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बाढ़ का दंश : बुखार की मार... फसलों को नुकसान
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जलालाबाद के गांव कुंडरा में खेत में ही बर्बाद हुई तिल की फसल। संवाद
मिर्जापुर/जलालाबाद। गंगा और रामगंगा नदियों की बाढ़ उतरने के बाद लोग बीमारी की मार झेलने के साथ ही फसलों की तबाही से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य टीमें गांवों में नहीं पहुंच पा रहीं हैं। कई लोग जान भी गवां चुके हैं। इसके अलावा फसल नष्ट हो जाने से किसान भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
मिर्जापुर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों में घर-घर लोग उल्टी, दस्त, पेटदर्द, त्वचा रोगों से पीड़ित हैं। बुखार का प्रकोप है। अधिकतर मरीज झोलाछाप से दवा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कैंप लगाने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत अलग है। मस्जिदनगला के असलम ने बताया कि उसकी बेटी मरियम को कई दिनों से बुखार आ रहा है।
गांव में कई लोग बीमार पड़े हैं। आज तक उनके गांव में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नहीं पहुंचे। आजादनगर के अमन, नाजिम, इशहाक ने बताया कि उनके गांव में भी बुखार फैला हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आ रही। क्षेत्र में बुखार से चार दिनों मे चार बच्चों की मौत हो चुकी है।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आदेश रस्तोगी ने कहा कि मेडिकल टीम जिले से आ रहे रोस्टर के हिसाब से जा रहीं हैं। अगर कहीं टीम नहीं पहुंची है तो वहां जल्द ही शिविर लगाया जाएगा।
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शिविर में मिला इलाज
मिर्जापुर। बृहस्पतिवार को मोतीनगला में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाया। 204 मरीजों का परीक्षण किया। बुखार के 38 मरीजों के रक्त की जांच की गई। वहीं, बुधवार को कुनिया गांव में बुखार से तीन वर्षीय रियांश की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाया। 103 मरीजों की जांच कराई गई। टीम में डॉ. विकास, डॉ. गौरव, डॉ. अक्षिता, आशीष शुक्ला, सचिन, शिवम आदि मौजूद रहे।
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तबाह फसलों को देखकर ग्रामीण परेशान
जलालाबाद। बाढ़ का पानी कम होने के बाद इससे हुए नुकसान को देखकर प्रभावित गांव के लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सब्जी वाले खेतों में हुआ है। नदियों के तटवर्ती गांव कसारी, अतरी निजामपुर, सिठौली, रैपुरा बीघापुर के अलावा चितरऊ, नगला किशुन, संगाहे, थाथरमई, कुंडरा सहित कई अन्य गांवों के निचले इलाके ऐसे भी थे जहां स्थित खेतों में कई कई पानी भरा रहा। खासकर उन खेतों की मूंगफली, रौसा, तिल तथा मेंथा के अलावा धान की फसलें गल गईं या धूप निकलने के बाद उनका सड़ना शुरू हो गया। मक्का तथा बाजरा की फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। पालक, तोरई, परवल, मूली, फूल व पत्तागोभी आदि सब्जियां पूरी तरह नष्ट हो गईं हैं।
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मिर्जापुर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों में घर-घर लोग उल्टी, दस्त, पेटदर्द, त्वचा रोगों से पीड़ित हैं। बुखार का प्रकोप है। अधिकतर मरीज झोलाछाप से दवा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कैंप लगाने का दावा कर रहा है लेकिन हकीकत अलग है। मस्जिदनगला के असलम ने बताया कि उसकी बेटी मरियम को कई दिनों से बुखार आ रहा है।
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गांव में कई लोग बीमार पड़े हैं। आज तक उनके गांव में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नहीं पहुंचे। आजादनगर के अमन, नाजिम, इशहाक ने बताया कि उनके गांव में भी बुखार फैला हुआ है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आ रही। क्षेत्र में बुखार से चार दिनों मे चार बच्चों की मौत हो चुकी है।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आदेश रस्तोगी ने कहा कि मेडिकल टीम जिले से आ रहे रोस्टर के हिसाब से जा रहीं हैं। अगर कहीं टीम नहीं पहुंची है तो वहां जल्द ही शिविर लगाया जाएगा।
शिविर में मिला इलाज
मिर्जापुर। बृहस्पतिवार को मोतीनगला में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाया। 204 मरीजों का परीक्षण किया। बुखार के 38 मरीजों के रक्त की जांच की गई। वहीं, बुधवार को कुनिया गांव में बुखार से तीन वर्षीय रियांश की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाया। 103 मरीजों की जांच कराई गई। टीम में डॉ. विकास, डॉ. गौरव, डॉ. अक्षिता, आशीष शुक्ला, सचिन, शिवम आदि मौजूद रहे।
तबाह फसलों को देखकर ग्रामीण परेशान
जलालाबाद। बाढ़ का पानी कम होने के बाद इससे हुए नुकसान को देखकर प्रभावित गांव के लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सब्जी वाले खेतों में हुआ है। नदियों के तटवर्ती गांव कसारी, अतरी निजामपुर, सिठौली, रैपुरा बीघापुर के अलावा चितरऊ, नगला किशुन, संगाहे, थाथरमई, कुंडरा सहित कई अन्य गांवों के निचले इलाके ऐसे भी थे जहां स्थित खेतों में कई कई पानी भरा रहा। खासकर उन खेतों की मूंगफली, रौसा, तिल तथा मेंथा के अलावा धान की फसलें गल गईं या धूप निकलने के बाद उनका सड़ना शुरू हो गया। मक्का तथा बाजरा की फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। पालक, तोरई, परवल, मूली, फूल व पत्तागोभी आदि सब्जियां पूरी तरह नष्ट हो गईं हैं।

जलालाबाद के गांव कुंडरा में खेत में ही बर्बाद हुई तिल की फसल। संवाद