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Shahjahanpur News: साइकोसिस एक मानसिक विकार, वास्तविकता से संपर्क खो देता मरीज
Fri, 28 Mar 2025 12:54 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:54 AM IST
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मनोचिकित्सक अभिनव रस्तोगी, राजकीय मेडिकल कॉलेज
- फोटो : पुतला फूंकते क्षत्रिय महासभा के सदस्य।
शाहजहांपुर। चार मासूम बच्चों की हत्या की वारदात के पीछे की वजह मानसिक बीमारी का पूरा इलाज न करा पाना सामने आ रहा है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे पहले मानसिक रोग को पहचानना आवश्यक है। व्यक्ति को ऐसा लगता है कि वह शारीरिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह फिट है लेकिन ऐसा होता नहीं। इस वारदात के पीछे भी ऐसा ही प्रतीत होता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि बच्चों की हत्या करने वाला साइकोसिस यानी मनोविकृति की बीमारी से पीड़ित प्रतीत होता है। साइकोसिस एक गंभीर मानसिक विकार है, इसमें व्यक्ति वास्तविकता से संपर्क खो देता है। इस स्थिति में वह ऐसी चीजों को देखने, सुनने, महसूस करने या मानने लगता है, जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं।
यह एक मानसिक असंतुलन की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के विचार, धारणाएं और व्यवहार असामान्य हो जाते हैं। साइकोसिस के मरीज को नियमित उपचार की आवश्यकता होती है, अन्यथा उसके दुष्परिणाम घातक हो सकते हैं। मरीज खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि रोजा के मानपुर चचरी गांव में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से सीख लेते हुए हमें मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। केवल अपराधी को दंडित करना समाधान नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में इस स्थिति तक न पहुंचे।
बताया कि समाज और चिकित्सा विशेषज्ञों को मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना होगा। जहां मानसिक रोग से ग्रसित व्यक्ति को समय पर सहायता मिले और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि यदि परिवार या समाज को व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव दिखे, तो जल्द से जल्द मनोचिकित्सक से सलाह लें।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति हिंसक व्यवहार दिखा रहा है या आत्मघाती विचार कर रहा है, तो उसे तुरंत चिकित्सक के पास ले जाएं। व्यवहार खतरनाक हो रहा हो, तो उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराना आवश्यक हो सकता है।
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व्यक्ति अपने परिवार की हत्या क्यों कर सकता है ?
मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी के अनुसार, जब मनोविक्षिप्त गंभीर हो जाती है और व्यक्ति का इलाज नहीं होता, तो उसकी मानसिक स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। कुछ मामलों में, भ्रम और माया इतने तीव्र हो जाते हैं कि वे व्यक्ति को खतरनाक निर्णय लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
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मनोविक्षिप्त के प्रमुख लक्षण :
- भ्रम : व्यक्ति झूठे और असत्य विचारों पर दृढ़ विश्वास करता है, जैसे कि कोई उसे मारना चाहता है, उसके खिलाफ साजिश हो रही है या वह कोई विशेष शक्ति रखता है।
- माया : व्यक्ति ऐसी चीजें देखता, सुनता, महसूस करता है, जो वास्तविक रूप से मौजूद नहीं होतीं। जैसे किसी की आवाज सुनना, जिसे कोई और नहीं सुन सकता।
- अजीब व्यवहार : कभी-कभी व्यक्ति का व्यवहार हिंसक या आक्रामक हो सकता है।
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संभावित कारण :
- परानॉयड भ्रम : व्यक्ति को यह लग सकता है कि उसका परिवार उसके खिलाफ साजिश कर रहा है या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है। इस डर से वह पहले ही हमला कर सकता है।
- आदेशात्मक माया : व्यक्ति को ऐसे मतिभ्रम हो सकते हैं, जिसमें उसे आवाजें आदेश देती हैं कि वह अपने परिवार को नुकसान पहुंचाए। यह उसे मजबूर कर सकता है कि वह हिंसक कदम उठाए।
- अत्यधिक उत्तेजना : जब व्यक्ति की मानसिक स्थिति अनियंत्रित हो जाती है, तो वह आवेग में आकर घातक निर्णय ले सकता है।
- दवा या इलाज का अभाव : यदि व्यक्ति नियमित रूप से दवा नहीं ले रहा है या उसका उपचार बीच में छूट गया है, तो उसके लक्षण तीव्र हो सकते हैं और वह हिंसक हो सकता है।
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मानसिक बीमारी के कारण हुईं प्रमुख घटनाएं
- कुछ साल पहले शहर के कच्चा कटरा मोहल्ले में सूदखोर से परेशान एक दवा व्यापारी ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाया। अपनी पत्नी व बच्चों को फंदे से लटकाने के बाद फिर खुद लटक गया था।
- पिछले साल बंडा में एक महिला ने बच्चे के रोने पर गले में पड़ा धागा कसकर उसकी जान ले ली थी।
- रोजा के हथौड़ा गांव की महिला ने गुस्से में पति की हत्या कर उसका भेजा बाहर निकाल लिया था।
- चार साल पूर्व हथौड़ा गांव में एक बुजुर्ग ने अपनी पत्नी को कुल्हाड़ी से वार कर मार डाला था।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि बच्चों की हत्या करने वाला साइकोसिस यानी मनोविकृति की बीमारी से पीड़ित प्रतीत होता है। साइकोसिस एक गंभीर मानसिक विकार है, इसमें व्यक्ति वास्तविकता से संपर्क खो देता है। इस स्थिति में वह ऐसी चीजों को देखने, सुनने, महसूस करने या मानने लगता है, जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं।
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यह एक मानसिक असंतुलन की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के विचार, धारणाएं और व्यवहार असामान्य हो जाते हैं। साइकोसिस के मरीज को नियमित उपचार की आवश्यकता होती है, अन्यथा उसके दुष्परिणाम घातक हो सकते हैं। मरीज खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी ने बताया कि रोजा के मानपुर चचरी गांव में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से सीख लेते हुए हमें मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। केवल अपराधी को दंडित करना समाधान नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में इस स्थिति तक न पहुंचे।
बताया कि समाज और चिकित्सा विशेषज्ञों को मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना होगा। जहां मानसिक रोग से ग्रसित व्यक्ति को समय पर सहायता मिले और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि यदि परिवार या समाज को व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव दिखे, तो जल्द से जल्द मनोचिकित्सक से सलाह लें।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति हिंसक व्यवहार दिखा रहा है या आत्मघाती विचार कर रहा है, तो उसे तुरंत चिकित्सक के पास ले जाएं। व्यवहार खतरनाक हो रहा हो, तो उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराना आवश्यक हो सकता है।
व्यक्ति अपने परिवार की हत्या क्यों कर सकता है ?
मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव रस्तोगी के अनुसार, जब मनोविक्षिप्त गंभीर हो जाती है और व्यक्ति का इलाज नहीं होता, तो उसकी मानसिक स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। कुछ मामलों में, भ्रम और माया इतने तीव्र हो जाते हैं कि वे व्यक्ति को खतरनाक निर्णय लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
मनोविक्षिप्त के प्रमुख लक्षण :
- भ्रम : व्यक्ति झूठे और असत्य विचारों पर दृढ़ विश्वास करता है, जैसे कि कोई उसे मारना चाहता है, उसके खिलाफ साजिश हो रही है या वह कोई विशेष शक्ति रखता है।
- माया : व्यक्ति ऐसी चीजें देखता, सुनता, महसूस करता है, जो वास्तविक रूप से मौजूद नहीं होतीं। जैसे किसी की आवाज सुनना, जिसे कोई और नहीं सुन सकता।
- अजीब व्यवहार : कभी-कभी व्यक्ति का व्यवहार हिंसक या आक्रामक हो सकता है।
संभावित कारण :
- परानॉयड भ्रम : व्यक्ति को यह लग सकता है कि उसका परिवार उसके खिलाफ साजिश कर रहा है या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है। इस डर से वह पहले ही हमला कर सकता है।
- आदेशात्मक माया : व्यक्ति को ऐसे मतिभ्रम हो सकते हैं, जिसमें उसे आवाजें आदेश देती हैं कि वह अपने परिवार को नुकसान पहुंचाए। यह उसे मजबूर कर सकता है कि वह हिंसक कदम उठाए।
- अत्यधिक उत्तेजना : जब व्यक्ति की मानसिक स्थिति अनियंत्रित हो जाती है, तो वह आवेग में आकर घातक निर्णय ले सकता है।
- दवा या इलाज का अभाव : यदि व्यक्ति नियमित रूप से दवा नहीं ले रहा है या उसका उपचार बीच में छूट गया है, तो उसके लक्षण तीव्र हो सकते हैं और वह हिंसक हो सकता है।
मानसिक बीमारी के कारण हुईं प्रमुख घटनाएं
- कुछ साल पहले शहर के कच्चा कटरा मोहल्ले में सूदखोर से परेशान एक दवा व्यापारी ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाया। अपनी पत्नी व बच्चों को फंदे से लटकाने के बाद फिर खुद लटक गया था।
- पिछले साल बंडा में एक महिला ने बच्चे के रोने पर गले में पड़ा धागा कसकर उसकी जान ले ली थी।
- रोजा के हथौड़ा गांव की महिला ने गुस्से में पति की हत्या कर उसका भेजा बाहर निकाल लिया था।
- चार साल पूर्व हथौड़ा गांव में एक बुजुर्ग ने अपनी पत्नी को कुल्हाड़ी से वार कर मार डाला था।