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Shahjahanpur News: अवनीश के हत्यारोपी गुरुसेवक के मारे जाने पर पीड़ित परिवार ने जताया संतोष
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अवनीश दीक्षित का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन
पुवायां (शाहजहांपुर)। चालक अवनीश दीक्षित की गला घोंटकर हत्याकर कार लूटने के आरोपी गुरुसेवक का एनकाउंटर होने पर पीड़ित परिवार ने संतोष जाहिर किया है। वहीं, गुरुसेवक के परिजनों ने उसका शव लेने से इन्कार कर दिया है। उनका कहना है कि वह एक अपराधी था, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।
गांव पटई निवासी गुरुसेवक सिंह छह अक्तूबर को पुवायां से रिंकू की कार को उत्तराखंड जाने की बात कहकर बुकिंग पर ले गया था। बदमाश रोजा थाना क्षेत्र चालक अवनीश दीक्षित की हत्या करने के बाद शव को रेलवे मैदान की झाड़ियों में फेंकने के बाद कार को लूटकर भाग गए थे। 29 सितंबर को लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र से एक कार लूटकर चालक की हत्या कर दी गई।
दस अक्तूबर को पारा पुलिस ने एक बदमाश अजय के पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। रविवार रात पुलिस ने घटना के मुख्य आरोपी गुरुसेवक सिंह को भी एनकाउंटर में लखनऊ में ढेर कर दिया। सोमवार को पुवायां पुलिस ने एनकाउंटर की जानकारी गुरुसेवक के पिता, पुवायां के एक गांव में ब्याही बहन और ताऊ को दी लेकिन सभी ने शव को देखने और लेने से इन्कार कर दिया। थाना प्रभारी रवि करन सिंह ने बताया कि परिजनों के नहीं जाने के कारण लखनऊ में पुलिस ही अंतिम संस्कार कर सकती है।
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अवनीश की पत्नी बोलीं- पति की आत्मा को मिली शांति
रविवार को एनकाउंटर में बदमाश गुरुसेवक सिंह के मारे जाने की जानकारी कार चालक अवनीश दीक्षित के परिजनों को सोमवार सुबह मिली। इस पर उनकी पत्नी मधु ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से उन्हें संतुष्टि मिली है और उनके पति की आत्मा को शांति भी मिलेगी। बेटे सूरज ने भी पुलिस की कार्रवाई ठीक बताते हुए बचे हुए अन्य आरोपियों का भी पुलिस को एनकाउंटर करने की बात कही। सूरज का कहना है कि पुलिस को गाड़ी मालिक रिंकू की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए कि उन्होंने कहीं जानबूझकर तो उनके पिता को नहीं भेजा। अगर वह दोषी मिले तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
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गुरुसेवक के ताऊ बोले- जो जैसा करेेगा-वैसा भरेगा
गुरुसेवक के माता-पिता उत्तराखंड में रहते हैं। पुवायां के गांव पटई में रहने वाले उसके ताऊ ज्ञान सिंह ने कहा कि उनका गुरुसेवक से कोई लेना-देना नहीं है। जैसी करनी- वैसी भरनी। गुरुसेवक ने दूसरे घरों के लोगों को जैसे मारा, वैसे उसका भी कुछ ही दिनों में अंत हो गया। वह न तो देखने जाएंगे और न शव लेने जाएंगे। रविवार रात में एक बजे पुवायां पुलिस घर आई थी लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस चली गई।
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माता-पिता को भी धमकाकर रखता था गुरुसेवक
गुरुसेवक के ताऊ ज्ञान सिंह ने बताया कि वह गांव में ही एक स्कूल में पढ़ाई करने के दौरान बहुत सीधा था। बाद में गांव के कुछ लड़कों से उसकी दोस्ती हुई तो वह पढ़ाई करने के अलावा घूमने में समय लगाने लगा। खर्चे शुरू हुए तो भरपाई नहीं होने पर उसने अपने माता-पिता को पीटना शुरू कर दिया। उसके माता-पिता दोनों सीधे हैं इसलिए वह डर गए। इसके बाद उसने जमीन की बिक्री करना शुरू कर दिया। पिता से कहता था तो वह बैनामा करने चले जाते थे, सारा पैसा गुरुसेवक ही लेता था। उसे किराये पर गाड़ियां ले जाकर घूमने का शौक था। कई लाख की जमीनें बेची लेकिन कभी अपनी गाड़ी नहीं ली। वह किराये की गाड़ी से ही यूपी के कई जिलों से लेकर जम्मू-कश्मीर और नेपाल तक जाता था। नेपाल की युवती से उसने शादी भी की थी। उसकी दो पुत्रियां है, एक दादी के पास तो दूसरी मां के पास रहती है। पत्नी भी नेपाल में जाकर अपने मायके में ही रहने लगी है।
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खंडहर जैसा दिखने लगा घर..आंगन में उगी घास
जमीन के साथ ही गुरुसेवक ने गांव पटई के एक व्यक्ति को अपना मकान भी बेच दिया था। चूंकि मकान ज्ञान सिंह के पड़ोस में बना थी इसलिए उन्हें दिक्कत हो रही थी। फिर उन्होंने पटई वाले व्यक्ति से मकान खरीद लिया। मकान लेने के बाद भी ज्ञान सिंह ने उसमें कोई बदलाव नहीं किया है। वह आज भी खाली है। उसमें किसी के नहीं रहने के कारण खिड़कियां और दरवाजे टूटे पड़े हैं और आंगन में घास उग आई है।
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गांव पटई निवासी गुरुसेवक सिंह छह अक्तूबर को पुवायां से रिंकू की कार को उत्तराखंड जाने की बात कहकर बुकिंग पर ले गया था। बदमाश रोजा थाना क्षेत्र चालक अवनीश दीक्षित की हत्या करने के बाद शव को रेलवे मैदान की झाड़ियों में फेंकने के बाद कार को लूटकर भाग गए थे। 29 सितंबर को लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र से एक कार लूटकर चालक की हत्या कर दी गई।
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दस अक्तूबर को पारा पुलिस ने एक बदमाश अजय के पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। रविवार रात पुलिस ने घटना के मुख्य आरोपी गुरुसेवक सिंह को भी एनकाउंटर में लखनऊ में ढेर कर दिया। सोमवार को पुवायां पुलिस ने एनकाउंटर की जानकारी गुरुसेवक के पिता, पुवायां के एक गांव में ब्याही बहन और ताऊ को दी लेकिन सभी ने शव को देखने और लेने से इन्कार कर दिया। थाना प्रभारी रवि करन सिंह ने बताया कि परिजनों के नहीं जाने के कारण लखनऊ में पुलिस ही अंतिम संस्कार कर सकती है।
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अवनीश की पत्नी बोलीं- पति की आत्मा को मिली शांति
रविवार को एनकाउंटर में बदमाश गुरुसेवक सिंह के मारे जाने की जानकारी कार चालक अवनीश दीक्षित के परिजनों को सोमवार सुबह मिली। इस पर उनकी पत्नी मधु ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से उन्हें संतुष्टि मिली है और उनके पति की आत्मा को शांति भी मिलेगी। बेटे सूरज ने भी पुलिस की कार्रवाई ठीक बताते हुए बचे हुए अन्य आरोपियों का भी पुलिस को एनकाउंटर करने की बात कही। सूरज का कहना है कि पुलिस को गाड़ी मालिक रिंकू की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए कि उन्होंने कहीं जानबूझकर तो उनके पिता को नहीं भेजा। अगर वह दोषी मिले तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
गुरुसेवक के ताऊ बोले- जो जैसा करेेगा-वैसा भरेगा
गुरुसेवक के माता-पिता उत्तराखंड में रहते हैं। पुवायां के गांव पटई में रहने वाले उसके ताऊ ज्ञान सिंह ने कहा कि उनका गुरुसेवक से कोई लेना-देना नहीं है। जैसी करनी- वैसी भरनी। गुरुसेवक ने दूसरे घरों के लोगों को जैसे मारा, वैसे उसका भी कुछ ही दिनों में अंत हो गया। वह न तो देखने जाएंगे और न शव लेने जाएंगे। रविवार रात में एक बजे पुवायां पुलिस घर आई थी लेकिन उन्होंने जाने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस चली गई।
माता-पिता को भी धमकाकर रखता था गुरुसेवक
गुरुसेवक के ताऊ ज्ञान सिंह ने बताया कि वह गांव में ही एक स्कूल में पढ़ाई करने के दौरान बहुत सीधा था। बाद में गांव के कुछ लड़कों से उसकी दोस्ती हुई तो वह पढ़ाई करने के अलावा घूमने में समय लगाने लगा। खर्चे शुरू हुए तो भरपाई नहीं होने पर उसने अपने माता-पिता को पीटना शुरू कर दिया। उसके माता-पिता दोनों सीधे हैं इसलिए वह डर गए। इसके बाद उसने जमीन की बिक्री करना शुरू कर दिया। पिता से कहता था तो वह बैनामा करने चले जाते थे, सारा पैसा गुरुसेवक ही लेता था। उसे किराये पर गाड़ियां ले जाकर घूमने का शौक था। कई लाख की जमीनें बेची लेकिन कभी अपनी गाड़ी नहीं ली। वह किराये की गाड़ी से ही यूपी के कई जिलों से लेकर जम्मू-कश्मीर और नेपाल तक जाता था। नेपाल की युवती से उसने शादी भी की थी। उसकी दो पुत्रियां है, एक दादी के पास तो दूसरी मां के पास रहती है। पत्नी भी नेपाल में जाकर अपने मायके में ही रहने लगी है।
खंडहर जैसा दिखने लगा घर..आंगन में उगी घास
जमीन के साथ ही गुरुसेवक ने गांव पटई के एक व्यक्ति को अपना मकान भी बेच दिया था। चूंकि मकान ज्ञान सिंह के पड़ोस में बना थी इसलिए उन्हें दिक्कत हो रही थी। फिर उन्होंने पटई वाले व्यक्ति से मकान खरीद लिया। मकान लेने के बाद भी ज्ञान सिंह ने उसमें कोई बदलाव नहीं किया है। वह आज भी खाली है। उसमें किसी के नहीं रहने के कारण खिड़कियां और दरवाजे टूटे पड़े हैं और आंगन में घास उग आई है।

अवनीश दीक्षित का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन

अवनीश दीक्षित का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन

अवनीश दीक्षित का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन

अवनीश दीक्षित का फाइल फोटो। स्रोत : परिजन