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खेत की रखवाली करने गए वृद्ध को बाघ ने मार डाला

Sat, 09 Jul 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
ब्यूरो /शाहजहांपुर Updated Sat, 09 Jul 2016 12:24 AM IST
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The old man guarding the farm was killed by tiger
खेत की रखवाली करने गए वृद्ध को बाघ ने मार डाला
बृहस्पतिवार सुबह खेत की रखवाली करने गए वृद्ध को बाघ ने मार डाला। देर रात वृद्ध के घर नहीं आने पर गांव के लोग शोर शराबा करते हुए मौके पर पहुंचे तो बाघ अधखाए शव को छोड़कर जंगल में चला गया। बाघ के हमले में वृद्ध की मौत से गांव के लोगों में दहशत के साथ ही रोष है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। खुटार थाना क्षेत्र की सीमा से सटे खीरी के थाना मैलानी के गांव खरेटा निवासी 65 वर्षीय भोगनाथ बृहस्पतिवार सुबह जंगल के पास स्थित खेत की रखवाली करने गए थे। देर रात तक वह घर वापस नहीं पहुंचे तो परिवार के लोग गावं के तमाम लोगों को साथ लेकर खेत पर पहुंचे। खेत के किनारे पहुंचते ही बाघ को भोगनाथ के शव को खाते देख कई लोगों की घिग्घी बंध गई। लोगों ने शोर शराबा करते हुए फायरिंग की तो बाघ शव को छोड़कर जंगल में चला गया। परिवार के लोग शव को उठाकर घर लाए। बाघ ने शव की गर्दन का काफी हिस्सा और दोनों पैर खा लिए थे। सूचना पाकर मैलानी थाने की पुलिस और वनकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इस दौरान गांव के लोगों की दरोगा रामनाथ कनौजिया, सिपाही कुलदीप, वन दरोगा सुदर्शन सिंह से हॉट टॉक भी हुई। लोगों का आरोप था कि तमाम बार सूचना देने के बाद भी वन विभाग और पुलिस ने बाघ के मामले को बेहद हल्के में लिया। जबकि बाघ पहले भी गांव उजागरपुर के छंगालाल पर हमला पर गंभीर घायल कर चुका है, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। भोगनाथ की मौत से पत्नी उर्मिला देवी,  पुत्र राम स्वरूप, रामनरेश, नीरज का रो रोकर बुरा हाल है। 
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छह वर्ष पहले बाघ ने मार दिए थे पांच लोग
बाघ के हमले में गांव खरेहटा के भोगनाथ के मारे जाने की सूचना मिलते ही खुटार और बंडा क्षेत्र के लोगों को वर्ष 2010 की याद आ गई। 2010 में बाघ ने खुटार और बंडा में पांच लोगों को मार डाला था। लगभग एक माह तक जुटे रहे विशेषज्ञों ने बाघ को बमुश्किल फर्रूखाबाद में ट्रेकुलाइज कर लखनऊ चिड़ियाघार भेजा था। वर्ष 10 में बंडा के बिलंदापुर चौकी क्षेत्र में जंगल में लकड़ी लेने गई महिला को मारने के बाद नरभक्षी हुआ बाघ दो महीने तक खुटार, बंडा में आतंक का पर्याय बना घूमता रहा था। उसे पकड़ने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद विशेषज्ञों ने भी हार मान ली थी। बाद में लगभग तीन माह बाद बाघ फर्रूखाबाद में पकड़ा गया था। तब से यह बाघ चिड़ियाघर में है। अब एक और बाघ खुटार और मैलानी क्षेत्र के गांवों में दहशत फैला रहा है। बाघ को जंगल में खदेड़े जाने और पकड़े जाने की कोई कोशिश नहीं होने से लोगों में रोष है। खुटार रेंज के अधिकारी बाघ के मैलानी रेंज में होने और मैलानी रेंज के अधिकारी बाघ के खुटार रेंज में होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। 
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