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Shahjahanpur News: निजी स्कूलों में बारहवीं से महंगी नर्सरी की किताबें, अभिभावक मजबूर

Fri, 11 Apr 2025 12:45 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Fri, 11 Apr 2025 12:45 AM IST
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Private schools have made nursery books costlier than class XII books, parents helpless
रामजी अवस्थी। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। अप्रैल में नया सत्र शुरू होने के साथ ही किताबाें के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जाने लगा है। बारहवीं की पुस्तकें जहां 1500 से दो हजार में उपलब्ध हैं। वहीं, नर्सरी का कोर्स 3500 रुपये का मिल रहा है। निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के नाम पर अभिभावकों का शोषण हो रहा है और प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
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निजी स्कूलों में पूर्व में पहले विद्यालय से किताबों की बिक्री कर मनमानी की जाती थी। प्रशासन की सख्ती के बाद स्कूलों में किताबों की बिक्री बंद हो गई, लेकिन स्कूल संचालकों ने अपनी दुकान तय कर दीं। अब वहां पर अभिभावकों का कोर्स के नाम पर शोषण हो रहा है। कक्षा नौ से 12 तक एनसीईआरटी की पुस्तकें चलेगी। ये किताबें मात्र 15 सौ से दो हजार रुपये तक में उपलब्ध है। वहीं, नर्सरी से कक्षा आठ तक का कोर्स 35 सौ से नौ हजार रुपये तक उपलब्ध है। कुछ दिन पहले डीएम ने किताबों पर 20 प्रतिशत तक छूट देने के निर्देश पुस्तक विक्रेताओं को दिए थे। उसके बावजूद पुस्तक विक्रेता मनमाने दाम पर किताबों की बिक्री कर रहे हैं। डीआईओएस हरिवंश कुमार ने बताया कि पुस्तकों पर स्लिप लगाकर बिक्री का कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है।
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कक्षा के अनुसार इतना है किताबों का मूल्य
कक्षा रुपये

नर्सरी 3600
केजी 4500
यूकेजी 5000
कक्षा चार 6500
कक्षा सात 8000
कक्षा आठ 9000
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एनसीईआरटी की पुस्तकों में भी खेल
-एनसीईआरटी की किताबों की बिक्री में खेल किया जा रहा। सरकारी पुस्तक 65 से 70 रुपये और अधिकतम 160 रुपये की है। वहीं निजी प्रकाशकों की एक पुस्तक साढ़े चार सौ तक की है। एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ में तीन से चार किताबें स्कूल से खरीदने पर जोर देकर अभिभावकों के बजट पर सेंध लगाई जा रही है।
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प्रशासन की मनाही के बावजूद कुछ स्कूलों से किताबों बिक्री हो रहीं हैं। इसकी शिकायत प्रशासन से की जाएगी। स्कूल शिक्षा और समाजसेवा का साधन है। वहां पर व्यापार के अड्डे चल रहे हैं। पुस्तकों से लेकर यूनीफार्म तक तय स्थान से खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।

रामजी अवस्थी, अध्यक्ष, अभिभावक वेलफेयर एसोसिएशन
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-स्कूलों ने दो पुस्तक विक्रेताओं को तय किया। एक को डमी के रूप में रखा है। वहां से दूसरी दुकान पर भेजकर शोषण हो रहा। 20 प्रतिशत छूट नहीं मिल रही है। इसे लेकर डीआईओएस को कॉल कर सूचना दी। वहां से भी कुछ स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
मोईन सफदर, अभिभावक
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रामजी अवस्थी। स्रोत: स्वयं

रामजी अवस्थी। स्रोत: स्वयं

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