{"_id":"69332ebaa5179f824a0a82d0","slug":"three-members-of-a-gang-arrested-for-gst-evasion-worth-rs-1077-crore-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1036-159532-2025-12-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: 10.77 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में गिरोह के तीन लोग गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: 10.77 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में गिरोह के तीन लोग गिरफ्तार
विज्ञापन
रोजा में पकड़े गए आरोपियों से बरामद कार। संवाद
- फोटो : एसएसपी सौरभ दीक्षित टर्नआउट परेड का निरीक्षण करते हुए। स्रोतः पुलिस
शाहजहांपुर। बोगस फर्म बनाकर व्यापारियों को जीएसटी चोरी का लाभ दिलाने वाले एक गिरोह के तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।बदले में गिरोह को कमीशन मिलता था। अब तक दस करोड़ 77 लाख रुपये की जीएसटी चोरी कराने की बात गिरोह ने कबूल की है। मामले में कुछ बैंककर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस जीएसटी चोरी करने में शामिल व्यापारियों पर भी कार्रवाई करेगी।
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी कर राजस्व क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सहायक आयुक्त (राज्य कर) भावना चंद्रा ने बीती 28 मई को रोजा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। केस के खुलासे के लिए एसपी सिटी की नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। इसी टीम को जानकारी मिली कि जीएसटी की चोरी करने वाले गैंग के लोग अपने वकील से मिलने के लिए लखनऊ की ओर जा रहे हैं। पुलिस ने शुक्रवार सुबह करीब 6:45 बजे काले रंग की एसयूवी को अटसलिया पुल के पास घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया।
वाहन में काफी संख्या में कूटरचित प्रपत्र, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, प्रपत्र तैयार करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले टैबलेट, सीपीयू, हार्डडिस्क, पेनड्राइव, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस ने कार में सवार नई दिल्ली के रोहिणी के सेक्टर 11 के व्हाइट हाउस अपार्टमेंट में रहने वाले गौरव यादव, नई दिल्ली के समयपुर बादली के निवासी दीपक और प्रयागराज के थाना नवाबगंज क्षेत्र के रहने वाले सिद्धार्थ पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
--
ऐसे तैयार करते बोगस फर्म
आरोपियों ने बताया कि वे लोगों को ऋण दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन निकालते थे। संपर्क करने वाले लोगों से उनके आधार कार्ड, पैनकार्ड, बिजली का बिल प्राप्त कर फर्जी रेंट एग्रीमेंट तैयार कर बोगस जीएसटी फर्म तैयार करते थे। फर्म के नाम से बैंक अकाउंट खुलवाकर व्यापारियों को जीएसटी चोरी करके आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ पहुंचाते थे। इसके बदले में पांच से 20 प्रतिशत तक कमीशन हासिल करते थे।
--
जीएसटी अधिकारियों से बचने के लिए बनाते थे बोगस फर्मों की चेन
शाहजहांपुर। बोगस फर्म के जरिये करोड़ों की ठगी करने के आरोपी कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद शातिर दिमाग वाले हैं। कम समय में अमीर बनने की चाहत रखने वाले आरोपियों के पास से पुलिस को साढ़े सात लाख रुपये कीमत के मोबाइल मिले हैं। जीएसटी अधिकारियों को चकमा देने के लिए आरोपी बोगस फर्मों की चेन बनाते थे और व्यापारियों को आईटीसी का लाभ दिलाकर कमीशन वसूलते थे। पूरी जालसाजी में व्यापारी और कुछ बैंककर्मी भी शामिल थे।
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि आरोपी गौरव यादव ने बीए, दीपक ने इंटर और सिद्धार्थ ने कक्षा सात तक पढ़ाई की है। वे बोगस जीएसटी फर्म बनाकर उनके नाम से बैंक में करंट खाता खुलवा लेते थे। बोगस जीएसटी फर्मों की वे एक चेन बनाते थे, ताकि जीएसटी अधिकारियों की पकड़ में न आ सकें। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि फर्जी फर्मों में जीएसटी 2-ए में खरीद दिखाकर टैक्स बनाया जाता था। इसके बाद आर-1 में फर्जी बिल बनाते थे और बिक्री दिखाकर उस टैक्स का असली व्यापारी को लाभ पहुंचाया जाता था। असल में व्यापारी को कोई सामान नहीं दिया जाता था। केवल फर्जी बिल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे। जीएसटी पोर्टल पर व्यापारी की आईटीसी दिखाई देने लगती थी। इस तरह से करोड़ों रुपयों के फर्जी बिल के माध्यम से आईटीसी पास हो जाती थी।
कुछ व्यापारी असली माल खरीदे बिना फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी ले लेते थे जिससे उनकी टैक्स देयता कम दिखती थी। कुछ व्यापारी अपना टर्नओवर नकली बिलों से ज्यादा दिखाते थे जिससे बैंक ऋण में फायदा मिलता था और सप्लायर की क्रेडिट सीमा ज्यादा हो जाती थी। वे लोग व्यापारियों से पांच से लेकर 20 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। आरोपियों ने बताया कि इस काम में कुछ बैंक कर्मचारी भी मदद करते थे। अब तक जो बोगस फर्म में आईडी लगी हुईं हैं, वे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों के साथ ही बस में ड्राइवर व परिचालकों की हैं।
--
ये चीजें मिलीं गिरोह सेआरोपियों के पास से पुलिस को 3.5 लाख रुपये कीमत के दो आईफोन, चार लाख रुपये कीमत के पांच मोबाइल फोन, एक की-पैड मोबाइल, ढाई लाख रुपये कीमत के दो टैबलेट, एक सीपीयू, एक हार्ड डिस्क, दो पेन ड्राइव मिली हैं। इसके अलावा दो सौ फर्जी रेंट एग्रीमेट, 39 पैनकार्ड की छायाप्रति, विभिन्न फर्मों के नाम से बने 13 बैंक खातों के स्टेटमेंट, बड़ी मात्रा में एसएस ऑनलाइन सर्विसेज के विजिटिंग कार्ड, फर्जी नोटरी मुहर, पांच अन्य मुहर, एक इंक पैड, 39 एटीएम कार्ड, चार वाहनों की आरसी भी मिली है।
--
अय्याशी के लिए गए थे काठमांडो...वहां हुई थी पिटाई
27 नवंबर को तीनों लोग 30-35 लाख रुपये में खरीदी कार से नेपाल घूमने के लिए गए थे। वहां काठमांडो में पीछे से एक बस में उनकी कार टकरा गई थी। बस के चालक-परिचालक व अन्य लोगों ने तीनों की जमकर पिटाई कर दी थी। माफी मांगने पर तीनों को छोड़ दिया गया था। पकड़े गए आरोपियों के अनुसार, वे लोग बिना आईडी के सिम बेचने वालों से एक्टिवेटेड सिम अधिक रुपये देकर खरीद लेते थे। उसे जीएसटी की फर्जी फर्म बनाने, बैंक खाता खुलवाने में इस्तेमाल करते थे। इस कार्य में उनकी कुछ बैंककर्मी भी मदद करते हैं। रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार और केस की विवेचना प्रभारी गैंगस्टर सेल निरीक्षक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि तीनों को रिमांड पर लेकर अन्य जानकारी जुटाई जाएगी। इस मामले से जुड़े लोगों को भी पकड़ा जाएगा।
--
एसआईटी में एसओजी, सर्विलांस सेल और रोजा थाना पुलिस को शामिल किया गया था, जिसने इस गिरोह का पर्दाफाश किया है। साइबर-फाइनेंशियल धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से अपील है कि किसी भी प्रकार के ऋण, नौकरी, ओटीपी, बैंक खाते से संबंधित ऑनलाइन प्रलोभन से सतर्क रहें। -राजेश द्विवेदी, एसपी
विज्ञापन
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी कर राजस्व क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सहायक आयुक्त (राज्य कर) भावना चंद्रा ने बीती 28 मई को रोजा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। केस के खुलासे के लिए एसपी सिटी की नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। इसी टीम को जानकारी मिली कि जीएसटी की चोरी करने वाले गैंग के लोग अपने वकील से मिलने के लिए लखनऊ की ओर जा रहे हैं। पुलिस ने शुक्रवार सुबह करीब 6:45 बजे काले रंग की एसयूवी को अटसलिया पुल के पास घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया।
विज्ञापन
वाहन में काफी संख्या में कूटरचित प्रपत्र, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, प्रपत्र तैयार करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले टैबलेट, सीपीयू, हार्डडिस्क, पेनड्राइव, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए। पुलिस ने कार में सवार नई दिल्ली के रोहिणी के सेक्टर 11 के व्हाइट हाउस अपार्टमेंट में रहने वाले गौरव यादव, नई दिल्ली के समयपुर बादली के निवासी दीपक और प्रयागराज के थाना नवाबगंज क्षेत्र के रहने वाले सिद्धार्थ पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
ऐसे तैयार करते बोगस फर्म
आरोपियों ने बताया कि वे लोगों को ऋण दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन निकालते थे। संपर्क करने वाले लोगों से उनके आधार कार्ड, पैनकार्ड, बिजली का बिल प्राप्त कर फर्जी रेंट एग्रीमेंट तैयार कर बोगस जीएसटी फर्म तैयार करते थे। फर्म के नाम से बैंक अकाउंट खुलवाकर व्यापारियों को जीएसटी चोरी करके आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ पहुंचाते थे। इसके बदले में पांच से 20 प्रतिशत तक कमीशन हासिल करते थे।
जीएसटी अधिकारियों से बचने के लिए बनाते थे बोगस फर्मों की चेन
शाहजहांपुर। बोगस फर्म के जरिये करोड़ों की ठगी करने के आरोपी कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद शातिर दिमाग वाले हैं। कम समय में अमीर बनने की चाहत रखने वाले आरोपियों के पास से पुलिस को साढ़े सात लाख रुपये कीमत के मोबाइल मिले हैं। जीएसटी अधिकारियों को चकमा देने के लिए आरोपी बोगस फर्मों की चेन बनाते थे और व्यापारियों को आईटीसी का लाभ दिलाकर कमीशन वसूलते थे। पूरी जालसाजी में व्यापारी और कुछ बैंककर्मी भी शामिल थे।
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि आरोपी गौरव यादव ने बीए, दीपक ने इंटर और सिद्धार्थ ने कक्षा सात तक पढ़ाई की है। वे बोगस जीएसटी फर्म बनाकर उनके नाम से बैंक में करंट खाता खुलवा लेते थे। बोगस जीएसटी फर्मों की वे एक चेन बनाते थे, ताकि जीएसटी अधिकारियों की पकड़ में न आ सकें। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि फर्जी फर्मों में जीएसटी 2-ए में खरीद दिखाकर टैक्स बनाया जाता था। इसके बाद आर-1 में फर्जी बिल बनाते थे और बिक्री दिखाकर उस टैक्स का असली व्यापारी को लाभ पहुंचाया जाता था। असल में व्यापारी को कोई सामान नहीं दिया जाता था। केवल फर्जी बिल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे। जीएसटी पोर्टल पर व्यापारी की आईटीसी दिखाई देने लगती थी। इस तरह से करोड़ों रुपयों के फर्जी बिल के माध्यम से आईटीसी पास हो जाती थी।
कुछ व्यापारी असली माल खरीदे बिना फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी ले लेते थे जिससे उनकी टैक्स देयता कम दिखती थी। कुछ व्यापारी अपना टर्नओवर नकली बिलों से ज्यादा दिखाते थे जिससे बैंक ऋण में फायदा मिलता था और सप्लायर की क्रेडिट सीमा ज्यादा हो जाती थी। वे लोग व्यापारियों से पांच से लेकर 20 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। आरोपियों ने बताया कि इस काम में कुछ बैंक कर्मचारी भी मदद करते थे। अब तक जो बोगस फर्म में आईडी लगी हुईं हैं, वे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों के साथ ही बस में ड्राइवर व परिचालकों की हैं।
ये चीजें मिलीं गिरोह सेआरोपियों के पास से पुलिस को 3.5 लाख रुपये कीमत के दो आईफोन, चार लाख रुपये कीमत के पांच मोबाइल फोन, एक की-पैड मोबाइल, ढाई लाख रुपये कीमत के दो टैबलेट, एक सीपीयू, एक हार्ड डिस्क, दो पेन ड्राइव मिली हैं। इसके अलावा दो सौ फर्जी रेंट एग्रीमेट, 39 पैनकार्ड की छायाप्रति, विभिन्न फर्मों के नाम से बने 13 बैंक खातों के स्टेटमेंट, बड़ी मात्रा में एसएस ऑनलाइन सर्विसेज के विजिटिंग कार्ड, फर्जी नोटरी मुहर, पांच अन्य मुहर, एक इंक पैड, 39 एटीएम कार्ड, चार वाहनों की आरसी भी मिली है।
अय्याशी के लिए गए थे काठमांडो...वहां हुई थी पिटाई
27 नवंबर को तीनों लोग 30-35 लाख रुपये में खरीदी कार से नेपाल घूमने के लिए गए थे। वहां काठमांडो में पीछे से एक बस में उनकी कार टकरा गई थी। बस के चालक-परिचालक व अन्य लोगों ने तीनों की जमकर पिटाई कर दी थी। माफी मांगने पर तीनों को छोड़ दिया गया था। पकड़े गए आरोपियों के अनुसार, वे लोग बिना आईडी के सिम बेचने वालों से एक्टिवेटेड सिम अधिक रुपये देकर खरीद लेते थे। उसे जीएसटी की फर्जी फर्म बनाने, बैंक खाता खुलवाने में इस्तेमाल करते थे। इस कार्य में उनकी कुछ बैंककर्मी भी मदद करते हैं। रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार और केस की विवेचना प्रभारी गैंगस्टर सेल निरीक्षक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि तीनों को रिमांड पर लेकर अन्य जानकारी जुटाई जाएगी। इस मामले से जुड़े लोगों को भी पकड़ा जाएगा।
एसआईटी में एसओजी, सर्विलांस सेल और रोजा थाना पुलिस को शामिल किया गया था, जिसने इस गिरोह का पर्दाफाश किया है। साइबर-फाइनेंशियल धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लोगों से अपील है कि किसी भी प्रकार के ऋण, नौकरी, ओटीपी, बैंक खाते से संबंधित ऑनलाइन प्रलोभन से सतर्क रहें। -राजेश द्विवेदी, एसपी

रोजा में पकड़े गए आरोपियों से बरामद कार। संवाद- फोटो : एसएसपी सौरभ दीक्षित टर्नआउट परेड का निरीक्षण करते हुए। स्रोतः पुलिस