{"_id":"67030d9f8af54ed9f306f4c4","slug":"staging-of-king-dashraths-sacrifice-of-life-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1036-128686-2024-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: राजा दशरथ के प्राण त्यागने की लीला का मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: राजा दशरथ के प्राण त्यागने की लीला का मंचन
Mon, 07 Oct 2024 03:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 07 Oct 2024 03:52 AM IST
विज्ञापन
कुर्रिया कलां के गांव चौहनापुर में आयोजित रामलीला में विश्वामित्र यज्ञ रक्षा का मंचन करते कलाका
शाहजहांपुर। ओसीएफ इस्टेट की रामलीला में रविवार को पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने व राम को मनाने के लिए भरत के वन में जाने की लीला का भावपूर्ण मंचन देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
मंचन में दर्शाया गया कि सुमंतजी, भगवान श्रीराम को छोड़कर अयोध्या वापस लौटे। राजा दशरथ उनसे अपने पुत्र श्रीराम, लक्ष्मण व पुत्रवधू सीता को वापस लाने के लिए कहते हैं पर सुमंतजी रोने लगते हैं। दशरथ दिन-रात अपने पुत्र की प्रतीक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। इससे सारी अयोध्या में सन्नाटा छा जाता है। गुरु वशिष्ठ भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलाते हैं। भरत के पूछने पर माता कैकई उन्हें भगवान राम, लक्ष्मण व सीता के वन गमन की जानकारी देती हैं। इससे क्षुब्ध होकर श्रीराम को मनाने के लिए भरत चित्रकूट पहुंचते हैं और आग्रह के बाद भी उनके वापस न लौटने पर चरण पादुकाएं लेकर ही वापस आ जाते हैं। इसके बाद भगवान राम द्वारा माता सीता का पुष्पों के आभूषण से श्रृंगार करने, जयंत द्वारा प्रभु राम के बल की परीक्षा लेने, अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचने, अनुसुइया माता से परिचय की लीलाओं का मंचन देखने के लिए दर्शक देर रात तक जुटे रहे। ओसीएफ के महाप्रबंधक व मेला मुख्य संरक्षक राजेश कुमार वर्मा, अध्यक्ष एके वर्मा, महासचिव ऋषि बाबू , सचिव अमन सक्सेना ने भी रामलीला का मंचन देखा।
-- -- --
मंचन में इन्होंने निभाई भूमिका
- रामलीला में रविवार को सुमंत का किरदार कौशलेंद्र पांडे, दशरथ का पैट्रिक दास, कौशल्या की भूमिका रजनी ने निभाई। इनके अलावा केकई-साधना, सुमित्रा-अनामिका, वशिष्ठ-संदीप, भरत-अंकित अवस्थी, शत्रुघ्न-रोहित, मंथरा-प्रियंका रंजन, निषादराज-ईश्वरदिन, राम-रोहित, लक्ष्मण-देवेंद्र पाल, सीता-रानी मिश्रा, इंद्र-अरविंद वर्मा, ब्रह्मा-विनोद पांडे, नारद-अरुण डीआर, शरभंगमुनि-एसएल सिंह, अनसुइया-लक्ष्मी सक्सेना के रूप में नजर आए।
विज्ञापन
-- -- -- -
श्रीराम वन गमन की लीला देख भावुक हो उठे तमाम दर्शक
जलालाबाद। यहां रामलीला में रविवार को भगवान श्रीराम के माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास जाने की लीला का भावपूर्ण मंचन हुआ। दिखाया गया कि राजा दशरथ की घोषणा के बाद अयोध्यावासी भगवान राम के राज्याभिषेक की तैयारियों में जुटे थे। हर तरफ उल्लास और खुशी का माहौल था। इसी बीच दासी मंथरा ने महारानी कैकेयी के कान भर दिए और कैकई महाराजा दशरथ से वर मांगने के लिए कोप भवन में चली गईं। कैकई द्वारा भगवान राम को वन भेजने का वर मांगे जाने से राजा दशरथ मूर्छित होकर गिर गए। कैकई और दशरथ के बीच हुए संवाद और भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को वनगमन करते देख कई दर्शक भी अपने आंसू नहीं रोक सके। सीता समेत दोनों भाइयों के वन के लिए प्रस्थान करते ही उल्लास मना रही अयोध्या की जनता भी गहरे विषाद में डूब गई। संवाद
-- -- -- -
राम-लक्ष्मण ने की विश्वामित्र के आश्रम में यज्ञ की रक्षा
कुर्रिया कलां। चौहनापुर में आयोजित रामलीला में रविवार को ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का मंचन किया गया। गुरु विश्वामित्र ने राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को भेजने का अनुरोध किया। दोनों भाइयों ने यज्ञ की सुरक्षा करते हुए भगवान श्रीराम ने अपने धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर तीक्ष्ण बाणों से सुबाहु का वध कर दिया और मारीच को घायल कर दूर दक्षिण दिशा में समुद्र के पास फेंक दिया। मंचन की व्यवस्था में शरद त्रिपाठी, रामआसरे राजपूत, हरिकृष्ण मिश्र, अखिलेश, कपिल पांडे आदि का सहयोग रहा। संवाद
-- -- --
जब नारद ने दिया भगवान विष्णु को श्राप
खुटार। खुटार के रामलीला मेले में रविवार को नारद मोह और श्रीराम जन्म की लीला का मंचन किया गया। मंचन में नारद मुनि द्वारा विश्वमोहिनी के स्वयंवर के लिए भगवान विष्णु से श्री हरि की तरह चेहरे की कामना करते हैं। नारद मुनि के मोह को देखकर उन्हें एक वानर का चेहरा प्रदान कर दिया जाता हैं। विश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारद का बहुत उपहास होने पर वह क्रोध में भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं। इसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के जन्म की लीला का मंचन किया गया, मंगल गान हुआ। संवाद
-- -- -- -
राम वनवास देखकर भर आईं दर्शकों की आंखें
पुवायां। क्षेत्र में चल रहे रामलीला मेले में रविवार को राम वनवास की लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि राम के राजतिलक की तैयारियों के बीच महारानी कैकेई राजा दशरथ से रूष्ट होकर कोपभवन में जाकर बैठ जाती है। राजा दशरथ कोप भवन में जाकर उनसे इस कोप का कारण पूछते हैं, तब रानी कैकेई उन्हें उनके दिए दो वचनों की याद दिलाती है। कैकेई पहले वचन में राम की जगह उनके पुत्र भरत का राज्याभिषेक और दूसरे वचन के बदले राम को 14 वर्षों के वनवास की मांग राजा दशरथ के सामने रखती है। कैकेई की बात सुन राजा दशरथ की हालत बिगड़ जाती है। पिता की इस अवस्था का कारण जानकर श्रीराम पिता के वचन की मर्यादा को निभाने हेतु स्वयं ही स्वेच्छा से वनवास जाना स्वीकार कर लेते हैं। महाराजा दशरथ और महारानी कैकेई के संवाद और बाद में भगवान राम के वन जाने की लीला देख से दर्शकों की आंखें भर आई। संवाद
विज्ञापन
मंचन में दर्शाया गया कि सुमंतजी, भगवान श्रीराम को छोड़कर अयोध्या वापस लौटे। राजा दशरथ उनसे अपने पुत्र श्रीराम, लक्ष्मण व पुत्रवधू सीता को वापस लाने के लिए कहते हैं पर सुमंतजी रोने लगते हैं। दशरथ दिन-रात अपने पुत्र की प्रतीक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। इससे सारी अयोध्या में सन्नाटा छा जाता है। गुरु वशिष्ठ भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलाते हैं। भरत के पूछने पर माता कैकई उन्हें भगवान राम, लक्ष्मण व सीता के वन गमन की जानकारी देती हैं। इससे क्षुब्ध होकर श्रीराम को मनाने के लिए भरत चित्रकूट पहुंचते हैं और आग्रह के बाद भी उनके वापस न लौटने पर चरण पादुकाएं लेकर ही वापस आ जाते हैं। इसके बाद भगवान राम द्वारा माता सीता का पुष्पों के आभूषण से श्रृंगार करने, जयंत द्वारा प्रभु राम के बल की परीक्षा लेने, अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचने, अनुसुइया माता से परिचय की लीलाओं का मंचन देखने के लिए दर्शक देर रात तक जुटे रहे। ओसीएफ के महाप्रबंधक व मेला मुख्य संरक्षक राजेश कुमार वर्मा, अध्यक्ष एके वर्मा, महासचिव ऋषि बाबू , सचिव अमन सक्सेना ने भी रामलीला का मंचन देखा।
विज्ञापन
मंचन में इन्होंने निभाई भूमिका
- रामलीला में रविवार को सुमंत का किरदार कौशलेंद्र पांडे, दशरथ का पैट्रिक दास, कौशल्या की भूमिका रजनी ने निभाई। इनके अलावा केकई-साधना, सुमित्रा-अनामिका, वशिष्ठ-संदीप, भरत-अंकित अवस्थी, शत्रुघ्न-रोहित, मंथरा-प्रियंका रंजन, निषादराज-ईश्वरदिन, राम-रोहित, लक्ष्मण-देवेंद्र पाल, सीता-रानी मिश्रा, इंद्र-अरविंद वर्मा, ब्रह्मा-विनोद पांडे, नारद-अरुण डीआर, शरभंगमुनि-एसएल सिंह, अनसुइया-लक्ष्मी सक्सेना के रूप में नजर आए।
विज्ञापन
श्रीराम वन गमन की लीला देख भावुक हो उठे तमाम दर्शक
जलालाबाद। यहां रामलीला में रविवार को भगवान श्रीराम के माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास जाने की लीला का भावपूर्ण मंचन हुआ। दिखाया गया कि राजा दशरथ की घोषणा के बाद अयोध्यावासी भगवान राम के राज्याभिषेक की तैयारियों में जुटे थे। हर तरफ उल्लास और खुशी का माहौल था। इसी बीच दासी मंथरा ने महारानी कैकेयी के कान भर दिए और कैकई महाराजा दशरथ से वर मांगने के लिए कोप भवन में चली गईं। कैकई द्वारा भगवान राम को वन भेजने का वर मांगे जाने से राजा दशरथ मूर्छित होकर गिर गए। कैकई और दशरथ के बीच हुए संवाद और भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को वनगमन करते देख कई दर्शक भी अपने आंसू नहीं रोक सके। सीता समेत दोनों भाइयों के वन के लिए प्रस्थान करते ही उल्लास मना रही अयोध्या की जनता भी गहरे विषाद में डूब गई। संवाद
राम-लक्ष्मण ने की विश्वामित्र के आश्रम में यज्ञ की रक्षा
कुर्रिया कलां। चौहनापुर में आयोजित रामलीला में रविवार को ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का मंचन किया गया। गुरु विश्वामित्र ने राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को भेजने का अनुरोध किया। दोनों भाइयों ने यज्ञ की सुरक्षा करते हुए भगवान श्रीराम ने अपने धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर तीक्ष्ण बाणों से सुबाहु का वध कर दिया और मारीच को घायल कर दूर दक्षिण दिशा में समुद्र के पास फेंक दिया। मंचन की व्यवस्था में शरद त्रिपाठी, रामआसरे राजपूत, हरिकृष्ण मिश्र, अखिलेश, कपिल पांडे आदि का सहयोग रहा। संवाद
जब नारद ने दिया भगवान विष्णु को श्राप
खुटार। खुटार के रामलीला मेले में रविवार को नारद मोह और श्रीराम जन्म की लीला का मंचन किया गया। मंचन में नारद मुनि द्वारा विश्वमोहिनी के स्वयंवर के लिए भगवान विष्णु से श्री हरि की तरह चेहरे की कामना करते हैं। नारद मुनि के मोह को देखकर उन्हें एक वानर का चेहरा प्रदान कर दिया जाता हैं। विश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारद का बहुत उपहास होने पर वह क्रोध में भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं। इसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के जन्म की लीला का मंचन किया गया, मंगल गान हुआ। संवाद
राम वनवास देखकर भर आईं दर्शकों की आंखें
पुवायां। क्षेत्र में चल रहे रामलीला मेले में रविवार को राम वनवास की लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि राम के राजतिलक की तैयारियों के बीच महारानी कैकेई राजा दशरथ से रूष्ट होकर कोपभवन में जाकर बैठ जाती है। राजा दशरथ कोप भवन में जाकर उनसे इस कोप का कारण पूछते हैं, तब रानी कैकेई उन्हें उनके दिए दो वचनों की याद दिलाती है। कैकेई पहले वचन में राम की जगह उनके पुत्र भरत का राज्याभिषेक और दूसरे वचन के बदले राम को 14 वर्षों के वनवास की मांग राजा दशरथ के सामने रखती है। कैकेई की बात सुन राजा दशरथ की हालत बिगड़ जाती है। पिता की इस अवस्था का कारण जानकर श्रीराम पिता के वचन की मर्यादा को निभाने हेतु स्वयं ही स्वेच्छा से वनवास जाना स्वीकार कर लेते हैं। महाराजा दशरथ और महारानी कैकेई के संवाद और बाद में भगवान राम के वन जाने की लीला देख से दर्शकों की आंखें भर आई। संवाद

कुर्रिया कलां के गांव चौहनापुर में आयोजित रामलीला में विश्वामित्र यज्ञ रक्षा का मंचन करते कलाका

कुर्रिया कलां के गांव चौहनापुर में आयोजित रामलीला में विश्वामित्र यज्ञ रक्षा का मंचन करते कलाका

कुर्रिया कलां के गांव चौहनापुर में आयोजित रामलीला में विश्वामित्र यज्ञ रक्षा का मंचन करते कलाका