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नानकमता गुरुद्वारा की निदेशक बनीं समाजसेवी कमलेश कौर
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कमलेश कौर माटा ।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से सीधा जुड़ाव रखने वाली माटा परिवार की बुजुर्ग मुखिया कमलेश कौर माटा को उत्तराखंड में सिखों के प्रमुख आस्था स्थल नानकमता गुरुद्वारा का निदेशक चुना गया है। वह मंगलवार को नानकमता जाकर गुरु दरबार को माथा टेकेंगी और गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के चुनाव में शामिल होंगी।
72 वर्षीय कमलेश कौर कचहरी के पीछे स्थित गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की लंबे समय से प्रधान हैं। वह रोजा के श्री गुरु रामदास गुरमत संगीत विद्यालय और वहां के गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की अध्यक्ष होने के साथ ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की धर्म प्रचार कमेटी की उप समिति सदस्य के नाते भी समाजसेवा में सक्रिय हैं। अब उन्हें नानकमता गुरुद्वारा के 27 सदस्यीय निदेशक मंडल में हल्का नंबर 22 (शाहजहांपुर, निगोही व बंडा) से निदेशक निर्वाचित हुई हैं।
जगजीत सिंह माटा ने बताया कि उनकी भाभी कमलेश कौर के मुकाबले नवदिया बंकी (बंडा) गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष गुरमेज सिंह ने चुनाव लड़ा। उन्होंने बताया कि नानकमता गुरुद्वारा के हल्का नंबर 22 में जिले के 125 गुरुद्वारा पंजीकृत हैं, लेकिन 20 गुरुद्वारों के प्रतिनिधि अध्यक्ष निर्धारित मापदंड पूरे नहीं करने के कारण चुनाव में शामिल नहीं हुए। इस तरह 105 प्रतिनिधियों के निदेशक का चुनाव करना था, लेकिन दो वोट पड़ नहीं सके। बाद में बहुमत के आधार पर कमलेश कौर माटा को निदेशक चुन लिया गया। संवाद
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72 वर्षीय कमलेश कौर कचहरी के पीछे स्थित गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की लंबे समय से प्रधान हैं। वह रोजा के श्री गुरु रामदास गुरमत संगीत विद्यालय और वहां के गुरुद्वारा श्री गुरुसिंह सभा की अध्यक्ष होने के साथ ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की धर्म प्रचार कमेटी की उप समिति सदस्य के नाते भी समाजसेवा में सक्रिय हैं। अब उन्हें नानकमता गुरुद्वारा के 27 सदस्यीय निदेशक मंडल में हल्का नंबर 22 (शाहजहांपुर, निगोही व बंडा) से निदेशक निर्वाचित हुई हैं।
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जगजीत सिंह माटा ने बताया कि उनकी भाभी कमलेश कौर के मुकाबले नवदिया बंकी (बंडा) गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष गुरमेज सिंह ने चुनाव लड़ा। उन्होंने बताया कि नानकमता गुरुद्वारा के हल्का नंबर 22 में जिले के 125 गुरुद्वारा पंजीकृत हैं, लेकिन 20 गुरुद्वारों के प्रतिनिधि अध्यक्ष निर्धारित मापदंड पूरे नहीं करने के कारण चुनाव में शामिल नहीं हुए। इस तरह 105 प्रतिनिधियों के निदेशक का चुनाव करना था, लेकिन दो वोट पड़ नहीं सके। बाद में बहुमत के आधार पर कमलेश कौर माटा को निदेशक चुन लिया गया। संवाद
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