप्रेस, राप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेनों को रवाना किया गया। डाउन लाइन पर आने वाली ट्रेन गंगा सतलज एक्सप्रेस, जननायक एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, पंजाब मेल आदि ट्रेनों को पीछे के स्टेशनों पर रोका गया। डाउन लाइन साफ होने पर दोपहर 1:00 बजे ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। रास्ते में ट्रेनें रुकने से यात्री खासे परेशान रहे।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ एक्सप्रेस लोको पायलट मोहम्मद रफी और गार्ड नंदराम मुरादाबाद से लेकर चले थे। बिलपुर स्टशेन से निकलने के बाद ट्रेन जैसे ही गेट नंबर 343 पर पहुंची तो खुले गेट पर वाहनों की लाइन लगी हुई थी। लोको पायलट ने सामने ट्रक खड़ा देख आपातकालीन ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक ट्रक से टक्कर हो चुकी थी। टक्कर से ट्रक में लोड सामान अप लाइन पर पहुंच गया। जिससे आप लाइन भी बाधित हो गई। गेटमैन जितेंद्र यादव, लोको पायलट मोहम्मद नफीस ने वाकी टाकी से स्टेशन मास्टर व कंट्रोल को सूचना दी। कंट्रोल के आदेश पर रेल यातायात को रोक दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
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उधर, हादसे की सूचना मिलने पर डॉ. संजय राय, अनिल कुमार, रामानंद, रुकनुद्दीन समेत मेडिकल वैन मौके के लिए रवाना हुई। इसके बाद राहत दुर्घटना ट्रेन को रोजा से रवाना किया गया। राहत दुर्घटना ट्रेन के मौके पर पहुंचने के सात घंटे के बाद इंजन को पटरी पर लाया गया। उसके बाद दूसरा इंजन जोड़कर ट्रेन को रवाना किया गया।
स्टेशन मास्टर से मिलती है गेट खोलने की अनुमति
गेटमैन को ट्रेन निकलने के बाद स्टेशन मास्टर के आदेश पर गेट खोलने की अनुमति मिलती है। पहले गेट बंद होता है, उसके बाद चाबी स्टेशन मास्टर के पास पहुंचती है। फिर इंटरलॉक सिस्टम के द्वारा सिग्नल ग्रीन किया जाता है। अगर आपात काल स्थिति में गेटमैन गेट खोलना चाहे तो उसे स्टेशन मास्टर से निजी नंबर आदान-प्रदान करना पड़ता है। उसके बाद ही गेट खोला जा सकता है।
लोको पायलट और गार्ड का लिया गया ब्लड सैंपल
हादसा होने के बाद रोजा से मेडिकल वैन मौके पर पहुंची। जिसमें डॉ. संजय राय अपनी टीम के साथ शामिल रहे। उन्होंने चंडीगढ़ एक्सप्रेस के लोको पायलट मोहम्मद नसीम व गार्ड नंदराम का ब्लड सैंपल लिया। कंट्रोल के आदेश पर लोको पायलट और गार्ड को घटनास्थल पर ट्रेन से उतार लिया गया। इसके बाद दूसरे इंजन के चालक विमल कुमार राठौर ट्रेन लेकर रोजा पहुंचे। डॉ. संजय राय ने बताया कि कंट्रोल के आदेश पर लोको पायलट व गार्ड का ब्लड सैंपल लेकर मंडल मुरादाबाद मुख्यालय भेजा गया है।
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बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे हुलासनगरा क्रॉसिंग पर हादसा होने के बाद अप लाइन पर तीन और डाउन लाइन पर आठ घंटे ट्रेनों की रफ्तार थमी रही। इस दौरान रोजा रेलवे स्टेशन पर कर्मभूमि एक्सप्रेस दो घंटे, अवध आसाम एक्सप्रेस सवा दो घंटे, राप्ती गंगा एक्सप्रेस दो घंटे खड़ी रहीं। सुबह करीब आठ बजे अप लाइन पर रास्ता साफ होने के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। इसके बाद कर्मभूमि एक्सप्रेस, अवध आसाम एक्सप्रेस, राप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेनों को रवाना किया गया। डाउन लाइन पर आने वाली ट्रेन गंगा सतलज एक्सप्रेस, जननायक एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, पंजाब मेल आदि ट्रेनों को पीछे के स्टेशनों पर रोका गया। डाउन लाइन साफ होने पर दोपहर 1:00 बजे ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। रास्ते में ट्रेनें रुकने से यात्री खासे परेशान रहे।
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रेलवे सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ एक्सप्रेस लोको पायलट मोहम्मद रफी और गार्ड नंदराम मुरादाबाद से लेकर चले थे। बिलपुर स्टशेन से निकलने के बाद ट्रेन जैसे ही गेट नंबर 343 पर पहुंची तो खुले गेट पर वाहनों की लाइन लगी हुई थी। लोको पायलट ने सामने ट्रक खड़ा देख आपातकालीन ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक ट्रक से टक्कर हो चुकी थी। टक्कर से ट्रक में लोड सामान अप लाइन पर पहुंच गया। जिससे आप लाइन भी बाधित हो गई। गेटमैन जितेंद्र यादव, लोको पायलट मोहम्मद नफीस ने वाकी टाकी से स्टेशन मास्टर व कंट्रोल को सूचना दी। कंट्रोल के आदेश पर रेल यातायात को रोक दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
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उधर, हादसे की सूचना मिलने पर डॉ. संजय राय, अनिल कुमार, रामानंद, रुकनुद्दीन समेत मेडिकल वैन मौके के लिए रवाना हुई। इसके बाद राहत दुर्घटना ट्रेन को रोजा से रवाना किया गया। राहत दुर्घटना ट्रेन के मौके पर पहुंचने के सात घंटे के बाद इंजन को पटरी पर लाया गया। उसके बाद दूसरा इंजन जोड़कर ट्रेन को रवाना किया गया।
स्टेशन मास्टर से मिलती है गेट खोलने की अनुमति
गेटमैन को ट्रेन निकलने के बाद स्टेशन मास्टर के आदेश पर गेट खोलने की अनुमति मिलती है। पहले गेट बंद होता है, उसके बाद चाबी स्टेशन मास्टर के पास पहुंचती है। फिर इंटरलॉक सिस्टम के द्वारा सिग्नल ग्रीन किया जाता है। अगर आपात काल स्थिति में गेटमैन गेट खोलना चाहे तो उसे स्टेशन मास्टर से निजी नंबर आदान-प्रदान करना पड़ता है। उसके बाद ही गेट खोला जा सकता है।
लोको पायलट और गार्ड का लिया गया ब्लड सैंपल
हादसा होने के बाद रोजा से मेडिकल वैन मौके पर पहुंची। जिसमें डॉ. संजय राय अपनी टीम के साथ शामिल रहे। उन्होंने चंडीगढ़ एक्सप्रेस के लोको पायलट मोहम्मद नसीम व गार्ड नंदराम का ब्लड सैंपल लिया। कंट्रोल के आदेश पर लोको पायलट और गार्ड को घटनास्थल पर ट्रेन से उतार लिया गया। इसके बाद दूसरे इंजन के चालक विमल कुमार राठौर ट्रेन लेकर रोजा पहुंचे। डॉ. संजय राय ने बताया कि कंट्रोल के आदेश पर लोको पायलट व गार्ड का ब्लड सैंपल लेकर मंडल मुरादाबाद मुख्यालय भेजा गया है।