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Shahjahanpur News: दुनिया में देव हजारों हैं बजरंगबली का क्या कहना...
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खुटार में बालाजी के जगराते में झांकी प्रस्तुत करते कलाकार। संवाद
खुटार। नगर के बीडीआर मैदान पर बालाजी के जगराते में काफी भीड़ रही। इससे सेवादारों और पुलिस को व्यवस्था बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मंगलवार रात श्री बाला जी महाराज सेवा समिति की ओर से आयोजित जगराते में नगर सहित दूरदराज गांवों से आए श्रद्धालुओं ने बालाजी महाराज की जोत के समक्ष मत्था टेका। शुभम रंगीला जागरण मंडल, शाहजहांपुर के बैनर तले कलाकारों ने सुंदर भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भजन गायिका अंजलि द्विवेदी ने ‘मुझे चरणों से लगा ले’, ‘ओ बाबा घाटे वाले’, ‘मेरे बाला जी सरकार के रंग निराले हैं’, ‘दुनिया में देव हजारों है, बजरंगबली का क्या कहना’ आदि भजन सुनाए । सुमित सैनी और शुभम रंगीला ने ‘हाथ में सोटों लाल लंगोटो’, ‘जय जय पवन कुमार मैं बारी जाऊं’, ‘दर पर बाला जी अर्जी लगा देना, नसीबा तेरा जग जाएगा’ आदि भजन सुनाए।
सुरजीत आर्ट ग्रुप शाहजहांपुर के बैनर तले करनाल और उत्तराखंड के कलाकारों की झांकियाें को खूब सराहा गया। फूलों की होली और भगवान जगन्नाथ की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। बुधवार सुबह आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद कन्या भोज और भंडारे का आयोजन हुआ। बाद में जोत को गोमती नदी लाकर विदाई दी गई।
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भक्त चंद्रहास के प्रसंग का किया भावपूर्ण मंचन
कुर्रियाकलां। गांव में आयोजित रासलीला में वृंदावन से आए नाट्य मंडली के कलाकारों ने बुधवार को भक्त चंद्रहास के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया। इस दौरान देव स्वरूपों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
कलाकारों ने दिखाया एक बार शनिदेव और लक्ष्मीजी में बहस छिड़ गई कि कौन ज्यादा बलवान है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए दोनों कुंतन नरेश के यहां पहुंचे। वहां शनिदेव ने अपनी शक्ति का प्रयोग कर राजा कुंतन और रानी को मार डाला। इसी बीच लक्ष्मीजी राजा कुंतन के पुत्र चंद्रहास को अपने साथ लेकर चली गईं और शनिदेव की पुत्री विधिमा से उसका विवाह करा दिया।
इससे कुपित हुए शनिदेव चंद्रहास को भी मारने का प्रयास करते हैं, किंतु लक्ष्मी जी शनिदेव से युद्ध करके चंद्रहास को बचा लेतीं हैं और युद्ध में शनिदेव की हार हो जाती है। बाद में शनिदेव को अपनी गलती का बोध होने पर वह लक्ष्मीजी के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करते हैं। मंचन की व्यवस्था में संजीव सिंह समेत कई ग्रामीणों का सहयोग रहा। संवाद
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मंगलवार रात श्री बाला जी महाराज सेवा समिति की ओर से आयोजित जगराते में नगर सहित दूरदराज गांवों से आए श्रद्धालुओं ने बालाजी महाराज की जोत के समक्ष मत्था टेका। शुभम रंगीला जागरण मंडल, शाहजहांपुर के बैनर तले कलाकारों ने सुंदर भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भजन गायिका अंजलि द्विवेदी ने ‘मुझे चरणों से लगा ले’, ‘ओ बाबा घाटे वाले’, ‘मेरे बाला जी सरकार के रंग निराले हैं’, ‘दुनिया में देव हजारों है, बजरंगबली का क्या कहना’ आदि भजन सुनाए । सुमित सैनी और शुभम रंगीला ने ‘हाथ में सोटों लाल लंगोटो’, ‘जय जय पवन कुमार मैं बारी जाऊं’, ‘दर पर बाला जी अर्जी लगा देना, नसीबा तेरा जग जाएगा’ आदि भजन सुनाए।
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सुरजीत आर्ट ग्रुप शाहजहांपुर के बैनर तले करनाल और उत्तराखंड के कलाकारों की झांकियाें को खूब सराहा गया। फूलों की होली और भगवान जगन्नाथ की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। बुधवार सुबह आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद कन्या भोज और भंडारे का आयोजन हुआ। बाद में जोत को गोमती नदी लाकर विदाई दी गई।
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भक्त चंद्रहास के प्रसंग का किया भावपूर्ण मंचन
कुर्रियाकलां। गांव में आयोजित रासलीला में वृंदावन से आए नाट्य मंडली के कलाकारों ने बुधवार को भक्त चंद्रहास के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया। इस दौरान देव स्वरूपों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
कलाकारों ने दिखाया एक बार शनिदेव और लक्ष्मीजी में बहस छिड़ गई कि कौन ज्यादा बलवान है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए दोनों कुंतन नरेश के यहां पहुंचे। वहां शनिदेव ने अपनी शक्ति का प्रयोग कर राजा कुंतन और रानी को मार डाला। इसी बीच लक्ष्मीजी राजा कुंतन के पुत्र चंद्रहास को अपने साथ लेकर चली गईं और शनिदेव की पुत्री विधिमा से उसका विवाह करा दिया।
इससे कुपित हुए शनिदेव चंद्रहास को भी मारने का प्रयास करते हैं, किंतु लक्ष्मी जी शनिदेव से युद्ध करके चंद्रहास को बचा लेतीं हैं और युद्ध में शनिदेव की हार हो जाती है। बाद में शनिदेव को अपनी गलती का बोध होने पर वह लक्ष्मीजी के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करते हैं। मंचन की व्यवस्था में संजीव सिंह समेत कई ग्रामीणों का सहयोग रहा। संवाद

खुटार में बालाजी के जगराते में झांकी प्रस्तुत करते कलाकार। संवाद