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Shahjahanpur News: फर्म का स्थलीय परीक्षण न होने से ठगी का रास्ता हो रहा साफ

Mon, 29 Dec 2025 12:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Dec 2025 12:17 AM IST
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The lack of on-site testing by the firm is paving the way for fraud.
शाहजहांपुर। बोगस फर्म बनाकर करोड़ों की कर चोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जीएसटी विभाग की ओर से स्थलीय परीक्षण न कराए जाने के कारण ठग, आसानी से कर चोरी कर लेते हैं। केवल ऑनलाइन आवेदन से फर्म पंजीकृत हो जाती है। ऑनलाइन आवेदन के लिए सरल प्रक्रिया होने की वजह से जालसाज इसका फायदा उठाते हैं।
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जीएसटी के लिए कोई भी व्यक्ति अपनी फर्म बनाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। विभाग की ओर से फर्म का स्थलीय परीक्षण 30 दिन में हो जाना चाहिए। विभाग के पास संसाधनों और स्टाफ की कमी होने की वजह से इसमें काफी समय लग जाता है। खासकर केंद्रीय क्षेत्र की फर्माें का स्थलीय परीक्षण नहीं हो पाता। इस वजह से लोग आसानी से बोगस फर्म बना लेते हैं। फर्जी बिलों के आधार पर कर चोरी करते हैं। ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जीएसटी विभाग इन पर नकेल नहीं कस पा रहा है।
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बोगस फर्म बनाकर की 25 करोड़ की चोरी

जीएसटी की टीम ने शनिवार को बोगस फर्म से फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये की कर चोरी करने का खुलासा किया। आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ उठाने के लिए लखनऊ से लेकर हरियाणा, दिल्ली तक बोगस फर्म बनाई गईं थीं। आठ महीने में डेढ़ सौ करोड़ रुपये के बिल बनाकर 25 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया। बरेली जीएसटी एसआईबी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच) के डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि कांट के मरैना गांव में सूरजपाल सिंह के नाम से पंजीकृत फर्म सर्वश्री महादेव इंटरप्राइजेज द्वारा कर चोरी मामले की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों के सामने पेश की जाएगी। उनके आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कटरा में भी फर्जी फर्म बनाकर की गई थी 35 लाख की कर चोरी
कटरा-जलालाबाद में पिछले सप्ताह जीएसटी की टीम ने एक फर्म पर छापा मारा था। फर्म ने छह वर्ष से कर जमा नहीं किया था। फर्जी बिलों पर दो करोड़ का टर्नओवर दिखाकर 35 लाख रुपये की कर चोरी करने का मामला सामने आया था।
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11 करोड़ रुपये की पकड़ी थी कर चोरी
जीएसटी की बोगस फर्म बनाकर पौने 11 करोड़ रुपये की कर चाेरी करने वाले तीन शातिरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दिल्ली निवासी गौरव यादव, दीपक व प्रयागराज का सिद्धार्थ पांडेय गिरोह बनाकर पिछले पांच वर्षों से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे। इंटरनेट मीडिया पर स्वयं की फाइनेंस कंपनी बताकर बिना कोई वस्तु बंधक बनाए ऋण का विज्ञापन देते थे। जो छात्र व जरूरतमंद इनके जाल में फंसते उनके अभिलेखों से किराये के भवन का एग्रीमेंट व बोगस फर्म बनाते। उसके आधार पर व्यापार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट आइटीसी से कर चोरी करते थे। पूछताछ में गत एक वर्ष में इस तरह की 150 से अधिक फर्जी फर्म बनाने की बात सामने आई थी।

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ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया काफी सरल है। स्थलीय जांच में भी समय लग जाता है। खासकर केंद्रीय क्षेत्र की फर्माें में बोगस फर्म बनाने के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। विभाग के पास संसाधनों और स्टाफ की कमी से भी दिक्कत आ रही है।
- प्रवेश तोमर, उपायुक्त, राज्यकर
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