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सुहागिनों ने भगवान विष्णु से की सुख-समृद्धि की कामना
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अक्षय नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं।
फोटो - 01 से 03 तक
सुहागिनों ने भगवान विष्णु से
की सुख-समृद्धि की कामना
- अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ को तिलक लगाया और 108 परिक्रमा कर बांधा कलावा
- सुहागिनों ने व्रत से जुड़ी कथा सुनी, इसके बाद परिवार के साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी पर मंगलवार को आंवला के वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई। सुहागिनों ने इससे जुड़ी कथा को सुना। इसके बाद परिवार के साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। माना जाता है कि अक्षय नवमी से पूर्णिमा तक आंवले के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास होता है और उनके पूजन से सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं।
मंगलवार को सुबह से ही सुहागिनें आंवला पूजन के लिए जुटना शुरू हो गईं। इंदिरा नगर कॉलोनी स्थित ऋषि आश्रम में सुबह से लेकर शाम तक सुहागिनें पूजन के लिए पहुंचती रहीं। सुहागिनों ने आंवले के पेड़ को तिलक लगाया और 108 परिक्रमा कर कलावा बांधा। सुहागिनों ने भगवान विष्णु से सुख और समृद्धि की कामना की। उसके बाद पेड़ के नीचे ही बैठकर प्रसाद स्वरूप पूड़ी, सब्जी, खीर आदि ग्रहण किया। ब्राह्मणों को भी आदर के साथ प्रसाद ग्रहण कराया गया तथा उन्हें दान दक्षिणा दी गई। आश्रम के महंत चैतन्य मुरारी ने बताया कि अक्षय नवमी को भगवान अक्षय वरदान देते हैं। इसलिए आंवले का पूजन जरूरी होता है। बाबा बनखंडी नाथ मंदिर में भी आंवले के वृक्ष का पूजन हुआ। पूजा करने के लिए सुहागिने जुटीं। पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण किया। तमाम महिलाओं ने घर में ही आंवले के पेड़ की विधिवत पूजा अर्चना की।
फोटो - 04
हमने अपने परिवार के साथ पूजन किया। सुख-समृद्धि की कामना के साथ पर्यावरण की सुरक्षा का संकल्प भी लिया। अक्षय नवमी पर पूजन से स्वयं भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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- सपना वर्मा
फोटो - 05
हर साल अक्षय नवमी पर आंवला वृक्ष का पूजन करते हैं। श्रद्धा के साथ आंवले के पेड़ का पूजन और उसके नीचे प्रसाद ग्रहण करने से भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।
- रूबी देवी
फोटो - 06
आंवला के पूजन से हर मनोकामना पूर्ण होती है। आंवला के पेड़ का पूजन किया और इससे जुड़ी कथा सुनी। इसके बाद परिवार के आंवला पेड़ के नीचे साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
- सुनीला देवी
फोटो - 07
आंवला के पूजन की तैयारी एक दिन पहले से ही शुरू कर दी थी। बाजार से पूजा का सामान लाए और फिर प्रसाद आदि तैयार किया। परिवार की महिलाओं के साथ आंवला पूजा की है।
- पूजा देवी
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सुहागिनों ने भगवान विष्णु से
की सुख-समृद्धि की कामना
- अक्षय नवमी पर आंवले के पेड़ को तिलक लगाया और 108 परिक्रमा कर बांधा कलावा
- सुहागिनों ने व्रत से जुड़ी कथा सुनी, इसके बाद परिवार के साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी पर मंगलवार को आंवला के वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई। सुहागिनों ने इससे जुड़ी कथा को सुना। इसके बाद परिवार के साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। माना जाता है कि अक्षय नवमी से पूर्णिमा तक आंवले के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास होता है और उनके पूजन से सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं।
मंगलवार को सुबह से ही सुहागिनें आंवला पूजन के लिए जुटना शुरू हो गईं। इंदिरा नगर कॉलोनी स्थित ऋषि आश्रम में सुबह से लेकर शाम तक सुहागिनें पूजन के लिए पहुंचती रहीं। सुहागिनों ने आंवले के पेड़ को तिलक लगाया और 108 परिक्रमा कर कलावा बांधा। सुहागिनों ने भगवान विष्णु से सुख और समृद्धि की कामना की। उसके बाद पेड़ के नीचे ही बैठकर प्रसाद स्वरूप पूड़ी, सब्जी, खीर आदि ग्रहण किया। ब्राह्मणों को भी आदर के साथ प्रसाद ग्रहण कराया गया तथा उन्हें दान दक्षिणा दी गई। आश्रम के महंत चैतन्य मुरारी ने बताया कि अक्षय नवमी को भगवान अक्षय वरदान देते हैं। इसलिए आंवले का पूजन जरूरी होता है। बाबा बनखंडी नाथ मंदिर में भी आंवले के वृक्ष का पूजन हुआ। पूजा करने के लिए सुहागिने जुटीं। पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण किया। तमाम महिलाओं ने घर में ही आंवले के पेड़ की विधिवत पूजा अर्चना की।
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फोटो - 04
हमने अपने परिवार के साथ पूजन किया। सुख-समृद्धि की कामना के साथ पर्यावरण की सुरक्षा का संकल्प भी लिया। अक्षय नवमी पर पूजन से स्वयं भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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- सपना वर्मा
फोटो - 05
हर साल अक्षय नवमी पर आंवला वृक्ष का पूजन करते हैं। श्रद्धा के साथ आंवले के पेड़ का पूजन और उसके नीचे प्रसाद ग्रहण करने से भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।
- रूबी देवी
फोटो - 06
आंवला के पूजन से हर मनोकामना पूर्ण होती है। आंवला के पेड़ का पूजन किया और इससे जुड़ी कथा सुनी। इसके बाद परिवार के आंवला पेड़ के नीचे साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
- सुनीला देवी
फोटो - 07
आंवला के पूजन की तैयारी एक दिन पहले से ही शुरू कर दी थी। बाजार से पूजा का सामान लाए और फिर प्रसाद आदि तैयार किया। परिवार की महिलाओं के साथ आंवला पूजा की है।
- पूजा देवी