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दावे हवाहवाई : दिन में ठंडे पड़े पड़े नगर निगम के अलाव
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अंटा चौराहा पर बुझा पड़ा अलाव। संवाद
शाहजहांपुर। शीतलहर और भयंकर गलन के चलते नगर निगम ने शहर के 74 स्थानों और दिन में 16 स्थानों पर अलाव जलवाने का दावा किया है। दावे की पड़ताल की गई तो दिन में एक-दो स्थानों को छोड़कर कहीं भी अलाव लगे नजर नहीं आए। रात में ही रखे बुझ चुके अलाव दिखाई दिए। इधर, रात में भी अलाव जलवाने के नाम पर खानापूरी की जा रही है। यह और बात है कि नगर निगम के कागजों में रोजाना एक लाख रुपये से अधिक का खर्च अलाव जलाने में दिखाया जा रहा है।
कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। नगर निगम ने दिन में अलाव जलाने के लिए 16 स्थानों को चिह्नित किया है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने इसकी पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। अधिकतर अलाव ठंडे पड़े हुए थे। कुछ स्थानों पर लकड़ी भी नहीं डाली गई थी।
नगर निगम की ओर से दो बार टेंडर प्रक्रिया हुई, लेकिन कोई ठेकेदार टेंडर नहीं लेने आया। इसके चलते नगर निगम के कर्मचारी खुद अलाव जलाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लोगों के मुताबिक नगर निगम की ओर से अलाव के लिए लकड़ियां डाली जा रही हैं। हालांकि लकड़ी गीली होने की वजह से अलाव जलता कम सुलगता ज्यादा है।
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नगर निगम के कर्मचारी डीजल डालकर गीली लकड़ी को जलाकर फोटो खींचकर नगर निगम के ग्रुप में डाल देते हैं। इसके बाद चले जाते हैं। कुछ देर में अलाव बुझ जाता है या उसमें हल्की आंच रह जाती है जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पाती। जरूरतमंद लोग किसी तरह से लकड़ी को जलाने का प्रयास करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाती है।
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दिन में अलाव जलाने के लिए चिह्नित स्थान
रोडवेज बस स्टेशन, टाउनहॉल रैन बसेरा, विकास भवन के पास, कलक्ट्रेट, जजी कचहरी, खिरनीबाग चौराहा, अंटा चौराहा, केरूगंज चौराहा, राजघाट चौकी, राजकीय मेडिकल कॉलेज में अस्थायी रैन बसेरा, राजकीय मेडिकल कॉलेज में चौकी के पास, पोस्टमार्टम हाउस, रोजा गल्ला मंडी, रोजा सब्जी मंडी, रोजा अड्डा, रोजा थाना आदि।
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नहीं जलते मिले अलाव
खिरनीबाग चौराहा पर मोटी लकड़ी पड़ी दिखाई दी, लेकिन जल नहीं रही थी। इसी तरह से विकास भवन के पास अलाव जलते नहीं मिला। कलक्ट्रेट गेट पर भी रात की पड़ी लकड़ी में हल्की आंच शेष रह गई थी। अंटा चौराहा पर लकड़ी का ढेर लगा हुआ था, लेकिन आग नहीं जल रही थी। लाल इमली चौराहा के पास राख का ढेर पड़ा हुआ था। यहां मौजूद पुलिसकर्मी ने बताया कि दो दिन से लकड़ी नहीं डाली गई है। टाउनहॉल रैनबसेरे में भी लकड़ी पड़ी थी, लेकिन जल नहीं रही थी। घंटाघर पर कुछ लोग गीली लकड़ी को जलाने का प्रयास कर रहे थे।
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क्षेत्र में लाल इमली चौराहा के पास रात में कभी-कभी अलाव जलाया जाता है। दिन में कभी नहीं जलाया जाता। गीली लकड़ी होने की वजह से आग नहीं जलती है। इससे लोगों को लाभ नहीं मिलता है।
- रोशन कुमार, बाडूजई द्वितीय
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अंटा चौराहा पर अलाव लगाया जाता है, लेकिन लकड़ी गीली होने की वजह से आग नहीं जल पाती। लोग प्रयास भी करते हैं, लेकिन लकड़ी जलती नही है। लोग सर्दी में परेशान रहते हैं।
- विनोद सिंह, अंटा चौराहा
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निगम की ओर से लगाए जा रहे अलाव की लगातार अधिकारियों के माध्यम से निगरानी की जा रही है। अलाव जलाने के बाद फोटो ग्रुप पर मंगाया जाता है। अगर कहीं अलाव नहीं जल रहा है तो वहां पर जलवाया जाएगा।
- डॉ. बिपिन कुमार मिश्र, नगर आयुक्त
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कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। नगर निगम ने दिन में अलाव जलाने के लिए 16 स्थानों को चिह्नित किया है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने इसकी पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। अधिकतर अलाव ठंडे पड़े हुए थे। कुछ स्थानों पर लकड़ी भी नहीं डाली गई थी।
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नगर निगम की ओर से दो बार टेंडर प्रक्रिया हुई, लेकिन कोई ठेकेदार टेंडर नहीं लेने आया। इसके चलते नगर निगम के कर्मचारी खुद अलाव जलाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लोगों के मुताबिक नगर निगम की ओर से अलाव के लिए लकड़ियां डाली जा रही हैं। हालांकि लकड़ी गीली होने की वजह से अलाव जलता कम सुलगता ज्यादा है।
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नगर निगम के कर्मचारी डीजल डालकर गीली लकड़ी को जलाकर फोटो खींचकर नगर निगम के ग्रुप में डाल देते हैं। इसके बाद चले जाते हैं। कुछ देर में अलाव बुझ जाता है या उसमें हल्की आंच रह जाती है जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पाती। जरूरतमंद लोग किसी तरह से लकड़ी को जलाने का प्रयास करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाती है।
दिन में अलाव जलाने के लिए चिह्नित स्थान
रोडवेज बस स्टेशन, टाउनहॉल रैन बसेरा, विकास भवन के पास, कलक्ट्रेट, जजी कचहरी, खिरनीबाग चौराहा, अंटा चौराहा, केरूगंज चौराहा, राजघाट चौकी, राजकीय मेडिकल कॉलेज में अस्थायी रैन बसेरा, राजकीय मेडिकल कॉलेज में चौकी के पास, पोस्टमार्टम हाउस, रोजा गल्ला मंडी, रोजा सब्जी मंडी, रोजा अड्डा, रोजा थाना आदि।
नहीं जलते मिले अलाव
खिरनीबाग चौराहा पर मोटी लकड़ी पड़ी दिखाई दी, लेकिन जल नहीं रही थी। इसी तरह से विकास भवन के पास अलाव जलते नहीं मिला। कलक्ट्रेट गेट पर भी रात की पड़ी लकड़ी में हल्की आंच शेष रह गई थी। अंटा चौराहा पर लकड़ी का ढेर लगा हुआ था, लेकिन आग नहीं जल रही थी। लाल इमली चौराहा के पास राख का ढेर पड़ा हुआ था। यहां मौजूद पुलिसकर्मी ने बताया कि दो दिन से लकड़ी नहीं डाली गई है। टाउनहॉल रैनबसेरे में भी लकड़ी पड़ी थी, लेकिन जल नहीं रही थी। घंटाघर पर कुछ लोग गीली लकड़ी को जलाने का प्रयास कर रहे थे।
क्षेत्र में लाल इमली चौराहा के पास रात में कभी-कभी अलाव जलाया जाता है। दिन में कभी नहीं जलाया जाता। गीली लकड़ी होने की वजह से आग नहीं जलती है। इससे लोगों को लाभ नहीं मिलता है।
- रोशन कुमार, बाडूजई द्वितीय
अंटा चौराहा पर अलाव लगाया जाता है, लेकिन लकड़ी गीली होने की वजह से आग नहीं जल पाती। लोग प्रयास भी करते हैं, लेकिन लकड़ी जलती नही है। लोग सर्दी में परेशान रहते हैं।
- विनोद सिंह, अंटा चौराहा
निगम की ओर से लगाए जा रहे अलाव की लगातार अधिकारियों के माध्यम से निगरानी की जा रही है। अलाव जलाने के बाद फोटो ग्रुप पर मंगाया जाता है। अगर कहीं अलाव नहीं जल रहा है तो वहां पर जलवाया जाएगा।
- डॉ. बिपिन कुमार मिश्र, नगर आयुक्त

अंटा चौराहा पर बुझा पड़ा अलाव। संवाद

अंटा चौराहा पर बुझा पड़ा अलाव। संवाद

अंटा चौराहा पर बुझा पड़ा अलाव। संवाद