{"_id":"60c7a3408ebc3e7a86425119","slug":"suicide-case-shahjahanpur-news-bly449808960","type":"story","status":"publish","title_hn":"अखिलेश का करीबी दोस्त सुशील और धमकाने वाला मिथलेश भेजे गए जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अखिलेश का करीबी दोस्त सुशील और धमकाने वाला मिथलेश भेजे गए जेल
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शाहजहांपुर। सामूहिक आत्महत्या के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी घटना से एक दिन पहले सूदखोर के साथ अखिलेश को घर के बाहर धमकाने पहुंचा था। दूसरा आरोपी खुद को अखिलेश का काफी अच्छा मित्र बताता था। जांच के दौरान दोनों आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कच्चा कटरा निवासी दवा व्यापारी अखिलेश गुप्ता ने सूदखोर अविनाश से प्रताड़ित होकर सात जून को परिवार समेत आत्महत्या कर ली थी। पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी अविनाश वाजपेयी को आठ जून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शवों के पास से सुसाइड नोट और एक डायरी मिली थी। डायरी में कच्चा कटरा मोहल्ला निवासी सुशील गुप्ता का नाम भी था। सुशील गुप्ता ने भी अखिलेश को कई जगह से कमेटी के नाम पर रुपये दिलाये थे। घटना के बाद से सुशील पुलिस को गुमराह करता चला आ रहा था। डायरी की बारीकी से जांच करने के बाद पुलिस ने सुशील और घटना से एक दिन पहले अविनाश के साथ अखिलेश को घर आकर धमकाने के मामले में कांट क्षेत्र के जमौर गांव निवासी मिथिलेश कुमार को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया।
सोमवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है। माना जा रहा है कि जेल में बंद आरोपी अविनाश का गैंग काफी बड़ा है। अखिलेश को प्रताड़ित करने वाले अभी और लोग हैं जो खुलेआम घूम रहे हैं।
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सुशील खुद को बताता रहा अखिलेश का मित्र
सात जून को सबसे पहले घटना की सूचना पुलिस को देने वाला सुशील गुप्ता ही था। घटना के बाद सुशील खुद को अखिलेश का काफी करीबी मित्र बताता रहा। घटना के बाद सुशील गुप्ता ने कहा था कि अखिलेश हरदोई जाने वाला था। उसको भी हरदोई में कुछ काम था। अखिलेश का फोन न लगने के कारण वह उसके घर गया था। घटना के बाद लगातार सुशील अखिलेश के परिवार का हमदर्द बना रहा। माता-पिता के करीब आने की कोशिश कर रहा था। घटना से पहले अखिलेश के साथ क्या हुआ, किस तरह उसको परेशान किया गया, सुशील ने इसकी जानकारी परिवार को नहीं दी। सुशील ने कई बार कहा कि अखिलेश ने अपनी परेशानी के बारे में कभी जिक्र नहीं किया। सुशील गुप्ता खुद को अखिलेश का करीब 20 साल पुराना मित्र बता रहा था। दो दिन पहले एक रसीद वायरल हुई थी। इसमें सुशील गुप्ता, आकाश वाजपेयी और अखिलेश गुप्ता के नाम थे। इसमें लिखा गया था कि अखिलेश को 84 लाख रुपये दिया गया है। रसीद के बारे में जब सुशील से बात की तो उसने रसीद को फर्जी बताया था। इस तरह लगातार सुशील अखिलेश के परिवार और पुलिस को गुमराह करता रहा। पुलिस ने रविवार को सुशील गुप्ता और मिथिलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद सोमवार को दोनों को जेल भेज दिया गया।
अखिलेश के पिता को सुरक्षा देने की मांग
अखिलेश के परिवार में सिर्फ बूढ़े माता-पिता और उनकी एक विधवा बहन बची हैं। बाकी तीन बहनें अपनी ससुराल में हैं। मुकदमे की पैरवी करने के लिए माता-पिता को कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उन्हें जान का खतरा बताते हुए उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के महानगर अध्यक्ष सचिन बाथम के नेतृत्व में व्यापारियों ने एसपी से मिलकर अखिलेश के पिता को सुरक्षा देने की मांग की। महानगर अध्यक्ष सचिन बाथम ने बताया कि सोमवार को एसपी एस आनन्द ने जल्द से जल्द सुरक्षा देने का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वालों में अनुज अग्रवाल, हनी सिंह, सलाउद्दीन खान आदि मौजूद रहे।
सूदखोरों के खिलाफ हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग
शाहजहांपुर। व्यापारी नेता किशोर गुप्ता सोमवार को वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से मिले और सूदखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि अखिलेश गुप्ता के परिवार की सामूहिक आत्महत्या के मामले की सीबीसीआईडी जांच कराई जाए और सूदखोर अविनाश वाजपेयी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। किशोर गुप्ता ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि सभी थानों में शिकायत रजिस्टर रखा जाए जिसमें सूदखोरों का पूरा ब्यौरा दर्ज हो। साथ ही पूरे प्रदेश के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए जिसमें शिकायत होने पर सूदखोरों के खिलाफ कार्रवाई हो। वित्त मंत्री ने मांगों पर विचार का आश्वासन दिया है। इस दौरान किशोर गुप्ता के साथ अवि गुप्ता, नितिन गुप्ता आदि थे। संवाद
हिरासत में लेकर कई लोगों से हो रही पूछताछ
शाहजहांपुर। सामूहिक आत्महत्या मामले में पुलिस की जांच में कुछ और नाम भी सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि अविनाश समेत उसके कई साथी कमेटी बनाकर रुपये का लेनदेन करते थे। कमेटी में करीब 20 लोग शामिल होते थे। जिसका लेनदेन लाखों रुपये का होता था। जांच के दौरान कमेटी की बात पता चलने के बाद पुलिस ने कई और लोगों को हिरासत में लिया है। जिनसे चलने वाली कमेटी के बारे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा इस प्रकरण से जुड़े सबूतों को इकट्ठा करने के लिए जेल में बंद सूदखोर अविनाश को रिमांड पर लेने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसपी सिटी संजय कुमार ने बताया कि कई और लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। अविनाश को रिमांड पर लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है। संवाद
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चौक कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कच्चा कटरा निवासी दवा व्यापारी अखिलेश गुप्ता ने सूदखोर अविनाश से प्रताड़ित होकर सात जून को परिवार समेत आत्महत्या कर ली थी। पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी अविनाश वाजपेयी को आठ जून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शवों के पास से सुसाइड नोट और एक डायरी मिली थी। डायरी में कच्चा कटरा मोहल्ला निवासी सुशील गुप्ता का नाम भी था। सुशील गुप्ता ने भी अखिलेश को कई जगह से कमेटी के नाम पर रुपये दिलाये थे। घटना के बाद से सुशील पुलिस को गुमराह करता चला आ रहा था। डायरी की बारीकी से जांच करने के बाद पुलिस ने सुशील और घटना से एक दिन पहले अविनाश के साथ अखिलेश को घर आकर धमकाने के मामले में कांट क्षेत्र के जमौर गांव निवासी मिथिलेश कुमार को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया।
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सोमवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है। माना जा रहा है कि जेल में बंद आरोपी अविनाश का गैंग काफी बड़ा है। अखिलेश को प्रताड़ित करने वाले अभी और लोग हैं जो खुलेआम घूम रहे हैं।
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सुशील खुद को बताता रहा अखिलेश का मित्र
सात जून को सबसे पहले घटना की सूचना पुलिस को देने वाला सुशील गुप्ता ही था। घटना के बाद सुशील खुद को अखिलेश का काफी करीबी मित्र बताता रहा। घटना के बाद सुशील गुप्ता ने कहा था कि अखिलेश हरदोई जाने वाला था। उसको भी हरदोई में कुछ काम था। अखिलेश का फोन न लगने के कारण वह उसके घर गया था। घटना के बाद लगातार सुशील अखिलेश के परिवार का हमदर्द बना रहा। माता-पिता के करीब आने की कोशिश कर रहा था। घटना से पहले अखिलेश के साथ क्या हुआ, किस तरह उसको परेशान किया गया, सुशील ने इसकी जानकारी परिवार को नहीं दी। सुशील ने कई बार कहा कि अखिलेश ने अपनी परेशानी के बारे में कभी जिक्र नहीं किया। सुशील गुप्ता खुद को अखिलेश का करीब 20 साल पुराना मित्र बता रहा था। दो दिन पहले एक रसीद वायरल हुई थी। इसमें सुशील गुप्ता, आकाश वाजपेयी और अखिलेश गुप्ता के नाम थे। इसमें लिखा गया था कि अखिलेश को 84 लाख रुपये दिया गया है। रसीद के बारे में जब सुशील से बात की तो उसने रसीद को फर्जी बताया था। इस तरह लगातार सुशील अखिलेश के परिवार और पुलिस को गुमराह करता रहा। पुलिस ने रविवार को सुशील गुप्ता और मिथिलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद सोमवार को दोनों को जेल भेज दिया गया।
अखिलेश के पिता को सुरक्षा देने की मांग
अखिलेश के परिवार में सिर्फ बूढ़े माता-पिता और उनकी एक विधवा बहन बची हैं। बाकी तीन बहनें अपनी ससुराल में हैं। मुकदमे की पैरवी करने के लिए माता-पिता को कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उन्हें जान का खतरा बताते हुए उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के महानगर अध्यक्ष सचिन बाथम के नेतृत्व में व्यापारियों ने एसपी से मिलकर अखिलेश के पिता को सुरक्षा देने की मांग की। महानगर अध्यक्ष सचिन बाथम ने बताया कि सोमवार को एसपी एस आनन्द ने जल्द से जल्द सुरक्षा देने का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वालों में अनुज अग्रवाल, हनी सिंह, सलाउद्दीन खान आदि मौजूद रहे।
सूदखोरों के खिलाफ हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग
शाहजहांपुर। व्यापारी नेता किशोर गुप्ता सोमवार को वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से मिले और सूदखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि अखिलेश गुप्ता के परिवार की सामूहिक आत्महत्या के मामले की सीबीसीआईडी जांच कराई जाए और सूदखोर अविनाश वाजपेयी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। किशोर गुप्ता ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि सभी थानों में शिकायत रजिस्टर रखा जाए जिसमें सूदखोरों का पूरा ब्यौरा दर्ज हो। साथ ही पूरे प्रदेश के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए जिसमें शिकायत होने पर सूदखोरों के खिलाफ कार्रवाई हो। वित्त मंत्री ने मांगों पर विचार का आश्वासन दिया है। इस दौरान किशोर गुप्ता के साथ अवि गुप्ता, नितिन गुप्ता आदि थे। संवाद
हिरासत में लेकर कई लोगों से हो रही पूछताछ
शाहजहांपुर। सामूहिक आत्महत्या मामले में पुलिस की जांच में कुछ और नाम भी सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि अविनाश समेत उसके कई साथी कमेटी बनाकर रुपये का लेनदेन करते थे। कमेटी में करीब 20 लोग शामिल होते थे। जिसका लेनदेन लाखों रुपये का होता था। जांच के दौरान कमेटी की बात पता चलने के बाद पुलिस ने कई और लोगों को हिरासत में लिया है। जिनसे चलने वाली कमेटी के बारे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा इस प्रकरण से जुड़े सबूतों को इकट्ठा करने के लिए जेल में बंद सूदखोर अविनाश को रिमांड पर लेने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसपी सिटी संजय कुमार ने बताया कि कई और लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है। अविनाश को रिमांड पर लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है। संवाद