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सत्संगति और हरिकथा दुर्लभ : सुरेश
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पुवायां। गांव नाहिल में स्वामी आत्मानंद की पुण्यतिथि पर सोमवार को कथा और भंडारे का आयोजन किया गया। इसके बाद आश्रम पर आए दंडी स्वामियों को कंबल, वस्त्र और दक्षिणा देकर विदाई दी गई।
कथा में आचार्य सुरेशचंद्र मिश्रा ने सत्संगति करने और हरिकथा सुनने से होने वाले लाभ पर चर्चा करते हुए कहा कि पत्नी, पुत्र, धन किसी के भी पास हो सकता है, लेकिन सत्संगति और हरिकथा दुर्लभ है। सभी को समय निकालकर सत्संग करना चाहिए और हरिकथा करानी चाहिए। कथा कराना संभव न हो तो कथा में भाग जरूर लेना चाहिए।
कथा के बाद दंडी स्वामियों को विदाई दी गई। शाहजहांपुर के निरंकार और गांव के तमाम लोगों ने दंडी स्वामियों को कंबल, वस्त्र आदि दान किए। इसके बाद देर शाम तक चले भंडारे में कई गांवों के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में बाबा रामकैलाश वाजपेयी, स्वामी रामानंद, सर्वेश फौजी, दिनेश कुमार, महेश वाजपेयी, मुंशी वाजपेयी, प्रद्युम्नशंकर शुक्ला, सतेंद्र मोहन वाजपेयी, शिवलाल शुक्ला का सहयोग रहा।
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कथा में आचार्य सुरेशचंद्र मिश्रा ने सत्संगति करने और हरिकथा सुनने से होने वाले लाभ पर चर्चा करते हुए कहा कि पत्नी, पुत्र, धन किसी के भी पास हो सकता है, लेकिन सत्संगति और हरिकथा दुर्लभ है। सभी को समय निकालकर सत्संग करना चाहिए और हरिकथा करानी चाहिए। कथा कराना संभव न हो तो कथा में भाग जरूर लेना चाहिए।
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कथा के बाद दंडी स्वामियों को विदाई दी गई। शाहजहांपुर के निरंकार और गांव के तमाम लोगों ने दंडी स्वामियों को कंबल, वस्त्र आदि दान किए। इसके बाद देर शाम तक चले भंडारे में कई गांवों के श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में बाबा रामकैलाश वाजपेयी, स्वामी रामानंद, सर्वेश फौजी, दिनेश कुमार, महेश वाजपेयी, मुंशी वाजपेयी, प्रद्युम्नशंकर शुक्ला, सतेंद्र मोहन वाजपेयी, शिवलाल शुक्ला का सहयोग रहा।
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