फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   The ancestors will be satisfied by performing Shradh in a proper way.

विधिपूर्वक श्राद्ध करने से होगी पितरों को तृप्ति

Sat, 10 Sep 2022 01:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 01:09 AM IST
विज्ञापन
The ancestors will be satisfied by performing Shradh in a proper way.
आचार्य सत्यम दीक्षित - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। श्राद्ध पक्ष शनिवार से शुरू हो रहा है। विधिपूर्वक किए गए श्राद्ध से पितरों की तृप्ति होती है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को यश और कीर्ति मिलती है, लेकिन अगर सावधानी न बरती गई तो कष्ट भी भोगना पड़ सकता है। श्राद्ध करने का उत्तम समय सुबह छह से 11 बजे तक है।
विज्ञापन

नैमिषारण्य से शिक्षा प्राप्त आचार्य सत्यम दीक्षित बताते हैं कि धर्म शास्त्रों के अनुसार विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों को तृप्ति देता है। देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पितरों यानि पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। हिंदू ज्योतिष के अनुसार भी पितृ दोष को सबसे जटिल कुंडली दोषों में से एक माना जाता है। पितरों की शांति के लिए हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध होते हैं। मान्यता है कि कुछ समय के लिए यमराज पितरों को आजाद कर देते हैं, ताकि वे परिजन से श्राद्ध ग्रहण कर सकें।
विज्ञापन

यह है श्राद्ध
आचार्य सत्यम के मुताबिक जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्राद्धपूर्वक दिया जाए, वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है। पिंड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का अहम हिस्सा होता है। श्राद्ध में तिल, चावल, जौ आदि को महत्व है। श्राद्ध में तिल और कुशा का सर्वाधिक महत्व होता है। श्राद्ध में पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोज्य पदार्थ को पिंडी रूप में अर्पित करना चाहिए। श्राद्ध का अधिकार पुत्र, भाई, पौत्र, प्रपौत्र समेत महिलाओं को भी होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

श्राद्ध में कौओं का महत्व
बताया कि कौआ को पितरों का रूप माना जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध ग्रहण करने के लिए हमारे पूर्वज कौओं का रूप धारण कर नियत तिथि पर दोपहर के समय हमारे घर आते हैं। अगर उन्हें श्राद्ध नहीं मिलता तो वह रुष्ट हो जाते हैं। इस कारण श्राद्ध का प्रथम अंश कौओं को दिया जाता है।
इसलिए जरूरी है श्राद्ध
मान्यता है कि अगर पितर रुष्ट हो जाएं तो मनुष्य को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितरों की अशांति के कारण धन हानि और संतान पक्ष से समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। संतान-हीनता के मामलों में ज्योतिष पितृ दोष को अवश्य देखते हैं। ऐसे लोगों को पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।

इन बातों का रखे विशेष ध्यान
पत्ते पर रखकर देवताओं के लिए अन्न निकालें और गाय को खिलाएं। चींटी आदि के लिए भी भोजन निकालें। अग्नि के लिए भोजन निकालकर थोड़ा अग्नि में डालकर शेष अन्न गाय को खिलाएं। भोजन पत्ते पर रखकर गाय और कुत्ते को खिलाएं। भोजन भूमि या छत पर डालकर कौओं को खिलाना चाहिए। इन सबके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed