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Shahjahanpur News: अल्हागंज मंडी में अनाज खरीद बंद कर व्यापारियों ने की हड़ताल
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अल्हागंज। गल्ला मंडी में मूंगफली समेत अन्य उपज की खरीद पर विक्रेताओं से ज्यादा कमीशन की मांग करते हुए अनाज व्यापारियाें ने बुधवार को सुबह से अनाज की खरीद रोककर हड़ताल शुरू कर दी। इस वजह से अपनी उपज लेकर लेकर मंडी पहुंचे किसान दिनभर इधर-उधर भटकते रहे। हालांकि, शाम को स्थानीय मंडी का प्रभार संभाले जलालाबाद मंडी के सचिव विक्रम बाजपेयी ने यहां आकर दोनों पक्षों से वार्ता की और व्यापारियों को हड़ताल खत्म करने के लिए राजी कर लिया।
बुधवार को हुई हड़ताल का मुख्य मुद्दा मूंगफली की खरीद मेंं कमीशन कम मिलना रहा। व्यापारियों का कहना है कि मूंगफली का उतार और तौल करने वाले पल्लेदारों को दो वर्ष पहले तक प्रति कट्टा 300 ग्राम मूंगफली दाना देने का प्रावधान था, लेकिन बाद में यह व्यवस्था खत्म करके श्रमिकाें को सिर्फ सात रुपये कट्टा दिया जाने लगा।
व्यापारियों के अनुसार जलालाबाद समेत कई मंडियों में पल्लेदारों को कमीशन की पहले जैसी व्यवस्था लागू है, लेकिन यहां कम कमीशन पर पल्लेदार काम करने के लिए तैयार नहीं हैं और उन्हें अनाज की खरीद पर इतना लाभांश नहीं मिलता कि उससे श्रमिकों की मजदूरी की भरपाई कर सकें।
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दोपहर बाद तक हड़ताल प्रभावी रहने से बाहर से उपज लेकर आए किसान काफी परेशान रहे। शाम करीब चार बजे मंडी सचिव ने व्यापारियों और कुछ विक्रेता किसानों से वार्ता कर उनके बीच उत्पन्न गतिरोध खत्म करा दिया। बाद में कई व्यापारियों ने मूंगफली की खरीद भी की।
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दोनों पक्षों को साथ बैठाकर वार्ता करके उनके मतभेद खत्म करा दिए और शाम से खरीद की प्रक्रिया दोबारा शुरू करा दी गई है। पल्लेदारों का कमीशन व्यापारियों और विक्रेताओं के बीच का मामला है और इसमें मंडी प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है।
-विक्रम वाजपेयी, मंडी सचिव, जलालाबाद
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बुधवार को हुई हड़ताल का मुख्य मुद्दा मूंगफली की खरीद मेंं कमीशन कम मिलना रहा। व्यापारियों का कहना है कि मूंगफली का उतार और तौल करने वाले पल्लेदारों को दो वर्ष पहले तक प्रति कट्टा 300 ग्राम मूंगफली दाना देने का प्रावधान था, लेकिन बाद में यह व्यवस्था खत्म करके श्रमिकाें को सिर्फ सात रुपये कट्टा दिया जाने लगा।
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व्यापारियों के अनुसार जलालाबाद समेत कई मंडियों में पल्लेदारों को कमीशन की पहले जैसी व्यवस्था लागू है, लेकिन यहां कम कमीशन पर पल्लेदार काम करने के लिए तैयार नहीं हैं और उन्हें अनाज की खरीद पर इतना लाभांश नहीं मिलता कि उससे श्रमिकों की मजदूरी की भरपाई कर सकें।
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दोपहर बाद तक हड़ताल प्रभावी रहने से बाहर से उपज लेकर आए किसान काफी परेशान रहे। शाम करीब चार बजे मंडी सचिव ने व्यापारियों और कुछ विक्रेता किसानों से वार्ता कर उनके बीच उत्पन्न गतिरोध खत्म करा दिया। बाद में कई व्यापारियों ने मूंगफली की खरीद भी की।
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दोनों पक्षों को साथ बैठाकर वार्ता करके उनके मतभेद खत्म करा दिए और शाम से खरीद की प्रक्रिया दोबारा शुरू करा दी गई है। पल्लेदारों का कमीशन व्यापारियों और विक्रेताओं के बीच का मामला है और इसमें मंडी प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है।
-विक्रम वाजपेयी, मंडी सचिव, जलालाबाद