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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   "Silence is also the possibility of the song '

‘मौन में भी गीत की संभावना है’

Tue, 17 Mar 2015 08:38 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Tue, 17 Mar 2015 08:38 PM IST
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साहित्यिक संस्थान प्रवाह की काव्य गोष्ठी का आयोजन कवि सरोज मिश्र के आवास पर किया गया। कमल मानव ने मां शारदे की वंदना कर गोष्ठी को गति प्रदान की।
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ख्यालगो लल्लन बाबू ने गजल के माध्यम से कहा-
जितना गम दोगे, तनहा ढोलेंगे,
हम न नापेंगे, हम न तोलेंगे।
हल भी अपना जमीन भी अपनी,
जिसका चाहेंगे बीज बो लेंगे।
कमल मानव ने मुक्तक के माध्यम से कहा-
खूब लड़ाके निकल पडे़ बातों के अंगारे लेकर,
अफवाहें भी सजग खड़ीं, नफरत के हरकारे लेकर।
सुशील विचित्र ने अपने अलग अंदाज में फरमाया-
एक अधूरा गीत लिखा है, तुम आओ पूरा हो जाए,
ऐसा चाह रहा कुछ लिखना, सदियों-सदियों सदियां गाएं।
नवगीतकार डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने अपनी बात कुछ इस तरह रखी-
साथ हो तुम मौन में भी गीत की संभावना है,
साथ हो तुम रूप, रस, गंध की आराधना है।
संयोजक सरोज मिश्र ने कहा-
तुम तन गुलाब कर लो, हम मन गुलाब कर लें,
होठों से कुछ न बोलें, आंखें किताब कर लें।
बृजेश मिश्र ने गीत के माध्यम से कुछ यूं कहा-
कौन छू पाया क्षितिज का छोर, रे बटोही क्यों हुआ मति अंध,
याद कर उनको व्यथित मत हो, बावरे मन तोड़ मत सौगंध।
वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश अडिग की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में उमेश चंद्र सिंह, डॉ. राजीव सिंह, चंद्र मोहन पाठक आदि ने भी काव्य पाठ किया। रामाधीन मिश्र ने आभार व्यक्त किया।
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