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Shahjahanpur News: सागर झील पर कब्जा करने वाले खुद ही हटा लें कब्जे वरना होगी कार्रवाई
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पुवायं के गांव नाहिल में सागर झील का निरीक्षण करते डीएम। संवाद
- फोटो : udhampur news
पुवायां। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को गांव नाहिल स्थित सागर झील का निरीक्षण कर जानकारी ली और कब्जेदारों को जमीन खाली करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि सागर झील के पुराने स्वरूप को वापस लाकर पर्यटनस्थल बनाने के साथ ही यहां वृहद गो अभयारण्य भी बनाया जाएगा।
नाहिल में सागर झील के नाम 818 बीघा से अधिक जमीन है। लगभग 150 बीघा जमीन मत्स्यजीवी सहकारी समिति को दी गई है, जिस पर मछली पालन के लिए तालाब बने हुए हैं। लगभग 108 बीघा जमीन वन विभाग के पास है। शेष जमीन में कुछ खाली पड़ी है और काफी जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। कब्जेदार वर्षों से जमीन पर खेती कर रहे हैं। डीएम के निर्देश पर जमीन के सीमांकन का काम चल रहा है।
शनिवार को डीएम मौके पर पहुंचे। लेखपाल, प्रधान और गांव के लोगों से सागर झील के बारे में जानकारी ली। गांव के लोगों ने डीएम को बताया कि नाहिल झील एक प्राचीन और ऐतिहासिक जलाशय है, जो समय के साथ अपना प्राकृतिक स्वरूप खोता जा रहा है। पूर्व में यह झील अपने विशेष नीले कमल और विदेशी पक्षियों के आगमन के लिए प्रसिद्ध थी।
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डीएम ने कहा कि जिन लोगों ने झील की भूमि कब्जा रखी है, वे स्वेच्छा से खाली कर दें। कब्जा नहीं हटाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद डीएम ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि छह महीने में सागर झील के पुराने स्वरूप को वापस लाया जाएगा और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम कराया जाएगा। वृहद गो आश्रय स्थल भी बनाया जाएगा। डीएम ने बीडीओ आरपी राना को निर्देश दिए कि झील के किनारे बने रघुनाथपुरी स्थल के सुंदरीकरण का प्रस्ताव बनाकर भेजें।
इस दौरान लाेगों ने डीएम से कहा कि सबसे बड़ी समस्या छुट्टा पशुओं को लेकर है। डीएम ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के समय जिले में छह गोशालाएं थीं, जो अब तीन गुनी हो चुकी हैं। जो लोग दूध दुहने के बाद गायों को खुला छोड़ देते हैं, उनको सोचना चाहिए कि हादसे में गाय की मौत के अलावा लोगों की मौत भी हो जाती है। सरकार पशु पालने पर प्रति पशु 15 सौ रुपये महीने देती है। पशुपालक भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
गांव वालों ने श्मशान भूमि पर कब्जे का मामला भी उठाया। डीएम ने कब्जे हटवाकर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराने के निर्देश बीडीओ को दिए हैं। निरीक्षण के बाद डीएम ने नाहिल के बाबा तुरंतनाथ मंदिर पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान एसडीएम चित्रा निर्वाल, तहसीलदार मोहम्मद अजहर अंसारी सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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सफाईकर्मी लगाकर भगाए गए छुट्टा पशु
डीएम ने दिवाली से पहले पुवायां, खुटार, बंडा का भ्रमण कर हाईवे पर छुट्टा पशुओं की स्थिति को देखा था। निर्देश दिए थे कि अगले भ्रमण में छुट्टा पशु सड़कों पर दिखे तो कार्रवाई की जाएगी। शनिवार को डीएम के आने की सूचना पर कई स्थानों पर सफाईकर्मी लगाकर छुट्टा पशुओं को सड़क से खेतों की ओर भगाया गया। डीएम के जाने तक सफाईकर्मी रोड किनारे कई स्थानों पर मौजूद रहे।
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नाहिल में सागर झील के नाम 818 बीघा से अधिक जमीन है। लगभग 150 बीघा जमीन मत्स्यजीवी सहकारी समिति को दी गई है, जिस पर मछली पालन के लिए तालाब बने हुए हैं। लगभग 108 बीघा जमीन वन विभाग के पास है। शेष जमीन में कुछ खाली पड़ी है और काफी जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। कब्जेदार वर्षों से जमीन पर खेती कर रहे हैं। डीएम के निर्देश पर जमीन के सीमांकन का काम चल रहा है।
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शनिवार को डीएम मौके पर पहुंचे। लेखपाल, प्रधान और गांव के लोगों से सागर झील के बारे में जानकारी ली। गांव के लोगों ने डीएम को बताया कि नाहिल झील एक प्राचीन और ऐतिहासिक जलाशय है, जो समय के साथ अपना प्राकृतिक स्वरूप खोता जा रहा है। पूर्व में यह झील अपने विशेष नीले कमल और विदेशी पक्षियों के आगमन के लिए प्रसिद्ध थी।
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डीएम ने कहा कि जिन लोगों ने झील की भूमि कब्जा रखी है, वे स्वेच्छा से खाली कर दें। कब्जा नहीं हटाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद डीएम ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि छह महीने में सागर झील के पुराने स्वरूप को वापस लाया जाएगा और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम कराया जाएगा। वृहद गो आश्रय स्थल भी बनाया जाएगा। डीएम ने बीडीओ आरपी राना को निर्देश दिए कि झील के किनारे बने रघुनाथपुरी स्थल के सुंदरीकरण का प्रस्ताव बनाकर भेजें।
इस दौरान लाेगों ने डीएम से कहा कि सबसे बड़ी समस्या छुट्टा पशुओं को लेकर है। डीएम ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के समय जिले में छह गोशालाएं थीं, जो अब तीन गुनी हो चुकी हैं। जो लोग दूध दुहने के बाद गायों को खुला छोड़ देते हैं, उनको सोचना चाहिए कि हादसे में गाय की मौत के अलावा लोगों की मौत भी हो जाती है। सरकार पशु पालने पर प्रति पशु 15 सौ रुपये महीने देती है। पशुपालक भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
गांव वालों ने श्मशान भूमि पर कब्जे का मामला भी उठाया। डीएम ने कब्जे हटवाकर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराने के निर्देश बीडीओ को दिए हैं। निरीक्षण के बाद डीएम ने नाहिल के बाबा तुरंतनाथ मंदिर पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान एसडीएम चित्रा निर्वाल, तहसीलदार मोहम्मद अजहर अंसारी सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
सफाईकर्मी लगाकर भगाए गए छुट्टा पशु
डीएम ने दिवाली से पहले पुवायां, खुटार, बंडा का भ्रमण कर हाईवे पर छुट्टा पशुओं की स्थिति को देखा था। निर्देश दिए थे कि अगले भ्रमण में छुट्टा पशु सड़कों पर दिखे तो कार्रवाई की जाएगी। शनिवार को डीएम के आने की सूचना पर कई स्थानों पर सफाईकर्मी लगाकर छुट्टा पशुओं को सड़क से खेतों की ओर भगाया गया। डीएम के जाने तक सफाईकर्मी रोड किनारे कई स्थानों पर मौजूद रहे।