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गेहूं की फसल कटवाने को झोंक दी पूरी ताकत

Wed, 08 Apr 2015 12:17 AM IST
पुवायां।
पुवायां। Updated Wed, 08 Apr 2015 12:17 AM IST
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Thrown the full force of the wheat crop haircut
रोजाना बिगड़ रहे मौसम ने किसान को बेहद चिंता में डाल दिया है। परेशान किसान किसी भी तरह खेतों में खड़े गेहूं को कटवाकर सुरक्षित घर लाने की कवायद में जुट गया है। छोटे किसानों ने भी फसल को हाथ से काटने का विचार छोड़कर कंबाइन का आसरा लेना ही मुनासिब समझा है। हालत यह है कि कंबाइन वालों के पास कई दिन की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। कुछ लोग तो खेत के पास चल रही कंबाइनों से जबरिया गेहूं कटवाने का प्रयास भी कर रहे हैं।
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दिन रात चल रही कंबाइन
कंबाइन से गेहूं कटवाने पर भूसे की समस्या उठ खड़ी होती है। रीपर से भूसर बनवाने को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता हैं। भूसा भी थ्रेशर के मुकाबले अच्छा नहीं होता है, लेकिन किसान भूसे की चिंता न कर खून पसीने की मेहनत से उपजाई गेहूं को सुरक्षित करने के लिए कंबाइन से गेहूं कटवाकर घर अथवा आढ़त पर ले जाने को प्राथमिकता दे रहा है। कंबाइन स्वामी भी चार दिन की चांदनी सोचकर ज्यादा रेट वसूलकर कटाई कर रहे हैं।
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परिवार के लोगों को कटाई में झोंका
बारिश, ओलावृष्टि और आंधी आने की आशंका से सहमे किसानों ने परिवार के सभी सदस्यों को गेहूं की कटाई के लिए खेतों में उतार दिया है। कई किसान जो श्रमिकों से गेहूं कटवाते थे, श्रमिक नहीं मिलने के कारण खुद ही कटाई में जुट गए हैं। गांव के गांव इस समय खाली नजर आ रहे हैं। घरों में केवल वृद्ध लोग रखवाली के लिए मौजूद हैं। परिवार के शेष सदस्य खेतों में काम कर रहे हैं।
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गहाई का काम भी पूरे जोर पर
हाथ से काटे गए गेहूं की गहाई का काम भी दिन रात चल रहा है। जिसको जहां भी थ्रेशर मिल रहा है उसे खेत में लाकर गहाई शुरू करवा दी जाती है। इसके लिए ज्यादा रेट देने में भी गुरेज नहीं है। किसानों का कहना है कि तमाम फसल पहले ही खराब हो चुकी है। बची फसल को घर ले जाना ही उनकी प्राथमिकता है। अब बारिश, आंधी आदि आती है और पूरी तरह पकी खड़ी फसल खेतों में नष्ट हो सकती है और पूरे साल भुखमरी की नौबत आ सकती है।


होगा भूसे का संकट
इस वर्ष पशुओं के लिए भूसे का संकट भी खड़ा होने की आशंका है। गेहूं गिर जाने से कंबाइन उसे बिल्कुल नीचे से काट रही है जिस कारण खेत में नरई नहीं बच रही है। नरई के अभाव में भूसा नहीं बन सकेगा। कोढ़ में खाज जैसी स्थित यह है कि जिन खेतों में नरई है उन्हें बाहर के भूसा व्यापारियों ने खरीद लिया है और भूसा बनवाकर ट्रकों में भरवाकर गैर जनपदों को ले जा रहे हैं।
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