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सत्ता की अनसुनी बनी एसपी के ट्रांसफर की वजह
अमर उजाला, शाहजहांपुर
Updated Tue, 16 Feb 2016 12:08 AM IST
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जलालाबाद के हरेवा कांड में तत्कालीन एसपी आरपीएस यादव के शाहजहांपुर से हुए तबादले के बाद आईपीएस बबलू कुमार ने 22 मई 2015 को शाहजहांपुर के एसपी के तौर पर कमान संभाली थी। तब पत्रकार जगेंद्र के मौत का प्रकरण खासा सुर्खियों में रहा और उस मामले में पुलिस से लेकर राज्यमंत्री तक निशाने पर रहे। लेकिन उस प्रकरण में साक्ष्यों और विज्ञानसम्मत प्रमाणों के आधार पर उलझी गुत्थियों को सुलझाने पर सियासी हलके में इनकी साख बनी। उसके बाद शाहजहांपुर की बिटिया से दुराचार के प्रकरण में जेल में बंद आसाराम के गुर्गों द्वारा गवाह कृपाल की गत जुलाई माह में हुई हत्या में साजिशकर्ता को दबोचकर जिला पुलिस का नाम सुर्खियों में लाया। फिर कई अंतर जनपदीय और अंतरराज्यीय गिरोहों का खुलासा भी कराया। हाल ही में प्री एक्टीवेटेड फर्जी सिम बिक्री नेटवर्क का खुलासा भी अहम रहा। इन सबसे अलग जिला, क्षेत्र और ग्राम पंचायती चुनाव के साथ ही ब्लॉक प्रमुखी चुनाव को हिंसारहित शांतिपूर्ण संपन्न कराना भी महत्वपूर्ण रहा। उसी दौरान मदनापुर थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा मादक द्रव्यों की तस्करी के रैकेट का खुलासा किए जाने के बाद उसमें कई सफेदपोश चेहरों के नाम सामने आने पर सियासी खेमे में खलबली मच गई थी।
एक जनप्रतिनिधि उस मामले में अपने करीबी शख्स का नाम बाहर निकलवाने पर अड़े लेकिन पुलिस न डिगी। वहीं शुरू हुआ शह और मात का खेल जो कि मदनापुर में ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान गांव महियावर में झलका। वहां भी पुलिस बैकफुट पर नहीं आई तो फिर जिला पंचायती चुनाव में अप्रत्याशित तौर पर हार मिलने पर सत्ताधारी दल के लोगों ने सदर बाजार थाना का घेराव कर लूट और चोरी के शातिर को रिहा कराने की मांग पर हंगामा काटा था। तब वह शातिर मेडिकल कराने के साथ छोड़ तो दिया गया लेकिन तत्कालीन रोजा एसओ की बलि निलंबन के रूप में चढ़ी और वहीं पर सियासी दिग्गजों से एसपी के बीच की खाईं ज्यादा बढ़ी। वही पूरी कहानी का टर्निंग प्वाइंट रहा। सियासी खेमे में बाजीगर कहे जाने वाले जनप्रतिनिधि ने मदनापुर में रविवार को फिर पुलिस के खिलाफ मोर्चा लेने पहुंचे। मामला जैसे - तैसे निपटा। सपा सूत्रों के अनुसार, सोमवार को लखनऊ में पूर्व सांसद की पार्टी में वापसी कराने के दौरान जिले से संगठन के दिग्गजों ने हाईकमान के समक्ष एक सुर में एसपी के रुख की शिकायत की तो ट्रांसफर की पटकथा पूरी हो गई।
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एक जनप्रतिनिधि उस मामले में अपने करीबी शख्स का नाम बाहर निकलवाने पर अड़े लेकिन पुलिस न डिगी। वहीं शुरू हुआ शह और मात का खेल जो कि मदनापुर में ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान गांव महियावर में झलका। वहां भी पुलिस बैकफुट पर नहीं आई तो फिर जिला पंचायती चुनाव में अप्रत्याशित तौर पर हार मिलने पर सत्ताधारी दल के लोगों ने सदर बाजार थाना का घेराव कर लूट और चोरी के शातिर को रिहा कराने की मांग पर हंगामा काटा था। तब वह शातिर मेडिकल कराने के साथ छोड़ तो दिया गया लेकिन तत्कालीन रोजा एसओ की बलि निलंबन के रूप में चढ़ी और वहीं पर सियासी दिग्गजों से एसपी के बीच की खाईं ज्यादा बढ़ी। वही पूरी कहानी का टर्निंग प्वाइंट रहा। सियासी खेमे में बाजीगर कहे जाने वाले जनप्रतिनिधि ने मदनापुर में रविवार को फिर पुलिस के खिलाफ मोर्चा लेने पहुंचे। मामला जैसे - तैसे निपटा। सपा सूत्रों के अनुसार, सोमवार को लखनऊ में पूर्व सांसद की पार्टी में वापसी कराने के दौरान जिले से संगठन के दिग्गजों ने हाईकमान के समक्ष एक सुर में एसपी के रुख की शिकायत की तो ट्रांसफर की पटकथा पूरी हो गई।
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