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Shahjahanpur News: तेज हुई सांप की फुफकार... एक माह में 39 लोगों को डसा
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शाहजहांपुर। बरसात में सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं। गत महीने सबसे ज्यादा 39 लोगों को सांप ने डसा है। कुछ मामलों में पीड़ितों को अस्पताल ले जाने के बजाय उनके परिजनों ने झाड़-फूंक कराया। समय से उपचार नहीं मिलने के कारण तीन मरीजों की जान भी चली गई।
बारिश के कारण सांप अपने बिलों में पानी भर जाने से बाहर निकलकर घरों, खेतों और आबादी वाले इलाकों की ओर आ जाते हैं। पर्यावरण में बदलाव, जंगलों में पेड़-पौधों की कमी और अवैध खनन जैसी गतिविधियों के कारण भी वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अभी तक 88 लोगों को सांप ने डसा है, जबकि असली तस्वीर इसके विपरीत है।
ग्रामीण इलाकाें में लोग अंधविश्वास के फेर में पड़कर सांप काटने पर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इससे स्थिति गंभीर हो जाती है। डॉक्टर के अनुसार, सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। संवाद
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जिले में 3755 वॉयल उपलब्ध
सर्पदंश की घटनाओं में इजाफा होने की संभावना के चलते स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही एंटी स्नेक वेनम की वॉयल मंगा ली है। एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव के अनुसार, सभी सीएचसी और पीएचसी पर पर्याप्त वॉयल उपलब्ध है। इस समय कुल 3755 वॉयल उपलब्ध हैं।
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ये बरतें सावधानी
बारिश के मौसम में खेतों, झाड़ियों और जलभराव वाले स्थानों पर जाते समय सावधानी बरतें। रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को जागरूक रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने का आग्रह किया है।
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कब-कब हुईं सर्पदंश की प्रमुख घटनाएं
23 जून : निगोही के प्रेमनगर गांव निवासी पूनम के पैर में सांप ने डस लिया। पैर में चीरा लगाकर देसी उपचार किया गया। हालत बिगड़ने पर अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
28 जून : कलान के धूमनाथ नगर निवासी 13 वर्षीय गुंजन की सांप के डसने से मौत हो गई।
30 जून : जलालाबाद के बारह पत्थर चौराहे के पास विश्रामनगर में 25 वर्षीय धर्मेंद्र की सर्पदंश की मौत हो गई।
02 जुलाई : गढि़या रंगीन कस्बे के 33 वर्षीय नन्हेलाल को सांप ने डस लिया।
08 जुलाई : मीरानपुर कटरा के गांव कबरा हुसैनपुर निवासी डॉली को सांप ने डस लिया।
07 जुलाई : तिलहर के शेरगढ़ निवासी रामकिशन को खेत में काम करते समय सांप ने डसा।
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सांप के काटने पर यह बरतें सावधानी
डिप्टी सीएमओ डॉ. मोहम्मद आसिफ ने बताया कि झाड़-फूंक के फेर में नहीं पड़े और पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। सर्पदंश पर घबराएं नहीं, इससे ह्दयघात की आशंका रहती है। जिस अंग पर सांप काटे, उसे चलाएं या फिराएं नहीं, स्थिर कर दें। वहां चीरा भी न लगाएं। 80 प्रतिशत सांपों के जहरीला न होने का फायदा झाड़-फूंक करने वाले उठाते हैं।
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ये सांप होते हैं विषैले
कोबरा -खतरा महसूस होने पर फन फैलाने पर चश्मे की आकृति दिखती है। इसमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है। इसके हमले के बाद जल्द उपचार नहीं मिलने पर मौत हो सकती है।
कॉमन करैत-चमकीले काले, नीले, काले रंग का होता है। पीट पर सफेद धारियां होती हैं। रात में निकलता है। इसमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है और कोबरा से ज्यादा घातक होता है।
रसेल वाइपर या कोरिया आला-गहरे-भूरे रंग के छल्ले या गोल धब्बे होते हें। कूकर की सीटी जैसी फुफकार मारता है। इसका हीमोटॉक्सिक जहर खून के थक्के जमने की क्षमता कर देता है। आतंरिक रक्तस्राव होने पर मौत हो सकती है।
बिना जहर वाले सांप-अजगर, धामन या घोड़ा पछाड़, चेकर्ड कीलबैक यानी पानी वाली सांप भी बारिश में निकलते हैं।
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माह सर्पदंश के केस
जनवरी 03
फरवरी 04
मार्च 10
अप्रैल 15
मई 17
जून 39
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बारिश में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। इसे देखते हुए विभाग के पास पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। स्वास्थ्य इकाइयों पर भी वॉयल उपलब्ध कराई गई हैं।
- डॉ. पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ
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बारिश के कारण सांप अपने बिलों में पानी भर जाने से बाहर निकलकर घरों, खेतों और आबादी वाले इलाकों की ओर आ जाते हैं। पर्यावरण में बदलाव, जंगलों में पेड़-पौधों की कमी और अवैध खनन जैसी गतिविधियों के कारण भी वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अभी तक 88 लोगों को सांप ने डसा है, जबकि असली तस्वीर इसके विपरीत है।
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ग्रामीण इलाकाें में लोग अंधविश्वास के फेर में पड़कर सांप काटने पर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इससे स्थिति गंभीर हो जाती है। डॉक्टर के अनुसार, सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। संवाद
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जिले में 3755 वॉयल उपलब्ध
सर्पदंश की घटनाओं में इजाफा होने की संभावना के चलते स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही एंटी स्नेक वेनम की वॉयल मंगा ली है। एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव के अनुसार, सभी सीएचसी और पीएचसी पर पर्याप्त वॉयल उपलब्ध है। इस समय कुल 3755 वॉयल उपलब्ध हैं।
ये बरतें सावधानी
बारिश के मौसम में खेतों, झाड़ियों और जलभराव वाले स्थानों पर जाते समय सावधानी बरतें। रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को जागरूक रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने का आग्रह किया है।
कब-कब हुईं सर्पदंश की प्रमुख घटनाएं
23 जून : निगोही के प्रेमनगर गांव निवासी पूनम के पैर में सांप ने डस लिया। पैर में चीरा लगाकर देसी उपचार किया गया। हालत बिगड़ने पर अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
28 जून : कलान के धूमनाथ नगर निवासी 13 वर्षीय गुंजन की सांप के डसने से मौत हो गई।
30 जून : जलालाबाद के बारह पत्थर चौराहे के पास विश्रामनगर में 25 वर्षीय धर्मेंद्र की सर्पदंश की मौत हो गई।
02 जुलाई : गढि़या रंगीन कस्बे के 33 वर्षीय नन्हेलाल को सांप ने डस लिया।
08 जुलाई : मीरानपुर कटरा के गांव कबरा हुसैनपुर निवासी डॉली को सांप ने डस लिया।
07 जुलाई : तिलहर के शेरगढ़ निवासी रामकिशन को खेत में काम करते समय सांप ने डसा।
सांप के काटने पर यह बरतें सावधानी
डिप्टी सीएमओ डॉ. मोहम्मद आसिफ ने बताया कि झाड़-फूंक के फेर में नहीं पड़े और पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। सर्पदंश पर घबराएं नहीं, इससे ह्दयघात की आशंका रहती है। जिस अंग पर सांप काटे, उसे चलाएं या फिराएं नहीं, स्थिर कर दें। वहां चीरा भी न लगाएं। 80 प्रतिशत सांपों के जहरीला न होने का फायदा झाड़-फूंक करने वाले उठाते हैं।
ये सांप होते हैं विषैले
कोबरा -खतरा महसूस होने पर फन फैलाने पर चश्मे की आकृति दिखती है। इसमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है। इसके हमले के बाद जल्द उपचार नहीं मिलने पर मौत हो सकती है।
कॉमन करैत-चमकीले काले, नीले, काले रंग का होता है। पीट पर सफेद धारियां होती हैं। रात में निकलता है। इसमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है और कोबरा से ज्यादा घातक होता है।
रसेल वाइपर या कोरिया आला-गहरे-भूरे रंग के छल्ले या गोल धब्बे होते हें। कूकर की सीटी जैसी फुफकार मारता है। इसका हीमोटॉक्सिक जहर खून के थक्के जमने की क्षमता कर देता है। आतंरिक रक्तस्राव होने पर मौत हो सकती है।
बिना जहर वाले सांप-अजगर, धामन या घोड़ा पछाड़, चेकर्ड कीलबैक यानी पानी वाली सांप भी बारिश में निकलते हैं।
माह सर्पदंश के केस
जनवरी 03
फरवरी 04
मार्च 10
अप्रैल 15
मई 17
जून 39
बारिश में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। इसे देखते हुए विभाग के पास पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। स्वास्थ्य इकाइयों पर भी वॉयल उपलब्ध कराई गई हैं।
- डॉ. पीपी श्रीवास्तव, एसीएमओ