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डाकघर घोटाला : फोरेंसिक जांच के लिए भेजी आरोपियों की सीडीआर
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अल्हागंज। उप डाकघर में निवेशकर्ताओं की लाखों की रकम के बहुचर्चित घोटाले की जांच कर रही पुलिस ने आरोपियों की सीडीआर कब्जे में लेकर उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। खास यह है कि डाकघर में तीन वर्ष से घपले हो रहे थे, लेकिन विभागीय जांच निवर्तमान उप डाकपाल नवीन कुमार के सात माह के कार्यकाल तक केंद्रित रहने पर निवेशकर्ता सवाल खड़े कर रहे हैं।
विभाग स्तर पर मामले की जांच करने के बाद डाक निरीक्षक अमर पाल ने थाने में तहरीर देकर घोटाला प्रकाश में आने पर हटाए गए निवर्तमान उप डाकपाल के अलावा पोस्टमैन सूरज प्रकाश और उसके बेटे रितिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दर्ज रिपोर्ट में आरोपी उप डाकपाल नवीन के पूर्ववर्ती अधिकारी को शामिल नहीं किया गया, जबकि तमाम लोगों ने कई वर्ष पहले जमा की गई रकम में भी घोटाले की शिकायतें की थीं।
कस्बा निवासी संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने चार वर्ष पूर्व 2021 में एक लाख रुपये की एनएससी कराई थी, लेकिन वह जांच में फर्जी पाई गई। ऐसे अन्य तमाम लोग भी विभाग और पुलिस की जांच पर सवाल उठा रहे हैं। लोगो का यह भी आरोप है कि डाकघर आरोपी पोस्टमैन के घर स्थानांतरित होने के बाद से घोटाले होने लगे, लेकिन पुलिस जांच में इस तथ्य को नजरअंदाज किया जा रहा है। अल्हागंज के थाना प्रभारी ओम प्रकाश का कहना है कि विवेचना कर रहे उपनिरीक्षक नागेंद्र सिंह ने आरोपियों की सीडीआर फोरेंसिक जांच के लिए भेजी है। आरोपियों के मोबाइल नंबरों से उनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। घोटाले से प्रभावित अन्य उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे पासबुक लेकर थाने पहुंचें।
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अब तक 12 ऐसे उपभोक्ताओं के बयान दर्ज किए गए हैं, जिनकी पासबुकों पर हालिया छह माह की इंट्री दर्ज है। इससे पहले हुए घोटाले की छानबीन के लिए खातेदारों के बयान हाेने शेष हैं। जैसे ही उनके बयान दर्ज होंगे, तत्कालीन उपडाकपाल को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
-अमरपाल, डाक निरीक्षक
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विभाग स्तर पर मामले की जांच करने के बाद डाक निरीक्षक अमर पाल ने थाने में तहरीर देकर घोटाला प्रकाश में आने पर हटाए गए निवर्तमान उप डाकपाल के अलावा पोस्टमैन सूरज प्रकाश और उसके बेटे रितिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दर्ज रिपोर्ट में आरोपी उप डाकपाल नवीन के पूर्ववर्ती अधिकारी को शामिल नहीं किया गया, जबकि तमाम लोगों ने कई वर्ष पहले जमा की गई रकम में भी घोटाले की शिकायतें की थीं।
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कस्बा निवासी संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने चार वर्ष पूर्व 2021 में एक लाख रुपये की एनएससी कराई थी, लेकिन वह जांच में फर्जी पाई गई। ऐसे अन्य तमाम लोग भी विभाग और पुलिस की जांच पर सवाल उठा रहे हैं। लोगो का यह भी आरोप है कि डाकघर आरोपी पोस्टमैन के घर स्थानांतरित होने के बाद से घोटाले होने लगे, लेकिन पुलिस जांच में इस तथ्य को नजरअंदाज किया जा रहा है। अल्हागंज के थाना प्रभारी ओम प्रकाश का कहना है कि विवेचना कर रहे उपनिरीक्षक नागेंद्र सिंह ने आरोपियों की सीडीआर फोरेंसिक जांच के लिए भेजी है। आरोपियों के मोबाइल नंबरों से उनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। घोटाले से प्रभावित अन्य उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे पासबुक लेकर थाने पहुंचें।
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अब तक 12 ऐसे उपभोक्ताओं के बयान दर्ज किए गए हैं, जिनकी पासबुकों पर हालिया छह माह की इंट्री दर्ज है। इससे पहले हुए घोटाले की छानबीन के लिए खातेदारों के बयान हाेने शेष हैं। जैसे ही उनके बयान दर्ज होंगे, तत्कालीन उपडाकपाल को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
-अमरपाल, डाक निरीक्षक