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झटका : दस विद्युत उपकेंद्रों के निर्माण को नहीं मिली मंजूरी...अब चार नए का प्रस्ताव भेजेंगे
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अल्हागंज उपकेंद्र पर लगाया गया ट्रांसफॉर्मर। स्रोत: बिजली निगम
शाहजहांपुर। विद्युत निगम की रीवैंप योजना के दूसरे चरण में बनने वाले दस नए उपकेंद्रों के निर्माण को मंजूरी नहीं मिली है, जबकि अधिकतर उपकेंद्रों के लिए जमीन भी चिह्नित कर ली गई थी। अब फिर चार नए उपकेंद्रों का प्रस्ताव बनाकर भेजने की तैयारी है।
रीवैंप योजना के पहले चरण की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। पहले फेज में बंच लाइन, खंभे बदलने व उपकेंद्रों की क्षमतावृद्धि का कार्य शुरू कराया गया। अप्रैल 2025 में पूर्ण होने वाला पहले चरण का कार्य ही अब तक मात्र 92 प्रतिशत निपट पाया है। बावजूद इसके इतना काम होने के बाद भी शहर व ग्रामीण इलाकों में बिजली के तार लटक रहे हैं।
सड़क के बीच में लगे व गले खंभे भी नहीं बदले जा सके हैं। योजना के दूसरे चरण में दस स्थानों पर नए उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव था। जिसमें नगर में मघई टोला व अटसलिया औद्योगिक क्षेत्र में उपकेंद्र बनाने की योजना थी। ऐसे में तिलहर डिवीजन के गढि़या रंगीन, जलालाबाद के परौर, पुवायां के देवकली और मुड़िया कुर्मियात में उपकेंद्रों के लिए जमीन भी बिजली निगम के अभिलेखों में दर्ज हो गई तो सल्लिया उपकेंद्र के लिए संडा खास में निगम का बोर्ड तक लगा दिया गया।
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टिकरी, जलालाबाद के खुजरिया, बरीखास में जमीन की तलाश की जा रही थी। उपकेंद्रों की स्वीकृति नहीं मिलने से अधिकारी शांत होकर बैठ गए हैं। इसके चलते लोगों को ओवरलोडिंग की समस्या से लगातार जूझते रहना पड़ेगा।
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दस एमवीए के ट्रांसफॉर्मर लगाकर देनी थी राहत
विद्युत उपकेंद्रों पर पांच-पांच एमवीए के दो ट्रांसफॉर्मर लगाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की योजना थी। पहले फेज का कार्य पूर्ण होने के बाद दूसरे चरण में बजट जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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उपकेंद्रों का निर्माण कर यह थी योजना
शहर के मघईटोला में उपकेंद्र बनाकर अजीजगंज उपकेंद्र पर कनेक्शनधारकों का बोझ कम करने की तैयारी थी। यहां पर सबसे ज्यादा उपभोक्ता हैं। फॉल्ट आने पर उपकेंद्र में आए दिन हंगामा होता है। सबसे ज्यादा गर्मी में दिक्कत आती है। इसी तरह कहेलिया में उपकेंद्र बनाकर आसपास के गांवों को जोड़ने की योजना थी। ग्रामीण इलाकों में उपकेंद्र ओवरलोडिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। तेज हवा चलने से तार टूटने समेत अन्य दिक्कतें होने से लोगों को बिजली मिलना मुश्किल होती है। जून-जुलाई की गर्मी में हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं।
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रीवैंप योजना के दूसरे चरण के लिए बनने वाले उपकेंद्रों के लिए तत्कालीन एसई जेपी वर्मा ने प्रस्ताव भेजा था। स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अब दोबारा से उपकेंद्रों पर लोड का अध्ययन किया जा रहा है। चार नए उपकेंद्रों का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
- जागेश कुमार, एसई-बिजली निगम
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रीवैंप योजना के पहले चरण की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। पहले फेज में बंच लाइन, खंभे बदलने व उपकेंद्रों की क्षमतावृद्धि का कार्य शुरू कराया गया। अप्रैल 2025 में पूर्ण होने वाला पहले चरण का कार्य ही अब तक मात्र 92 प्रतिशत निपट पाया है। बावजूद इसके इतना काम होने के बाद भी शहर व ग्रामीण इलाकों में बिजली के तार लटक रहे हैं।
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सड़क के बीच में लगे व गले खंभे भी नहीं बदले जा सके हैं। योजना के दूसरे चरण में दस स्थानों पर नए उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव था। जिसमें नगर में मघई टोला व अटसलिया औद्योगिक क्षेत्र में उपकेंद्र बनाने की योजना थी। ऐसे में तिलहर डिवीजन के गढि़या रंगीन, जलालाबाद के परौर, पुवायां के देवकली और मुड़िया कुर्मियात में उपकेंद्रों के लिए जमीन भी बिजली निगम के अभिलेखों में दर्ज हो गई तो सल्लिया उपकेंद्र के लिए संडा खास में निगम का बोर्ड तक लगा दिया गया।
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टिकरी, जलालाबाद के खुजरिया, बरीखास में जमीन की तलाश की जा रही थी। उपकेंद्रों की स्वीकृति नहीं मिलने से अधिकारी शांत होकर बैठ गए हैं। इसके चलते लोगों को ओवरलोडिंग की समस्या से लगातार जूझते रहना पड़ेगा।
दस एमवीए के ट्रांसफॉर्मर लगाकर देनी थी राहत
विद्युत उपकेंद्रों पर पांच-पांच एमवीए के दो ट्रांसफॉर्मर लगाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की योजना थी। पहले फेज का कार्य पूर्ण होने के बाद दूसरे चरण में बजट जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
उपकेंद्रों का निर्माण कर यह थी योजना
शहर के मघईटोला में उपकेंद्र बनाकर अजीजगंज उपकेंद्र पर कनेक्शनधारकों का बोझ कम करने की तैयारी थी। यहां पर सबसे ज्यादा उपभोक्ता हैं। फॉल्ट आने पर उपकेंद्र में आए दिन हंगामा होता है। सबसे ज्यादा गर्मी में दिक्कत आती है। इसी तरह कहेलिया में उपकेंद्र बनाकर आसपास के गांवों को जोड़ने की योजना थी। ग्रामीण इलाकों में उपकेंद्र ओवरलोडिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। तेज हवा चलने से तार टूटने समेत अन्य दिक्कतें होने से लोगों को बिजली मिलना मुश्किल होती है। जून-जुलाई की गर्मी में हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं।
रीवैंप योजना के दूसरे चरण के लिए बनने वाले उपकेंद्रों के लिए तत्कालीन एसई जेपी वर्मा ने प्रस्ताव भेजा था। स्वीकृति नहीं मिल सकी है। अब दोबारा से उपकेंद्रों पर लोड का अध्ययन किया जा रहा है। चार नए उपकेंद्रों का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
- जागेश कुमार, एसई-बिजली निगम