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Shahjahanpur News: दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा
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शाहजहांपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रमोहन चतुर्वेदी ने दुष्कर्म के मुकदमे में एक दोषी को दस वर्ष कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है। तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार- सदर बाजार थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसकी 16 वर्ष की बेटी 13 सितंबर 2011 को ट्यूशन पढ़ने गई थी। वह देर शाम तक घर नहीं लौटी तो बेटी की तलाश शुरू की। ट्यूशन मास्टर ने बताया कि उसकी बेटी को रामगोपाल बुला ले गया था। वादी रामगोपाल के घर गया तो उसके पिता पातीराम ने गालियां दीं।
14 सितंबर 2011 को रामगोपाल ने फोन करके बताया कि उसकी बेटी को वह ले गया है। उसने लोगों से जानकारी ली तो पता चला कि बेटी को बहलाकर ले जाने में अनुज, आदेश और विपिन का हाथ है। विवेचना के बाद रामगोपाल, विपिन सक्सेना, अनुज कुमार, आदेश कुमार के विरुद्ध आरोपपत्र अदालत भेजा गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील संतोष कुमार त्रिवेदी के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने रामगोपाल को दोषी पाया और उसे दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। आरोपी विपिन, अनुज, आदेश को बरी कर दिया।
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गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में दो सगे भाइयों को पांच वर्ष की जेल
शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर) अभय प्रताप सिंह ने गैंगस्टर एक्ट के एक मुकदमे में दो सगे भाइयों को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जलालाबाद थाने के एसएसआई राजाराम भार्गव ने सूचना देकर बताया कि जलालाबाद क्षेत्र में गांव बढ़ाई है जहां सुखराम का एक सक्रिय गैंग है। यह गैंग अपने अनुचित लाभ के लिए हत्या, डकैती, आगजनी करके क्षेत्र में आतंक फैलाता है। प्रभारी निरीक्षक जलालाबाद द्वारा जिला मजिस्ट्रेट के द्वारा अनुमोदित अभियुक्त सुखराम, विश्राम, साधु व श्रीराम के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत 31 जनवरी 1997 में अभियोग पंजीकृत किया गया था।
विवेचना के बाद सुखराम, विश्राम, साधु और श्रीराम के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपपत्र अदालत भेजा गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार वाजपेयी के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने विश्राम उसके भाई साधु को दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। उन पर 500-500 रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी सुखराम, श्रीराम की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी। संवाद
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अभियोजन पक्ष के अनुसार- सदर बाजार थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसकी 16 वर्ष की बेटी 13 सितंबर 2011 को ट्यूशन पढ़ने गई थी। वह देर शाम तक घर नहीं लौटी तो बेटी की तलाश शुरू की। ट्यूशन मास्टर ने बताया कि उसकी बेटी को रामगोपाल बुला ले गया था। वादी रामगोपाल के घर गया तो उसके पिता पातीराम ने गालियां दीं।
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14 सितंबर 2011 को रामगोपाल ने फोन करके बताया कि उसकी बेटी को वह ले गया है। उसने लोगों से जानकारी ली तो पता चला कि बेटी को बहलाकर ले जाने में अनुज, आदेश और विपिन का हाथ है। विवेचना के बाद रामगोपाल, विपिन सक्सेना, अनुज कुमार, आदेश कुमार के विरुद्ध आरोपपत्र अदालत भेजा गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील संतोष कुमार त्रिवेदी के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने रामगोपाल को दोषी पाया और उसे दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। आरोपी विपिन, अनुज, आदेश को बरी कर दिया।
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गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में दो सगे भाइयों को पांच वर्ष की जेल
शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर) अभय प्रताप सिंह ने गैंगस्टर एक्ट के एक मुकदमे में दो सगे भाइयों को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जलालाबाद थाने के एसएसआई राजाराम भार्गव ने सूचना देकर बताया कि जलालाबाद क्षेत्र में गांव बढ़ाई है जहां सुखराम का एक सक्रिय गैंग है। यह गैंग अपने अनुचित लाभ के लिए हत्या, डकैती, आगजनी करके क्षेत्र में आतंक फैलाता है। प्रभारी निरीक्षक जलालाबाद द्वारा जिला मजिस्ट्रेट के द्वारा अनुमोदित अभियुक्त सुखराम, विश्राम, साधु व श्रीराम के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत 31 जनवरी 1997 में अभियोग पंजीकृत किया गया था।
विवेचना के बाद सुखराम, विश्राम, साधु और श्रीराम के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपपत्र अदालत भेजा गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार वाजपेयी के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने विश्राम उसके भाई साधु को दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। उन पर 500-500 रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी सुखराम, श्रीराम की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी। संवाद