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Shahjahanpur News: तहसीलदार ने नहीं किया दाखिल-खारिज, फिर भी खतौनी पर चढ़ गया आदेश

Sat, 21 Mar 2026 01:49 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:49 AM IST
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The Tehsildar did not carry out the mutation, yet the order was recorded in the Khetauni.
पुवायां। गांवसभा नाहिल में जंगल झाड़ी की भूमि पर तत्कालीन राजस्वकर्मियों की सांठगांठ से घपले कर जमीन कब्जाई जाती रही। तहसीलदार ने जंगल झाड़ी की भूमि का दाखिल-खारिज नहीं किया फिर भी खतौनी पर आदेश चढ़ा दिया गया।
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इस मामले की शिकायत डीएम से की गई है। वर्ष 2011 में एक व्यक्ति ने जंगल झाड़ी की जमीन को अपनी बताते हुए पुवायां की महिला को बेच दिया। सरकारी जमीन का बैनामा होते समय भी यह जांच करने की जरूरत नहीं समझी गई कि बेची जा रही जमीन राजस्व अभिलेखों में जंगल झाड़ी के रूप में दर्ज होने के कारण बेची नहीं जा सकती है।
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बैनामे के बाद महिला ने दाखिल-खारिज के लिए तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर किया। मामले में लेखपाल ने तहसीलदार को रिपोर्ट दी कि बेची गई जमीन सरकारी है और अभिलेखों में जंगल झाड़ी में दर्ज है। इसके बाद तहसीलदार ने दाखिल-खारिज नहीं किया और 17 जून 2011 को वाद खारिज कर दिया।
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दाखिल-खारिज का वाद निरस्त होने के बाद कुछ राजस्वकर्मियों की सांठगांठ से खेल शुरू हुआ और राजस्व अभिलेखों में 12 सितंबर 2011 को दर्ज कर दिया गया कि तहसीलदार के आदेश से विक्रेता का नाम निरस्त कर क्रेता का नाम दर्ज किया जाता है।
खास बात यह है कि जंगल झाड़ी की भूमि को खतौनी में संक्रमणीय भूमिधरी के रूप में दर्ज किया गया। इस भूमि पर एक प्रतिष्ठान चल रहा है, जिसका लाइसेंस लेने में कई विभागों से एनओसी ली जाती है। बड़ा सवाल है कि बिना सही जांच किए एनओसी कैसे दे दी गई।

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जंगल झाड़ी की भूमि पर कई लोगों ने ले रखा है बैंकों से कर्ज
नाहिल में जंगल झाड़ी की भूमि को लोगों ने बेच दिया तो खरीदारों ने बैनामा कराने के बाद राजस्वकर्मियों से मिलकर जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया। जमीन पर निर्माण कराने के लिए कई लोगों ने बैंकों से कर्ज ले रखा है। ऐसे में जमीन पर प्रशासन कब्जा लेता है तो बैंकों के लिए कर्ज वसूलना टेढ़ी खीर होगी।
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मामले की जांच कराई जाएगी। जंगल झाड़ी की भूमि का दाखिल-खारिज वाद निरस्त होने पर भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने पर रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी।
-चित्रा निर्वाल, एसडीएम पुवायां
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