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Shahjahanpur News: होलिका दहन के साथ शुरू हुई रंगों की बौछार
Mon, 25 Mar 2024 01:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 25 Mar 2024 01:52 AM IST
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शाहजहांपुर। होलिका दहन के साथ रंगों की बरसात शुरू हो गई। इससे पहले सुबह से लेकर शाम तक होलिका स्थल पर पहुंचकर लोगों ने पूजन किया। जिले में 2759 स्थानों पर होलिका जलाई गई।
बलगुरिया और कंडे पर स्वास्तिक का निशान बनाकर होलिका को अर्पण किया। धूप, दीप, नैवेद्य आदि का भोग लगाकर अग्नि की परिक्रमा की। कई जगहों पर लोगों ने पंडितों को बुलाकर मंत्रोच्चारण के साथ पूजन कराकर होलिका दहन किया।
होलिका दहन के बाद लोगों ने सुख, समृद्धि के लिए जौ, चने, गन्ने आदि चढ़ाए। शहर के कटिया टोला, इंदिरा नगर कॉलोनी, बृज विहार कॉलोनी, बहादुरगंज समेत सदर और चौक क्षेत्र में जगह-जगह होलिका सजाई गई है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा की रात में होलिका दहन हुआ। इसके बाद खूब अबीर गुलाल उड़ाया गया। एक दूसरे को रंग लगाकर पर्व की बधाइयां दी। इस दौरान होली के गीतों पर युवा जमकर थिरके। मौज मस्ती का यह दौर देर रात तक चलता रहा। वहीं, सोमवार को सुबह से ही रंग खेला जाएगा।
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400 से 550 रुपये क्विंटल बिकी लकड़ी
होलिका दहन के लिए 400 से 550 रुपये क्विंटल के बीच लकड़ी बिकी। लकड़ी के साथ ही लोगों ने होलिका में गोबर के कंडे भी लगाए और कपूर का इस्तेमाल किया।
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पूरे दिन घरों में घरों में हुई तैयारियां
- होली पर लोगों को एक-दूसरें के घरों पर आना-जाना रहता है। ऐसे में उनकी खातिरदारी के लिए पकवान बनाए जाते हैं, जिसको लेकर रविवार सुबह से ही घरों में तैयारियां होने लगीं। घर की महिलाओं ने परंपरागत पकवान गुझिया, पपड़ी व खस्ता आदि बनाए। इसके साथ ही नमकीन, रसगुल्ले और दही बड़ा बनाए गए। इसमें पूरे दिन महिलाएं व्यस्त रहीं। उनके साथ ही घर के बच्चे और पुरुष भी लगे रहे।
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बलगुरिया और कंडे पर स्वास्तिक का निशान बनाकर होलिका को अर्पण किया। धूप, दीप, नैवेद्य आदि का भोग लगाकर अग्नि की परिक्रमा की। कई जगहों पर लोगों ने पंडितों को बुलाकर मंत्रोच्चारण के साथ पूजन कराकर होलिका दहन किया।
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होलिका दहन के बाद लोगों ने सुख, समृद्धि के लिए जौ, चने, गन्ने आदि चढ़ाए। शहर के कटिया टोला, इंदिरा नगर कॉलोनी, बृज विहार कॉलोनी, बहादुरगंज समेत सदर और चौक क्षेत्र में जगह-जगह होलिका सजाई गई है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा की रात में होलिका दहन हुआ। इसके बाद खूब अबीर गुलाल उड़ाया गया। एक दूसरे को रंग लगाकर पर्व की बधाइयां दी। इस दौरान होली के गीतों पर युवा जमकर थिरके। मौज मस्ती का यह दौर देर रात तक चलता रहा। वहीं, सोमवार को सुबह से ही रंग खेला जाएगा।
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400 से 550 रुपये क्विंटल बिकी लकड़ी
होलिका दहन के लिए 400 से 550 रुपये क्विंटल के बीच लकड़ी बिकी। लकड़ी के साथ ही लोगों ने होलिका में गोबर के कंडे भी लगाए और कपूर का इस्तेमाल किया।
पूरे दिन घरों में घरों में हुई तैयारियां
- होली पर लोगों को एक-दूसरें के घरों पर आना-जाना रहता है। ऐसे में उनकी खातिरदारी के लिए पकवान बनाए जाते हैं, जिसको लेकर रविवार सुबह से ही घरों में तैयारियां होने लगीं। घर की महिलाओं ने परंपरागत पकवान गुझिया, पपड़ी व खस्ता आदि बनाए। इसके साथ ही नमकीन, रसगुल्ले और दही बड़ा बनाए गए। इसमें पूरे दिन महिलाएं व्यस्त रहीं। उनके साथ ही घर के बच्चे और पुरुष भी लगे रहे।