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‘बंद हो दलितों का उत्पीड़न’
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 12 Aug 2015 11:19 PM IST
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प्रदेश सरकार के भूमि संशोधन अधिनियम 2015 और दलित उत्पीड़न की घटनाओं को निशाने पर लेते हुए दलित संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बुधवार को खिरनीबाग के जीआईसी ग्राउंड से लेकर कलक्ट्रेट तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। कलक्ट्रेट में अनुसूचित जाति जनजाति महासंघ के पदाधिकारी दोनों मुद्दों पर जमकर गरजे। बाद में राज्यपाल के नाम प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट एपी श्रीवास्तव को ज्ञापन देकर भूमि अधिग्रहण अधिनियम रद्द करने के साथ दलित उत्पीड़न के दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अनुसूचित जाति जनजाति माध्यमिक शिक्षक सभा, सफाई मजदूर संघ, भारतीय बौद्ध महासभा, भगवान बुद्ध विहार समिति, अनुसूचित जाति विद्यार्थी परिषद, गुरू रविदास सभा, मूल निवासी विचार मंच, संत गाडगे समाज उत्थान समिति, भारतीय कोरी समाज, अनुसूचित जाति जनजाति बेसिक शिक्षक कल्याण समिति, शोषित समाज मोर्चा, डॉ. अंबेडकर अधिवक्ता समिति, कठेरिया समाज कल्याण समिति, अंबेडकर मेमोरियल संस्थान से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता सुबह दस बजे से जीआईसी मैदान पर इकट्ठा होने लगे।
वहां से यह सभी कार्यकर्ता अनुसूचित जाति जनजाति महासंघ के बैनर तले सरकार और प्रशासन विरोधी नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में चल पड़े। कलक्ट्रेट पहुंचकर दलित संगठनों ने लाउडस्पीकर से नारेबाजी तेज कर दी। इसी दौरान तमाम महिलाओं ने धरना देना शुरू कर दिया। शोर सुनकर प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट श्रीवास्तव अपने कक्ष से बाहर आए और महासंघ का ज्ञापन लिया।
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इस मौके पर महासंघ के संरक्षक जगदीश चंद्र, संयोजक सियाराम दिनकर और सह-संयोजक राम सिंह ने कहा कि जमींदारी उन्मूलन भूमि संशोधन अधिनियम के तहत प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन अन्य वर्गों के लोगों के हाथ बेंचने की व्यवस्था करके दलितों को भूमिहीन बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि महासंघ के घटक संगठन इस व्यवस्था को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करेंगे।
ज्ञापन में भूमि संशोधन कानून रद्द करने, जमीन संबंधी मामले में जीटीआई के प्राचार्य राजन सिंह के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर उनकी छवि धूमिल करने वालों के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज किए जाने, बिजलीपुरा निवासी एक व्यक्ति की बेटी को बदनीयती से पकड़कर उसे पीटने के आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने, बहुचर्चित हरेवा कांड की पीड़ित दलित महिलाओं को सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस दिए जाने आदि मांगों का उल्ल्लेख किया गया है।
जुलूस और प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों से जुड़े डॉ. अमर सिंह, दौलत राम, महेंद्र सिंह दिनकर, फकीरे लाल भोजवाल, करुणाकर हंस, श्याम बिहारी, महबूब हुसैन इदरीसी, बाबूराम भारती, रामऔतार, विश्राम सिंह, डॉ. डीआर वर्मा, सुरेश पाल सिंह, राजाराम, रामप्रकाश, अरुण कठेरिया, कुसुम वर्मा, राजकुमारी, रामवीर, कमलेश निगम, राहुल राय आदि ने कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया।
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प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अनुसूचित जाति जनजाति माध्यमिक शिक्षक सभा, सफाई मजदूर संघ, भारतीय बौद्ध महासभा, भगवान बुद्ध विहार समिति, अनुसूचित जाति विद्यार्थी परिषद, गुरू रविदास सभा, मूल निवासी विचार मंच, संत गाडगे समाज उत्थान समिति, भारतीय कोरी समाज, अनुसूचित जाति जनजाति बेसिक शिक्षक कल्याण समिति, शोषित समाज मोर्चा, डॉ. अंबेडकर अधिवक्ता समिति, कठेरिया समाज कल्याण समिति, अंबेडकर मेमोरियल संस्थान से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता सुबह दस बजे से जीआईसी मैदान पर इकट्ठा होने लगे।
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वहां से यह सभी कार्यकर्ता अनुसूचित जाति जनजाति महासंघ के बैनर तले सरकार और प्रशासन विरोधी नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में चल पड़े। कलक्ट्रेट पहुंचकर दलित संगठनों ने लाउडस्पीकर से नारेबाजी तेज कर दी। इसी दौरान तमाम महिलाओं ने धरना देना शुरू कर दिया। शोर सुनकर प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट श्रीवास्तव अपने कक्ष से बाहर आए और महासंघ का ज्ञापन लिया।
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इस मौके पर महासंघ के संरक्षक जगदीश चंद्र, संयोजक सियाराम दिनकर और सह-संयोजक राम सिंह ने कहा कि जमींदारी उन्मूलन भूमि संशोधन अधिनियम के तहत प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन अन्य वर्गों के लोगों के हाथ बेंचने की व्यवस्था करके दलितों को भूमिहीन बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि महासंघ के घटक संगठन इस व्यवस्था को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करेंगे।
ज्ञापन में भूमि संशोधन कानून रद्द करने, जमीन संबंधी मामले में जीटीआई के प्राचार्य राजन सिंह के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर उनकी छवि धूमिल करने वालों के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज किए जाने, बिजलीपुरा निवासी एक व्यक्ति की बेटी को बदनीयती से पकड़कर उसे पीटने के आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने, बहुचर्चित हरेवा कांड की पीड़ित दलित महिलाओं को सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस दिए जाने आदि मांगों का उल्ल्लेख किया गया है।
जुलूस और प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों से जुड़े डॉ. अमर सिंह, दौलत राम, महेंद्र सिंह दिनकर, फकीरे लाल भोजवाल, करुणाकर हंस, श्याम बिहारी, महबूब हुसैन इदरीसी, बाबूराम भारती, रामऔतार, विश्राम सिंह, डॉ. डीआर वर्मा, सुरेश पाल सिंह, राजाराम, रामप्रकाश, अरुण कठेरिया, कुसुम वर्मा, राजकुमारी, रामवीर, कमलेश निगम, राहुल राय आदि ने कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया।