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Shahjahanpur News: अदालत ने सीओ से मांगा स्पष्टीकरण
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शाहजहांपुर। आरोपपत्रों पर बगैर दिनांक डाले सूक्ष्म हस्ताक्षर करने पर अदालत ने सीओ सदर प्रयांक जैन से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति एसपी और अपर पुलिस महानिदेशक, बरेली जोन को भेजी है।
अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दिनेश कुमार दिवाकर की कोर्ट में निगोही थाने में आबकारी अधिनियम के दर्ज मामलों को संज्ञान लिए जाने के लिए पेश किया गया। आरोप पत्रों को सीओ सदर प्रयांक जैन ने अग्रसारित किया है। अदालत ने कहा कि उप्र पुलिस रेगुलेशन के अनुसार संबंधित क्षेत्राधिकारी आरोपपत्र एक सप्ताह से ज्यादा अपने कार्यालय में नहीं रख सकते। उन्हें आरोपपत्र निर्धारित समय में ही न्यायालय में दाखिल करना होगा।
यह प्रावधान इसलिए किया गया है कि अभियुक्तों को विलंब से जो लाभ मिलता है, वह न मिले। यदि आरोपपत्र न्यायालय में सुसंगत समय में प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो इसका सीधा लाभ अभियुक्त को होगा। आरोपपत्रों पर सीओ ने अग्रसारण की तिथि अंकित नहीं की जिस कारण आरोपपत्र उनके कार्यालय में कब प्राप्त हुआ और न्यायालय में संज्ञान के लिए कब प्रस्तुत किया गया, इस बात का निर्धारण नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं। अदालत ने सीओ का लिखित स्पष्टीकरण 17 मार्च को प्रस्तुत करने का आदेश देते हुए कहा कि क्यों न उनके अवैधानिक कृत्यों से शासन को अवगत कराया जाए।
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अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दिनेश कुमार दिवाकर की कोर्ट में निगोही थाने में आबकारी अधिनियम के दर्ज मामलों को संज्ञान लिए जाने के लिए पेश किया गया। आरोप पत्रों को सीओ सदर प्रयांक जैन ने अग्रसारित किया है। अदालत ने कहा कि उप्र पुलिस रेगुलेशन के अनुसार संबंधित क्षेत्राधिकारी आरोपपत्र एक सप्ताह से ज्यादा अपने कार्यालय में नहीं रख सकते। उन्हें आरोपपत्र निर्धारित समय में ही न्यायालय में दाखिल करना होगा।
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यह प्रावधान इसलिए किया गया है कि अभियुक्तों को विलंब से जो लाभ मिलता है, वह न मिले। यदि आरोपपत्र न्यायालय में सुसंगत समय में प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो इसका सीधा लाभ अभियुक्त को होगा। आरोपपत्रों पर सीओ ने अग्रसारण की तिथि अंकित नहीं की जिस कारण आरोपपत्र उनके कार्यालय में कब प्राप्त हुआ और न्यायालय में संज्ञान के लिए कब प्रस्तुत किया गया, इस बात का निर्धारण नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं। अदालत ने सीओ का लिखित स्पष्टीकरण 17 मार्च को प्रस्तुत करने का आदेश देते हुए कहा कि क्यों न उनके अवैधानिक कृत्यों से शासन को अवगत कराया जाए।