{"_id":"61648f6e8ebc3e9baf369102","slug":"shaheed-shahjahanpur-news-bly4626029191","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहीद नगरी को सारज सिंह की शहादत पर रहेगा नाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीद नगरी को सारज सिंह की शहादत पर रहेगा नाज
विज्ञापन
शाहजहांपुर। शहीद सारज सिंह का फाइल फोटो।
- फोटो : POWAYAN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। शाहजहांपुर को यूं ही नहीं शहीद नगरी कहा जाता है। विश्व युद्ध हो या स्वतंत्रता संग्राम या फिर आजादी के बाद चीन-पाकिस्तान से युद्ध, जिले के रणबांकुरों ने अपनी शहादत से मां भारती का मस्तक गर्व से ऊपर रखा। जिले के 14 सैनिक अब तक परमवीर चक्र, महावीर चक्र, अशोक चक्र और वीर चक्र आदि से गौरवान्वित हो चुके हैं।
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में जिले के कई लोगों ने विभिन्न मोर्चों में लड़ते हुए शहादत दी थी। आजादी के आंदोलन में काकोरी कांड के महानायक पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां ने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते चूम लिया था। आजादी के बाद 1948 में भारत-पाक युद्ध के दौरान नायक जदुनाथ सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया था।
1962 के भारत-चीन युद्ध में कैप्टन कन्हैया लाल समेत कई लोगों ने वतन के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। 1965 के भारत-पाक युद्ध, 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान और 1999 में कारगिल युद्ध में भी जिले के जवानों ने सर्वोच्च बलिदान से अपने पैर पीछे नहीं खींचे। पूर्व सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय के मुताबिक सोमवार को शहीद हुए सारज सिंह के अलावा अब तक तकरीबन 40 लोग अमर शहीदों में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में जिले के कई लोगों ने विभिन्न मोर्चों में लड़ते हुए शहादत दी थी। आजादी के आंदोलन में काकोरी कांड के महानायक पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां ने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते चूम लिया था। आजादी के बाद 1948 में भारत-पाक युद्ध के दौरान नायक जदुनाथ सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया था।
विज्ञापन
1962 के भारत-चीन युद्ध में कैप्टन कन्हैया लाल समेत कई लोगों ने वतन के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। 1965 के भारत-पाक युद्ध, 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान और 1999 में कारगिल युद्ध में भी जिले के जवानों ने सर्वोच्च बलिदान से अपने पैर पीछे नहीं खींचे। पूर्व सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय के मुताबिक सोमवार को शहीद हुए सारज सिंह के अलावा अब तक तकरीबन 40 लोग अमर शहीदों में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। संवाद
विज्ञापन