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जमीनें दबाए बैठे मऊ रसूलपुर के भूमाफिया में खलबली

Wed, 23 Sep 2020 01:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 01:09 AM IST
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The land mafia of Mau Rasulpur seized on the ground
जलालाबाद। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा बरकरार रखने के लिए अल्हागंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत मऊ रसूलपुर में डेढ़ दशक पहले साजिशन गायब किए गए राजस्व अभिलेखों का मामला अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद मामला चर्चा में आया गया है। इससे जमीनों पर गैरकानूनी तरीके से काबिज दबंग भूमाफिया में खलबली मच गई है। माफिया कार्रवाई से बचने के लिए प्रशासन से लेकर नेताओं तक संपर्क साधने में लग गए हैं। हालांकि प्रशासन ने राजस्व विभाग के किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी को गांव भेजकर मामले में जांच पड़ताल कराने की जरूरत नहीं समझी।
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अल्हागंज स्थित विवेकानंद इंटर कालेज की काफी जमीन मऊ रसूलपुर के दोगाटा नंबरों पर दर्ज है। कॉलेज और ग्राम समाज की जमीनों पर गांव के ही कुछ दबंग भूमाफिया ने कब्जा कर वहां खेती करनी शुरू कर दी। अवैध रूप से कब्जा करने वाले माफिया ने वर्ष 2006 में राजस्व विभाग के कर्मचारियों से सांठगांठ कर गांव की खसरा, खतौनी, जिल्द, नक्शा आदि गायब करा दिया। उन जमीनों से मोटी रकम पैदा कर रहे इन भूमाफिया की करतूत मंगलवार को अमर उजाला में विस्तार से प्रकाशित हुई तो भूमाफिया बेचैन हो उठे।
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उन्हें अवैध कब्जे वाली जमीनें अपने हाथ से निकलते दिखने लगी है। हमेशा दूसरों पर अकड़ दिखाने वाले भूमाफिया मामले को दबाए रखने के लिए दिन भर दौड़भाग में जुटे रहे। बताते हैं कि गांव के एक भूमाफिया ने कार्रवाई से बचने को सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं से अपनी पैरवी कराने के लिए संपर्क साधा, लेकिन उसे किसी स्तर पर न तो कोई राहत मिली और न ही बचाव का आश्वासन। इधर, प्रशासन और राजस्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी इस मामले में उदासीन बने हुए हैं और इसीलिए उन्होंने अभिलेख गायब करने की साजिश में शामिल लोगों को बेनकाब करने के लिए जांच पड़ताल कराने की जरूरत नहीं समझी।
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जमीनों से कब्जे हटवाने की बात हो या ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिलाना हो, यह सभी कार्य अभिलेखों के बगैर संभव नहीं हैं। तहसील के राजस्व रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखागार में गांव से संबंधित जो भी अभिलेख उपलब्ध हो सके, उन्हें नक्शा बनवाने को रुड़की भिजवाया गया था। इस बारे में राजस्व परिषद को कई पत्र भेजे जा चुके हैं। राजस्व परिषद की पैरवी से ही इस मामले में कोई काम आगे बढ़ सकता है। जल्द ही इस दिशा में नए सिरे से प्रयास शुरू किए जाएंगे।
- अजय कुमार, तहसीलदार (जलालाबाद)
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