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Shahjahanpur News: यूरिया नहीं मिलने से गेहूं के पौधों में आया पीलापन, किसान परेशान
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कुर्रिया कलां में खाद की कमी से पीली पड़ी गेहूं की फसल। संवाद
कुर्रियाकलां। गेहूं की बोआई के दौरान डीएपी के संकट से परेशान रहे किसान अब अगैती गेहूं की सिंचाई के वक्त यूरिया के लिए भटक रहे हैं। प्रशासन भले ही यूरिया के भरपूर स्टॉक का दावा करे, लेकिन क्षेत्र सहकारी समितियों के गोदाम खाद नहीं होने से खाली पड़े हैं। यूरिया की कमी का असर खेतों में अंकुरित हुए गेहूं के पौधों पर पीलेपन के रूप में दिखने लगा है।
कांट ब्लॉक की सहकारी समितियों पर पिछले दो सप्ताह से खाद का संकट बना हुआ है। गांव की सहकारी समिति पर यूरिया उपलब्ध नहीं होने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे खेतों की नमी सूखने से पौधों में पीलापन आने लगा है। किसानों का कहना है कि टोकन मिलने के बाद भी कई दिनों से खाद के लिए समितियों पर चक्कर लगा रहे हैं। जमुनिया दौलतपुर समिति से जुड़े गांव नगला जाजू के किसान बाबू सिंह कुशवाहा ने बताया कि उनके चार एकड़ खेत में बोई गई गेहूं की फसल की सिंचाई के वक्त यूरिया की आवश्यकता है।
उनका कहना है कि कई बार समिति के गोदाम पर जाने पर भी यूरिया नहीं मिली। इस वजह से उन्होंने दुकान से महंगे दामों पर यूरिया खरीदकर खेतों में डाली। यही हाल कौढ़ा समिति का है। इस समिति से जुड़े गांव पथरा खास के किसान प्रेमपाल जाटव ने बताया कि पंद्रह दिन से यूरिया के लिए गोदाम पर जा रहे हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिली। समिति के सचिव किसानों को आज-कल कहकर टाल रहे हैं। नतीजे में उन्हें मजबूरी में बाजार से एक बोरी यूरिया के अधिक दाम चुकाने पर भी यूरिया के साथ 300 रुपये का जाइम पैकेट भी लेना पड़ा है।
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इसी क्रम में खिरिया हीर सहकारी समिति पर एक सप्ताह पूर्व यूरिया के वितरण के दौरान किसानों में विवाद हो जाने से समिति के कई सदस्य किसान यूरिया पाने से वंचित रह गए। चौहनापुर गांव के रामकिशोर त्रिपाठी के अनुसार उनके बटाईदार को कई दिन से यूरिया नहीं मिली। इस वजह से खेतों में खड़ी फसल पीली पड़ने लगी है। एआर कोऑपरेटिव अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि जल्द ही यूरिया का संकट खत्म हो जाएगा।
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कांट ब्लॉक की सहकारी समितियों पर पिछले दो सप्ताह से खाद का संकट बना हुआ है। गांव की सहकारी समिति पर यूरिया उपलब्ध नहीं होने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे खेतों की नमी सूखने से पौधों में पीलापन आने लगा है। किसानों का कहना है कि टोकन मिलने के बाद भी कई दिनों से खाद के लिए समितियों पर चक्कर लगा रहे हैं। जमुनिया दौलतपुर समिति से जुड़े गांव नगला जाजू के किसान बाबू सिंह कुशवाहा ने बताया कि उनके चार एकड़ खेत में बोई गई गेहूं की फसल की सिंचाई के वक्त यूरिया की आवश्यकता है।
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उनका कहना है कि कई बार समिति के गोदाम पर जाने पर भी यूरिया नहीं मिली। इस वजह से उन्होंने दुकान से महंगे दामों पर यूरिया खरीदकर खेतों में डाली। यही हाल कौढ़ा समिति का है। इस समिति से जुड़े गांव पथरा खास के किसान प्रेमपाल जाटव ने बताया कि पंद्रह दिन से यूरिया के लिए गोदाम पर जा रहे हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिली। समिति के सचिव किसानों को आज-कल कहकर टाल रहे हैं। नतीजे में उन्हें मजबूरी में बाजार से एक बोरी यूरिया के अधिक दाम चुकाने पर भी यूरिया के साथ 300 रुपये का जाइम पैकेट भी लेना पड़ा है।
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इसी क्रम में खिरिया हीर सहकारी समिति पर एक सप्ताह पूर्व यूरिया के वितरण के दौरान किसानों में विवाद हो जाने से समिति के कई सदस्य किसान यूरिया पाने से वंचित रह गए। चौहनापुर गांव के रामकिशोर त्रिपाठी के अनुसार उनके बटाईदार को कई दिन से यूरिया नहीं मिली। इस वजह से खेतों में खड़ी फसल पीली पड़ने लगी है। एआर कोऑपरेटिव अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि जल्द ही यूरिया का संकट खत्म हो जाएगा।