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Shahjahanpur News: शाहजहांपुर हादसा- हे ईश्वर! कैसा सितम...सुनौरा में आंसुओं का सैलाब
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शाहजहांपुर। तिलहर थाना क्षेत्र के सुनौरा अजमतपुर गांव के लोग शनिवार की दोपहर ऐसे दर्दनाक हादसे के साक्षी बने, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया। जिन लोगों की मौत हुई है, उनके घर आसपास करीब सौ मीटर के दायरे में ही हैं। दोपहर को हादसे की सूचना मिलते ही चीख-पुकार मच गई। सांत्वना देने पहुंचे लोगों के आंसू रोके न रुके।
सुनौरा में हर साल भागवत कथा का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से कराया जाता था। धार्मिक आयोजन में पूरा गांव बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। नदी से कलश में जल भरने के लिए गांव के लगभग हर परिवार से लोग जाते थे। सुबह से ग्रामीण कथा की तैयारियों में लगे हुए थे। डीसीएम में म्यूजिक सिस्टम का इंतजाम किया गया था। लोग देवी गीतों पर नाच रहे थे। बच्चे उत्साह से भरे हुए थे। कभी तेज आवाज में बज रहे भजनों पर नाचते तो कभी दौड़कर अपने घर की महिलाओं से जल्दी चलने के लिए कहते। पूरे गांव में खुशी का माहौल था। दोपहर करीब एक बजे वे लोग जल लेने के लिए निकले थे। इससे पहले पूरे गांव का माहौल भक्ति के रंग में रंगा हुआ था। महिलाओं-बच्चों के साथ पुरुष ट्रैक्टर ट्रॉली में लदकर निकले थे। बताते हैं कि कुछ बुजुर्गों ने उन लोगों को टोका भी था। वे कह रहे थे कि ट्रॉली में इस तरह से लटककर मत जाओ। मगर भक्ति के रंग में रंगे लोग इस सामूहिक आयोजन से दूर नहीं होना चाहते थे। गांव से निकलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जैसे ही दुखद सूचना गांव पहुंची, हर ओर चीख-पुकार मच गई।
जिन घरों के लोगों की मौत हुई थी या घायल हुए थे, उनको सांत्वना देने के लिए ग्रामीण उमड़ पड़े। जो जैसे बैठा था, वो भागकर मौके पर पहुंचा। जिन अपनों को हंसी-खुशी घर से जाते देखा था, वे लहूलुहान पड़े थे। गांव के राघवेंद्र सिंह, आशाराम, प्रमोद आदि ने बताया कि ऐसा हादसा आज तक न सुना और न देखा। एक साथ इतनी मौतें हो जाएंगी, ये कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
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सुनौरा में हर साल भागवत कथा का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से कराया जाता था। धार्मिक आयोजन में पूरा गांव बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। नदी से कलश में जल भरने के लिए गांव के लगभग हर परिवार से लोग जाते थे। सुबह से ग्रामीण कथा की तैयारियों में लगे हुए थे। डीसीएम में म्यूजिक सिस्टम का इंतजाम किया गया था। लोग देवी गीतों पर नाच रहे थे। बच्चे उत्साह से भरे हुए थे। कभी तेज आवाज में बज रहे भजनों पर नाचते तो कभी दौड़कर अपने घर की महिलाओं से जल्दी चलने के लिए कहते। पूरे गांव में खुशी का माहौल था। दोपहर करीब एक बजे वे लोग जल लेने के लिए निकले थे। इससे पहले पूरे गांव का माहौल भक्ति के रंग में रंगा हुआ था। महिलाओं-बच्चों के साथ पुरुष ट्रैक्टर ट्रॉली में लदकर निकले थे। बताते हैं कि कुछ बुजुर्गों ने उन लोगों को टोका भी था। वे कह रहे थे कि ट्रॉली में इस तरह से लटककर मत जाओ। मगर भक्ति के रंग में रंगे लोग इस सामूहिक आयोजन से दूर नहीं होना चाहते थे। गांव से निकलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जैसे ही दुखद सूचना गांव पहुंची, हर ओर चीख-पुकार मच गई।
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जिन घरों के लोगों की मौत हुई थी या घायल हुए थे, उनको सांत्वना देने के लिए ग्रामीण उमड़ पड़े। जो जैसे बैठा था, वो भागकर मौके पर पहुंचा। जिन अपनों को हंसी-खुशी घर से जाते देखा था, वे लहूलुहान पड़े थे। गांव के राघवेंद्र सिंह, आशाराम, प्रमोद आदि ने बताया कि ऐसा हादसा आज तक न सुना और न देखा। एक साथ इतनी मौतें हो जाएंगी, ये कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
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