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Shahjahanpur News: सड़कों, गलियों में भटक रहे छुट्टा पशु, नगर निगम नहीं दे रहा ध्यान

Tue, 02 May 2023 12:45 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Tue, 02 May 2023 12:45 AM IST
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Stray animals wandering in the streets, Municipal Corporation is not paying attention
शाहजहांपुर। नगर निगम में क्षेत्र में निराश्रित पशु भटकते मिल जाएंगे। कहने को पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम के पास दो कैटल कैचर वाहन हैं, लेकिन वे खड़े ही रहते हैं। अगर कोई व्यक्ति शिकायत करता है तो एक-दो पशुओं को पकड़कर औपचारिकता निभा दी जाती है। इसके लिए कोई टीम सक्रिय नहीं रहती है जो शहर में घूूमकर निराश्रित पशुओं को पकड़कर आश्रय स्थल या नंदीशाला में पहुंचाए। इसी तरह बंदरों को पकड़ने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
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प्रदेश सरकार गोवंशीय निराश्रित पशुओं को गोआश्रय स्थल तक पहुंचाने के लिए अभियान चला रही है। नगर निगम क्षेत्र में निराश्रित गोवंशीय पशुओं की भरमार है जो सड़क पर घूमते रहते हैं। शहर में एक गो आश्रय स्थल मघईटोला में बना है। इसमें वर्तमान में 300 गायों का पालन पोषण हो रहा है। वहीं पुुवायां रोड स्थिति नंदीशाला में 430 नंदी का पालन पोषण हो रहा है। इसके बावजूद सड़क पर भटकने वाले सांड़ और गायों की संख्या अच्छी-खासी है।
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पशुओं को पकड़ने के लिए नहीं चलाया जाता कोई अभियान
नगर निगम के पास वर्तमान में दो कैटल कैचर वाहन हैं। वाहनों पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। शहर में हर गली-मोहल्ले में निराश्रित गोवंशीय पशु भटकते मिल जाएंगे। पशु भूख मिटाने के लिए कूड़े कचरे के ढेर में मुंह मारते हैं। इसके बाद भी नगर निगम के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। अगर कोई व्यक्ति नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर पर छुट्टा पशु की जानकारी दे तो टीम उसको पकड़ लेती है। उसे संबंधित स्थान पर पहुंचा दिया जाता है, लेेेकिन निगम की ओर से ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया जाता है जिसमें टीम खुद घूमकर निराश्रित पशुओं को पकड़कर गोशाला या नंदीशाला में पहुंचा दे।
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आए दिन होते हैं हादसे
निराश्रित पशु ज्यादातर रात में सड़कों पर बैठ जाते हैं। रात के अंधेरे में वाहन चालक उनको देख नहीं पाता है और हादसे का शिकार हो जाता है। ऐसे कई मामले हो चुके है जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। घायल तो अक्सर होते रहते हैं। इसके बाद भी नगर निगम प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक पालकों के जो पशु छुट्टा घूम रहे थे, अप्रैल में उनके 20 चालान किए गए हैं।
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बंदरों को पकड़ने का अभियान भी फेल
नगर निगम की ओर से शहर मेें बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया गया था। पिछले साल करीब 990 बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया था। इस वर्ष फिर से अभियान चलाया गया, लेेकिन वह कागजों तक ही सीमित रह गया। निगम के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने बंदर पकड़े गए और किन क्षेत्रों से पकड़े गए।
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कुत्ता पालकों के लिए लाइसेंस जरूरी, फिर भी कार्रवाई नहीं
नगर निगम क्षेत्र में कुत्ता पालकों को लाइसेंस लेना जरूरी है। इसकी वार्षिक फीस मात्र 10 रुपये है। इसके बाद भी अभी तक कुल 235 लोगों ने ही लाइसेंस लिए हैं। शहर में कुत्तापालकों की संख्या इससे कई गुना अधिक होगी। इसका भी कोई आंकड़ा नगर निगम के पास नहीं है। जो लोग कुत्ता पालने के बाद भी लाइसेंस नहीं ले रहे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।
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लोगों से बातचीत
फोटो- 41
शहर में गोवंशीय पशु भूखे प्यासे घूमते रहते हैं। नगर निगम के अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। उनको पकड़वाकर गोशाला या नंदीशाला में पहुंचाना चाहिए। - रचना मोहन
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फोटो- 42
छुट्टा पशुओं की वजह से आए दिन हादसे होते हैं। इनको पकड़ने का अभियान चलाया जाना चाहिए। जिससे पशु भी आराम से रह सकें और लोगों को भी कोई परेशानी नहीं हो। - मनोज कुमार
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फोटो- 43
गोवंशी पशुओं की देखभाल के लिए प्रदेश सरकर कदम उठा रही है लेकिन नगर निगम क्षेत्र में इसका पालन नहीं हो रहा। पशु भूखे घूम रहे हैं। उनका चारा कहां जा रहा है, पता नहीं। - सौरभ त्रिवेदी

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वर्जन-
गोवंशीय पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम की ओर से कैटिल कैचर वाहन भ्रमण करते हैं। जो भी घूमते पाए जाते हैं, उनको गोशाला या नंदीशाला में पहुंचाया जाता है। जो सड़क पर पशु घूमते दिखाई देते हैं, वे पालक छोड़ देते हैं। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। - डॉ. मनोज कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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