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Shahjahanpur News: राक्षस तारकासुर के वध का प्रसंग सुन जय-जयकार कर उठे श्रद्धालु
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खिरनीबाग क्रीड़ा मैदान में शिव महापुराण कथा सुनाते संत प्रशांत महाराज। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। खिरनीबाग स्थित जीआईसी क्रीड़ा मैदान पर चल रही श्री शिव महापुराण कथा के नवम दिवस शनिवार को संत प्रशांत प्रभु महाराज ने भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय के राक्षस तारकासुर का वध करने का प्रसंग सुनाया। पूरा कथा पंडाल भोलेनाथ और शिव पुत्र कार्तिकेय महाराज की जय-जयकार से गूंज उठा।
कथावाचक ने बताया कि राक्षस तारकासुर ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसे केवल शिव पुत्र ही पराजित कर सकता है। शिव तो समाधि में लीन थे। धरती पर अधर्म का अंधकार छाने लगा। देवता व्याकुल हो उठे।
माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर महादेव को अपने अर्धांग के रूप में पाया और उनके योग से एक दिव्य तेजस्वी बालक का जन्म हुआ। भगवान कार्तिकेय के छह मुख, छह भुजाएं और अनंत शक्ति देखकर देवता भी हर्षित हो उठे। उन्हीं के नेतृत्व में देवसेना ने असुरों को ललकारा।
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तारकासुर और कार्तिकेय के बीच भयंकर युद्ध हुआ। भगवान कार्तिकेय ने अपने दिव्य शक्तिबाण से तारकासुर का अंत किया। कथा में पूर्व एमएलसी संजय मिश्रा ने पूजन कराया।
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कथावाचक ने बताया कि राक्षस तारकासुर ने घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसे केवल शिव पुत्र ही पराजित कर सकता है। शिव तो समाधि में लीन थे। धरती पर अधर्म का अंधकार छाने लगा। देवता व्याकुल हो उठे।
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माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर महादेव को अपने अर्धांग के रूप में पाया और उनके योग से एक दिव्य तेजस्वी बालक का जन्म हुआ। भगवान कार्तिकेय के छह मुख, छह भुजाएं और अनंत शक्ति देखकर देवता भी हर्षित हो उठे। उन्हीं के नेतृत्व में देवसेना ने असुरों को ललकारा।
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तारकासुर और कार्तिकेय के बीच भयंकर युद्ध हुआ। भगवान कार्तिकेय ने अपने दिव्य शक्तिबाण से तारकासुर का अंत किया। कथा में पूर्व एमएलसी संजय मिश्रा ने पूजन कराया।