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चुनाव में लगने से रोडवेज बसों की आमदनी, तो यात्रियों की परेशानी बढ़ी
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शाहजहांपुर के रोडवेज पर बस से जाने वाले यात्रियों की लगी भीड़ । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। रोडवेज बसों को विधानसभा चुनाव में लगाया गया है। इसके लिए रोडवेज को चुनाव आयोग से भुगतान भी किया जाएगा। इसके साथ ही कम बसें चलने से उनमें लोड फैक्टर भी अधिक हो रहा है। इससे उनकी आमदनी बढ़ी है, लेकिन बस अड्डे े पर बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
रोडवेज के बेड़े में निगम की 110 और अनुबंधित 76 बसें हैं। इनमें से निगम की 47 व अनुबंधित 36 बसों को विधानसभा चुनाव में लगाया गया है। जिसकी वजह से यात्रियों को बस अड्डे पर बसें ही नहीं मिल रहीं। जो बसें चल भी रहीं है, उनमें इतनी भीड़ होती है कि कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। वहीं तमाम लोग घंटों तक बसों का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन इससे परिवहन निगम को कोई नुकसान नहीं है, बल्कि उसकी आमदनी में इजाफा ही हुआ है। कम बसें चलने से जहां लोड फैक्टर पूरा हो रहा है, वहीं चुनाव में लगने पर उनका किराया भी मिलता है। जबकि यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
24080 रुपये से मिलेगा भुगतान
- निगम की 47 बसों को विधानसभा चुनाव की ड्यूटी में फोर्स को लाने-ले जाने के लिए लगाया गया है। इनमें 15 फरवरी को 26 बसों से होमगार्डों को कानपुर के लिए भेजा गया। यह बसें आठ मार्च तक विभिन्न जनपदों में अलग-अलग चरणों के चुनाव संपन्न कराने के बाद वापस आएंगी। इसी तरह से 21 बसें पुलिस कर्मियों को लेकर गई हैं और चुनाव पूरा कराने के बाद लौटेंगी। इनके अलावा 35 अनुबंधित बसें 21 फरवरी को मतदान कार्मिकों को लेकर सीतापुर जाएंगी। चुनाव में लगी निगम की प्रत्येक बस के लिए 24080 रुपये का भुगतान चुनाव आयोग की ओर से किया जाएगा। अनुबंधित बसों के लिए अलग से किराया निर्धारित किया गया है।
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लोड फैक्टर बढ़ने से 24,89,837 रुपये हुई एक दिन की कमाई
- परिवहन निगम को विधानसभा चुनाव में लगी बसों का किराया तो मिलेगा ही, वर्तमान में कम बसें संचालित होने से लोड फैक्टर बढ़ने का फायदा भी हो रहा है। रोडवेज बस स्टैंड के इंचार्ज संजीव निगम ने बताया कि वसंत पंचमी से पहले सर्दी का मौसम होने के कारण यात्रियों की संख्या कम थी और बसों का संचालन अधिक हो रहा था। उस समय लोड फैक्टर कम था। एक दिन में 18 से 20 लाख रुपये ही कमाई होती थी। लेकिन चुनाव में बसों के लगने के बाद शेष संचालित बसों का लोड फैक्टर बढ़ने से सिर्फ एक दिन की कमाई 24 लाख 89 हजार रुपये से अधिक हुई है।
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रोडवेज के बेड़े में निगम की 110 और अनुबंधित 76 बसें हैं। इनमें से निगम की 47 व अनुबंधित 36 बसों को विधानसभा चुनाव में लगाया गया है। जिसकी वजह से यात्रियों को बस अड्डे पर बसें ही नहीं मिल रहीं। जो बसें चल भी रहीं है, उनमें इतनी भीड़ होती है कि कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। वहीं तमाम लोग घंटों तक बसों का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन इससे परिवहन निगम को कोई नुकसान नहीं है, बल्कि उसकी आमदनी में इजाफा ही हुआ है। कम बसें चलने से जहां लोड फैक्टर पूरा हो रहा है, वहीं चुनाव में लगने पर उनका किराया भी मिलता है। जबकि यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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24080 रुपये से मिलेगा भुगतान
- निगम की 47 बसों को विधानसभा चुनाव की ड्यूटी में फोर्स को लाने-ले जाने के लिए लगाया गया है। इनमें 15 फरवरी को 26 बसों से होमगार्डों को कानपुर के लिए भेजा गया। यह बसें आठ मार्च तक विभिन्न जनपदों में अलग-अलग चरणों के चुनाव संपन्न कराने के बाद वापस आएंगी। इसी तरह से 21 बसें पुलिस कर्मियों को लेकर गई हैं और चुनाव पूरा कराने के बाद लौटेंगी। इनके अलावा 35 अनुबंधित बसें 21 फरवरी को मतदान कार्मिकों को लेकर सीतापुर जाएंगी। चुनाव में लगी निगम की प्रत्येक बस के लिए 24080 रुपये का भुगतान चुनाव आयोग की ओर से किया जाएगा। अनुबंधित बसों के लिए अलग से किराया निर्धारित किया गया है।
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लोड फैक्टर बढ़ने से 24,89,837 रुपये हुई एक दिन की कमाई
- परिवहन निगम को विधानसभा चुनाव में लगी बसों का किराया तो मिलेगा ही, वर्तमान में कम बसें संचालित होने से लोड फैक्टर बढ़ने का फायदा भी हो रहा है। रोडवेज बस स्टैंड के इंचार्ज संजीव निगम ने बताया कि वसंत पंचमी से पहले सर्दी का मौसम होने के कारण यात्रियों की संख्या कम थी और बसों का संचालन अधिक हो रहा था। उस समय लोड फैक्टर कम था। एक दिन में 18 से 20 लाख रुपये ही कमाई होती थी। लेकिन चुनाव में बसों के लगने के बाद शेष संचालित बसों का लोड फैक्टर बढ़ने से सिर्फ एक दिन की कमाई 24 लाख 89 हजार रुपये से अधिक हुई है।