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शराब के नशे में कहासुनी पर दोस्त को गोली से उड़ाया
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Sat, 04 Feb 2017 11:51 PM IST
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अमरदीप।
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शुक्रवार रात साथ बैठकर शराब पी रहे दोस्तों ने कहासुनी होने पर अपने ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए। मृृतक के पिता ने बेटे के तीनों दोस्तों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। घटनास्थल पर पहुंचे एएसपी ग्रामीण रमेश भारतीय ने मौका मुआयना करते हुए तत्काल घटना के खुलासे के निर्देश दिए। बता दें कि नगर के गुरगवां कालोनी निवासी बैंक डीलर कुलदीप सक्सेना का इकलौता पुत्र 21 वर्षीय अमरदीप उर्फ पारस उत्तराखंड के रुद्रपुर की किसी फैक्ट्री में काम करता था। उसका विवाह जलालाबाद से तय हुआ था। छह फरवरी को उसका तिलक और 28 फरवरी को विवाह होना था। इसीलिए वह दो फरवरी को रुद्रपुर से तिलहर घर आया था। शुक्रवार को वह अपने दोस्तों के साथ पूरे दिन घूमता रहा। घटनाक्रम के मुताबिक देर शाम साढ़े सात बजे वह अपने दोस्त बलवीर, धर्मेंद्र और पंकज के साथ एक खेत में बैठा पार्टी कर रहा था। इसी दौरान सुरेश का पुत्र अनिल वहां पहुंच गया। बताते हैं कि उसके पहुंचने पर अमरदीप और उसके दोस्तों ने अनिल की पिटाई कर दी। बाद में अनिल के पिता सुरेश ने सौ नंबर पर फोन करके पुलिस को बुला लिया। पुलिस के आने पर सभी भाग गए। पुलिस भी औपचारिकता निभा कर चली गई।
बताते हैं कि पुलिस के चले जाने के बाद अमरदीप अपने घर आ गया। रात लगभग नौ बजे अमरदीप के दोस्त उसे घर से यह कह कर बुला ले गये कि पुलिस यहां आएगी, घर से भाग चलो। अमरदीप दोस्तों के साथ घर से चला गया। बताते हैं कि अमरदीप, बलवीर, धर्मेंद्र व पंकज ने घर से कुछ दूरी पर बिरियाबाबा मेला ग्राउंड में बैठकर शराब पीनी शुरू कर दी। नशा जब खूब चढ़ा तो किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। आरोप है कि दोस्तों ने रात लगभग साढ़े दस बजे अमरदीप की कनपटी पर गोली मारकर हत्या कर दी।
उधर, मृतक के पिता कुलदीप सक्सेना ने बताया कि जब अमरदीप काफी देर तक घर नहीं आया तब उन्हें चिंता हुई। इस बीच धर्मेेंद्र के पिता रामस्वरूप ने आकर बताया कि धर्मेंद्र का फोन आया है कि अमरदीप को गोली लग गई है। उसने यह बात किसी को भी बताने से मना किया है। अमरदीप के पिता कुलदीप ने उसके दोस्तों से संपर्क किया। किसी से संपर्क न होने पर कुलदीप ने घरवालों के साथ अमरदीप की खोजबीन शुरू की। अमरदीप का शव उन्हें बिरियाबाबा मेला ग्राउंड पर खून से लथपथ पड़ा मिला। सूचना पर कोतवाल दयाचंद्र शर्मा घटनास्थल पहुंचे तथा शव को सील कराया।
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कुलदीप सक्सेना ने अमरदीप के तीन दोस्ताें बलवीर पुत्र विनोद गंगवार, धर्मेंद्र पुत्र रामस्वरूप यादव और पंकज उर्फ शेखर पुत्र महिपाल मौर्य निवासी गुरगवां कालोनी के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। शनिवार सुबह एएसपी ग्रामीण रमेश भारतीय, सीओ मनोज कुमार कोतवाल के साथ घटनास्थल पहुंचे तथा मौका मुआयना करते हुए पुलिस को तत्काल खुलासे के निर्देश दिए। अमरदीप का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस गंभीरता बरतती तो टल जाती वारदात
सौ नंबर डायल पुलिस यदि मारपीट की घटना को गंभीरता से लेती तो शायद हादसा टाला जा सकता था। कोतवाल का भी यही कहना था कि डायल सौ नंबर पुलिस ने उन्हें घटना की कोई सूचना नहीं दी। यदि दी होती तो वह इन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करते।
लाड़प्यार ने बिगाड़ दिया अमरदीप को
अमरदीप चार बहनों में अकेला भाई था। बड़ी बहन शिवानी व हिमानी की शादी हो चुकी है। तीसरे नंबर पर अमरदीप था तथा इससे छोटी दो बहनें शिवांजलि कक्षा 11 में तथा दिव्यांशी कक्षा 10 की छात्रा हैं। इकलौता पुत्र होने के कारण लाड़ प्यार में वह बिगड़ गया था। मोहल्ले के ही गलत लोगाें से उसकी दोस्ती हो गई। उसके दोस्तों की सोहबत भी मोहल्ले में अच्छी नहीं है। आए दिन शराब पीकर गुंडई करना और मारपीट करके दहशत फैलाना उनका धंधा है। अमरदीप को उसके पिता ने एक साल पहले रुद्रपुर काम पर भेज दिया था। घटना के बाद अमरदीप की मां और चारों बहनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
आरोपियों के घरों पर दबिश देकर की तोड़फोड़
नामजद आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने हत्यारोपियों के घरों में दबिश दी। पुलिस पर तोड़फोड़ का भी आरोप है। कोतवाल ने घरवालों को हिदायत दी कि यदि शीघ्र ही आरोपियों को हाजिर नहीं किया तो परिणाम गंभीर होंगे। पुलिस के भय से पंकज के परिवारीजन घर छोड़कर पलायन कर गए हैं। बलवीर व धर्मेंद्र के घरों में केवल महिलाएं ही हैं।
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बताते हैं कि पुलिस के चले जाने के बाद अमरदीप अपने घर आ गया। रात लगभग नौ बजे अमरदीप के दोस्त उसे घर से यह कह कर बुला ले गये कि पुलिस यहां आएगी, घर से भाग चलो। अमरदीप दोस्तों के साथ घर से चला गया। बताते हैं कि अमरदीप, बलवीर, धर्मेंद्र व पंकज ने घर से कुछ दूरी पर बिरियाबाबा मेला ग्राउंड में बैठकर शराब पीनी शुरू कर दी। नशा जब खूब चढ़ा तो किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। आरोप है कि दोस्तों ने रात लगभग साढ़े दस बजे अमरदीप की कनपटी पर गोली मारकर हत्या कर दी।
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उधर, मृतक के पिता कुलदीप सक्सेना ने बताया कि जब अमरदीप काफी देर तक घर नहीं आया तब उन्हें चिंता हुई। इस बीच धर्मेेंद्र के पिता रामस्वरूप ने आकर बताया कि धर्मेंद्र का फोन आया है कि अमरदीप को गोली लग गई है। उसने यह बात किसी को भी बताने से मना किया है। अमरदीप के पिता कुलदीप ने उसके दोस्तों से संपर्क किया। किसी से संपर्क न होने पर कुलदीप ने घरवालों के साथ अमरदीप की खोजबीन शुरू की। अमरदीप का शव उन्हें बिरियाबाबा मेला ग्राउंड पर खून से लथपथ पड़ा मिला। सूचना पर कोतवाल दयाचंद्र शर्मा घटनास्थल पहुंचे तथा शव को सील कराया।
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कुलदीप सक्सेना ने अमरदीप के तीन दोस्ताें बलवीर पुत्र विनोद गंगवार, धर्मेंद्र पुत्र रामस्वरूप यादव और पंकज उर्फ शेखर पुत्र महिपाल मौर्य निवासी गुरगवां कालोनी के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। शनिवार सुबह एएसपी ग्रामीण रमेश भारतीय, सीओ मनोज कुमार कोतवाल के साथ घटनास्थल पहुंचे तथा मौका मुआयना करते हुए पुलिस को तत्काल खुलासे के निर्देश दिए। अमरदीप का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस गंभीरता बरतती तो टल जाती वारदात
सौ नंबर डायल पुलिस यदि मारपीट की घटना को गंभीरता से लेती तो शायद हादसा टाला जा सकता था। कोतवाल का भी यही कहना था कि डायल सौ नंबर पुलिस ने उन्हें घटना की कोई सूचना नहीं दी। यदि दी होती तो वह इन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करते।
लाड़प्यार ने बिगाड़ दिया अमरदीप को
अमरदीप चार बहनों में अकेला भाई था। बड़ी बहन शिवानी व हिमानी की शादी हो चुकी है। तीसरे नंबर पर अमरदीप था तथा इससे छोटी दो बहनें शिवांजलि कक्षा 11 में तथा दिव्यांशी कक्षा 10 की छात्रा हैं। इकलौता पुत्र होने के कारण लाड़ प्यार में वह बिगड़ गया था। मोहल्ले के ही गलत लोगाें से उसकी दोस्ती हो गई। उसके दोस्तों की सोहबत भी मोहल्ले में अच्छी नहीं है। आए दिन शराब पीकर गुंडई करना और मारपीट करके दहशत फैलाना उनका धंधा है। अमरदीप को उसके पिता ने एक साल पहले रुद्रपुर काम पर भेज दिया था। घटना के बाद अमरदीप की मां और चारों बहनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
आरोपियों के घरों पर दबिश देकर की तोड़फोड़
नामजद आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने हत्यारोपियों के घरों में दबिश दी। पुलिस पर तोड़फोड़ का भी आरोप है। कोतवाल ने घरवालों को हिदायत दी कि यदि शीघ्र ही आरोपियों को हाजिर नहीं किया तो परिणाम गंभीर होंगे। पुलिस के भय से पंकज के परिवारीजन घर छोड़कर पलायन कर गए हैं। बलवीर व धर्मेंद्र के घरों में केवल महिलाएं ही हैं।