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रोडवेज की साधारण सेवा पर भारी पड़ रहीं लोहिया बसें
अनूप वाजपेयी, शाहजहांपुर
Updated Mon, 20 Apr 2015 08:20 PM IST
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25 फीसदी कम किराए में मंजिल तक पहुंचाने वालीं परिवहन निगम की लोहिया ग्रामीण सेवा वाली बसें पब्लिक भले ही हाथों-हाथ ले रही हो, रोडवेज की साधारण सेवा वाली बसों पर लोहिया सेवा भारी पड़ रही हैं। एक ही रूट पर दोनों श्रेणियों की बसें उपलब्ध होने पर यात्री लोहिया बसों को तरजीह दे रहे हैं। साधारण सेवा की बसें रवाना होने से पहले लोहिया सेवा की दूसरी बस आने पर यात्री उसमें शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे में साधारण सेवा की बसों का लोड फैक्टर गिर रहा है।
पूरा नहीं हो रहा लोहिया बसें चलाने का मकसद
रोडवेज के स्थानीय डिपो में इस समय 138 बसों का बेड़ा है। इनमें निगम की 101 और शेष 37 बसें अनुबंधित श्रेणी की हैं। निगम की बसों में लोहिया ग्रामीण सेवा के तहत हाल ही में मिलीं सात बसें भी शामिल हैं। लोहिया सेवा ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे मार्गों के लिए शुरू की गई, जो अभी तक रोडवेज सेवा से अछूते रहे। इसके विपरीत लोहिया सेवा की बसें देहात के स्टेशनों को आपस में जोड़ने के बजाय जिला मुख्यालय से उन्हीं पारंपरिक मार्गों पर चलाई जा रही हैं, जिन पर पहले भी रोडवेज की बसें दौड़ चुकी हैं।
इन मार्गों पर लोहिया सेवा की बेहद जरूरत
तिलहर-जैतीपुर, जलालाबाद-कटरा वाया मदनापुर, बंडा-खुटार, बंडा-पूरनपुर वाया कसगंजा, कांट-बुधुवाना वाया मदनापुर, पुवायां-जेवां, तिलहर-पुवायां वाया निगोही आदि ऐसे रूट हैं, जिनके आसपास बसे गावों के लोगों को रोडवेज बसों से सफर के लिए नजदीकी ब्लॉक अथवा तहसील मुख्यालयों तक जाना पड़ता है। रोडवेज के अधिकारी इन मार्गों पर मानक के अनुरूप लोड फैक्टर नहीं मिलने का हवाला देकर लोहिया बसें चलाने से गुरेज कर रहे हैं।
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इस तरह तय होता है बसों का लोड फैक्टर
बसों में यात्री संख्या और यात्रा किमी में सामंजस्य से लोड फैक्टर तय होता है। मसलन, बरेली रूट की 52 सीटर बस में सभी सीटें बरेली के यात्रियों से फुल हों तो बस का लोड फैक्टर 100 प्रतिशत माना जाएगा। तिलहर और कटरा में यात्रियों के उतरने पर लोड फैक्टर में भी गिरावट दर्ज की जाती है। निगम मुख्यालय ने मानक तय किया है कि किसी भी बस का लोड फैक्टर 65 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।
साधारण बसों का ऐसे घट रहा लोड फैक्टर
स्टेशन पर गौरीफंटा जाने वाली जाने वाली बस में पुवायां, खुटार जैसे पाकेट रूट के स्थानीय यात्री भी सवार हो जाते हैं, लेकिन साधारण सेवा की रवानगी से पहले जोगराजपुर केलिए लोहिया सेवा की बस प्लेटफार्म पर लगते ही साधारण बस छोड़कर यात्री उसमें लपक लेते हैं। ऐसी दशा में लोड फेक्टर पूरा करने के लिए साधारण सेवा के रनिंग स्टाफ को पर्याप्त यात्रियों की प्रतीक्षा में खड़े रहना पड़ता है।
लोहिया बसों का लोड फैक्टर सात फीसदी ज्यादा
इन दिनों यात्रियों की संख्या के लिहाज से साधारण बसों का लोड फैक्टर 65 से 70 प्रतिशत तक सीमित है, जबकि लोहिया बसें 77 प्रतिशत लोड फैक्टर दे रही हैं। अब तक कई लोहिया बसें 80 प्रतिशत तक लोड फैक्टर दे चुकी हैं। इसके बावजूद अधिकारी नहीं मानते कि लोहिया बसों से साधारण सेवा का बिजनेस प्रभावित हो रहा है।
निगम के नियमों के मुताबिक चल रहीं बसें
रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रामबहादुर यादव का कहना है कि लोहिया बसें निगम के उच्चाधिकारियों द्वारा तय किए नियमों के आधार पर चलाई जा रही हैं। एआरएम के अनुसार लोड फैक्टर का मानक पूरा करने के कड़े निर्देशों केचलते जिला मुख्यालय से लोहिया बसों के रूट तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोहिया सेवा से विभाग को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो रहा। जोगराजपुर, नभीची, पूरनपुर, बंडा, गढ़िया रंगीन आदि मार्गों पर रियायती किराए वाली बसों को हाथों-हाथ लिया जा रहा है।
यात्रियों को लुभा रही बसों की बेहतर कंडीशन
‘लोहिया बसें नई होने और उनमें सामान रखने का अलग गैरेज बनाया गया है। इन बसों की बेहतर कंडीशन, किराए में रियायत और अन्य सुविधाएं यात्रियों को लुभा रही हैं। लोहिया बसों के चालक-परिचालक को रूट पर चलने के दौरान रास्ते की सवारियां अनिवार्य रूप से बिठाने के निर्देश दिए गए हैं।’
-सुशील त्रिवेदी, स्टेशन प्रबंधक, शाहजहांपुर डिपो
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पूरा नहीं हो रहा लोहिया बसें चलाने का मकसद
रोडवेज के स्थानीय डिपो में इस समय 138 बसों का बेड़ा है। इनमें निगम की 101 और शेष 37 बसें अनुबंधित श्रेणी की हैं। निगम की बसों में लोहिया ग्रामीण सेवा के तहत हाल ही में मिलीं सात बसें भी शामिल हैं। लोहिया सेवा ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे मार्गों के लिए शुरू की गई, जो अभी तक रोडवेज सेवा से अछूते रहे। इसके विपरीत लोहिया सेवा की बसें देहात के स्टेशनों को आपस में जोड़ने के बजाय जिला मुख्यालय से उन्हीं पारंपरिक मार्गों पर चलाई जा रही हैं, जिन पर पहले भी रोडवेज की बसें दौड़ चुकी हैं।
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इन मार्गों पर लोहिया सेवा की बेहद जरूरत
तिलहर-जैतीपुर, जलालाबाद-कटरा वाया मदनापुर, बंडा-खुटार, बंडा-पूरनपुर वाया कसगंजा, कांट-बुधुवाना वाया मदनापुर, पुवायां-जेवां, तिलहर-पुवायां वाया निगोही आदि ऐसे रूट हैं, जिनके आसपास बसे गावों के लोगों को रोडवेज बसों से सफर के लिए नजदीकी ब्लॉक अथवा तहसील मुख्यालयों तक जाना पड़ता है। रोडवेज के अधिकारी इन मार्गों पर मानक के अनुरूप लोड फैक्टर नहीं मिलने का हवाला देकर लोहिया बसें चलाने से गुरेज कर रहे हैं।
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इस तरह तय होता है बसों का लोड फैक्टर
बसों में यात्री संख्या और यात्रा किमी में सामंजस्य से लोड फैक्टर तय होता है। मसलन, बरेली रूट की 52 सीटर बस में सभी सीटें बरेली के यात्रियों से फुल हों तो बस का लोड फैक्टर 100 प्रतिशत माना जाएगा। तिलहर और कटरा में यात्रियों के उतरने पर लोड फैक्टर में भी गिरावट दर्ज की जाती है। निगम मुख्यालय ने मानक तय किया है कि किसी भी बस का लोड फैक्टर 65 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।
साधारण बसों का ऐसे घट रहा लोड फैक्टर
स्टेशन पर गौरीफंटा जाने वाली जाने वाली बस में पुवायां, खुटार जैसे पाकेट रूट के स्थानीय यात्री भी सवार हो जाते हैं, लेकिन साधारण सेवा की रवानगी से पहले जोगराजपुर केलिए लोहिया सेवा की बस प्लेटफार्म पर लगते ही साधारण बस छोड़कर यात्री उसमें लपक लेते हैं। ऐसी दशा में लोड फेक्टर पूरा करने के लिए साधारण सेवा के रनिंग स्टाफ को पर्याप्त यात्रियों की प्रतीक्षा में खड़े रहना पड़ता है।
लोहिया बसों का लोड फैक्टर सात फीसदी ज्यादा
इन दिनों यात्रियों की संख्या के लिहाज से साधारण बसों का लोड फैक्टर 65 से 70 प्रतिशत तक सीमित है, जबकि लोहिया बसें 77 प्रतिशत लोड फैक्टर दे रही हैं। अब तक कई लोहिया बसें 80 प्रतिशत तक लोड फैक्टर दे चुकी हैं। इसके बावजूद अधिकारी नहीं मानते कि लोहिया बसों से साधारण सेवा का बिजनेस प्रभावित हो रहा है।
निगम के नियमों के मुताबिक चल रहीं बसें
रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रामबहादुर यादव का कहना है कि लोहिया बसें निगम के उच्चाधिकारियों द्वारा तय किए नियमों के आधार पर चलाई जा रही हैं। एआरएम के अनुसार लोड फैक्टर का मानक पूरा करने के कड़े निर्देशों केचलते जिला मुख्यालय से लोहिया बसों के रूट तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोहिया सेवा से विभाग को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो रहा। जोगराजपुर, नभीची, पूरनपुर, बंडा, गढ़िया रंगीन आदि मार्गों पर रियायती किराए वाली बसों को हाथों-हाथ लिया जा रहा है।
यात्रियों को लुभा रही बसों की बेहतर कंडीशन
‘लोहिया बसें नई होने और उनमें सामान रखने का अलग गैरेज बनाया गया है। इन बसों की बेहतर कंडीशन, किराए में रियायत और अन्य सुविधाएं यात्रियों को लुभा रही हैं। लोहिया बसों के चालक-परिचालक को रूट पर चलने के दौरान रास्ते की सवारियां अनिवार्य रूप से बिठाने के निर्देश दिए गए हैं।’
-सुशील त्रिवेदी, स्टेशन प्रबंधक, शाहजहांपुर डिपो