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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   The challenge will be for the administration of flood disaster

प्रशासन के लिए चुनौती साबित होगी बाढ़ की विभीषिका

Sun, 03 Jul 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
ब्यूरो /शाहजहांपुर Updated Sun, 03 Jul 2016 11:45 PM IST
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जिले में मानसून की बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। शनिवार से रिमझिम बरसात का दौर शुरू हो जाने से  प्रशासन का आपदा राहत तंत्र सक्रिय हो गया है। कलक्ट्रेट के आपदा राहत प्रकोष्ठ ने बाढ़ से जनजीवन के बचाव को कार्य योजना बनाकर विभिन्न तहसीलों में 72 बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी हैं, लेकिन जिले की विषम भौगोलिक स्थिति के कारण बाढ़ की विभीषिका गहराने पर उससे निपटना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। हालांकि, डीएम पुष्पा सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को पहले से निर्देशित कर रखा है। 
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बारिश में बाढ़ का कहर ढाती हैं कई नदियां
चारों ओर नदियों से घिरे जिले में हर साल बारिश के सीजन में नदियां विकराल रूप लेकर सैकड़ों तटवर्ती गावों में बाढ़ का कहर ढाती हैं। गर्रा और खन्नौत नदी से घिरा शहर काफी ऊंचाई पर बसा होने के कारण इन नदियों की बाढ़ से बचा रहता है, लेकिन शहरी सीमा से आगे भावलखेड़ा और ददरौल ब्लॉक के तमाम गांव इन दोनों नदियों की बाढ़ से घिरकर टापू बन जाते हैं। इसी तरह पुवायां तहसील में पूरे साल गोमती का प्रवाह काफी धीमी गति से होता है, लेकिन बरसात में उफनाती हुई गोमती आसपास के तमाम गावों में कहर ढाती है।
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गंगा-रामगंगा से पैदा होता है बरबादी का मंजर
गंगा और उसकी सहायक रामगंगा जलालाबाद तहसील के मिर्जापुर व कलान और तिलहर तहसील के जैतीपुर ब्लॉक में एक-दूसरे के समानान्तर बहती हैं। इन नदियों से आसपास की हजारों हेक्टेयर खेती की जमीन सिंचित होती है, लेकिन बारिश का दौर शुरू होने के साथ उत्तराखंड के बैराज खुलते ही दोनों नदियां चढ़कर एकाकार हो जाती हैं। इससे संबंधित विकास खंडों के सैकड़ों गांव जलमगभन हो जाते हैं। बाढ़ की स्थिति तब और भयावह हो जाती है, जब गंगा-रामगंगा के प्रवाह में बहगुल नदी की जलराशि भी एकाकार हो जाती है। 
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पांच वर्ष पहले विस्थापित हो चुके सैकड़ों परिवार
वर्ष 2010 और 2011 में आई भयानक बाढ़ को मिर्जापुर और कलान के बाशिंदे आज भी याद करके सिहर उठते हैं। उस दौरान गंगा की लहरों ने तमाम गांवों में तबाही मचाई। सैकड़ों कच्चे-पक्के मकान बाढ़ में बह जाने के साथ ही मां-बेटा समेत कई लोग जल समाधि का शिकार बन गए। ऐसे में तत्कालीन डीएम मिनिस्ती एस ने राहत कार्यों की कमान खुद संभाली और पीएसी के मोटर बोट मंगाकर पानी में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भिजवाया।

बाढ़ चौकियों पर ग्राम स्तरीय कर्मचारियों की तैनाती
गुजरे सालों में बाढ़ की भयावहता का आकलन करने के बाद प्रशासन आपदा राहत और बचाव में कोई कमी नहीं रखना चाहता। इसीलिए तहसीलवार बाढ़ चौकियां तय करके वहां लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारियों, राजस्व संग्रह अमीनों आदि कर्मचारियों की ड्यूटी तय कर दी गई है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जलालाबाद तहसील में 24, तिलहर में 31, सदर में दस और पुवायां तहसील में सात बाढ़ चौकियां तय की गई हैं। 

31 नावों से निकाले जाएंगे बाढ़ में फंसे लोग
बाढ़ में फंसे लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 31 नावों का प्रबंध कर लिया है। सर्वाधिक 11 नावें जलालाबाद में सक्रिय रहेंगी। सदर और तिलहर तहसील के लिए नौ-नौ और पुवायां तहसील के लिए दो नावों की व्यवस्था की गई है।

खतरे के निशान से हैं नीचे हैं अधिकांश नदियां
सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरीश बाबू मिश्रा ने उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के बैराजों से मिली सूचनाओं के आधार पर बताया कि पिछले 24 घंटे में नरौरा बैराज से गंगा में 20153 क्यूसेक और रामगंगा में रामनगर, खो, हरेली आदि बैराजों से 6054 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गर्रा में ड्यूनी डाम से 9504 क्यूसेक पानी रिलीज होने की सूचना मिली, लेकिन इन नदियों में अगले 72 घंटे तक बाढ़ की कोई संभावना नहीं है। तार बाबू के अनुसार भैंसार में गंगा 141.10 मीटर, बरेली के चौबारी में रामगंगा 158.30 मीटर पर बह रही है। यह जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। 


सूखा और बाढ़ आपदा से निपटने के लिए एक साथ काम किया जा रहा है। सूखा पीड़ित किसानों को राहत देने के लिए लगान के रूप में मुख्य देय की वसूली 30 सितंबर तक के लिए स्थगित की जा चुकी है। इसी के साथ बाढ़ को लेकर अभी से सतर्कता बरती जा रही है। बाढ़ के दौरान जल प्लावित क्षेत्रों के लोगों को खाद्यान्न, चीनी, मोमबत्ती, माचिस, भुना चना-गुड़, दवाएं, पशुओं की दवाएं, पेयजल उपलब्धता, यातायात संसाधन आदि के बारे में डीएसओ, सीएमओ, सीवीओ, एआरटीओ, राजस्व, जल निगम आदि विभागों के अधिकारियों को डीएम के स्तर से निर्देशित किया जा चुका है। 
-मुनेंद्र नाथ उपाध्याय, एडीएम प्रशासन
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