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रोजा में प्रधानमंत्री की रैली, नजर जलालाबाद सीट पर
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रविवार को रोजा रेलवे ग्राउंड में प्रधानमंत्री की रैली की तैयारी चलती रही।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। 2017 में प्रचंड लहर के बावजूद जलालाबाद सीट पर जीत न हासिल कर पाने की कसक भाजपा को अब तक है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का बड़ा फोकस जलालाबाद सीट जीतने पर है। यही वजह है कि नौ नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा के बाद प्रधानमंत्री द्वारा गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कार्यक्रम जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र में रखा गया था। कोलाघाट पुल टूटने के कारण अब रोजा के रेलवे ग्राउंड में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम जरूर रखा गया है, लेकिन इस सीट पर नजर रहेगी।
पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से पांच पर भाजपा को जीत हासिल हुई थी। मगर जलालाबाद सीट हाथ से निकल गई थी। यहां पर भाजपा उम्मीदवार मनोज कश्यप को सपा के शरदवीर सिंह ने 9297 मतों से हरा दिया था। शरदवीर को 75326 जबकि मनोज कश्यप को 66029 वोट मिले थे। इससे पहले भी जलालाबाद में कभी कमल नहीं खिल सका था। अब तक जलालाबाद सीट भाजपा के लिए अजेय साबित हुई है। यही वजह है कि जलालाबाद सीट पर सबसे ज्यादा फोकस रहा है।
सीट से 20 से ज्यादा लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया हुआ है। पार्टी प्रत्याशी चयन में काफी सतर्कता बरत रही है। गंगा एक्सप्रेस-वे प्रमुख रूप से जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र से ही गुजर रहा है। यहां के लोगों को एक्सप्रेस-वे का सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है। ऐसे में एक्सप्रेस-वे को सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर क्षेत्र के लोगों को भाजपा से जोड़ने की कवायद चल रही है।
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पहले जलालाबाद क्षेत्र में प्रधानमंत्री की रैली आयोजित करने की तैयारी चल रही थी मगर 29 नवंबर को कोलाघाट पुल टूट गया। मिर्जापुर, कलान क्षेत्र के लोगों की परेशानी देखते हुए रैली स्थल रोजा में निर्धारित कर दिया। फिर भी उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री जलालाबाद सीट पर अपना फोकस रखेंगे।
यह है जलालाबाद सीट का इतिहास
1952 में कांग्रेस से रामगुलाम सिंह यादव, 1957 में सोशलिस्ट पार्टी से हरदयाल सिंह कुशवाहा, 1962 से कांग्रेस के ठाकुर केशव चंद्र सिंह, 1967 में जनसंघ से दल सिंह यादव, 1969 में कांग्रेस से ठा. केशव चंद्र सिंह, 1974 में जनसंघ से दल सिंह यादव, 1977 में निर्दलीय कन्हई सिंह कुशवाहा, 1980 और 84 में कांग्रेस से ठा. उदयवीर सिंह चौहान, 1989 में जनता दल से राममूर्ती सिंह वर्मा, 1991 में जनता दल से राममूर्ती सिंह वर्मा, 1993 में सपा से राममूर्ति सिंह वर्मा, 1996 में सपा से ठा. शरदवीर सिंह चौहान, 2002 में सपा से शरदवीर सिंह चौहान, 2007 में बसपा से नीरज मौर्य कुशवाहा, 2012 में बसपा से नीरज मौर्य कुशवाहा, 2017 में सपा से शरदवीर सिंह विधायक रहे।
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पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से पांच पर भाजपा को जीत हासिल हुई थी। मगर जलालाबाद सीट हाथ से निकल गई थी। यहां पर भाजपा उम्मीदवार मनोज कश्यप को सपा के शरदवीर सिंह ने 9297 मतों से हरा दिया था। शरदवीर को 75326 जबकि मनोज कश्यप को 66029 वोट मिले थे। इससे पहले भी जलालाबाद में कभी कमल नहीं खिल सका था। अब तक जलालाबाद सीट भाजपा के लिए अजेय साबित हुई है। यही वजह है कि जलालाबाद सीट पर सबसे ज्यादा फोकस रहा है।
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सीट से 20 से ज्यादा लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया हुआ है। पार्टी प्रत्याशी चयन में काफी सतर्कता बरत रही है। गंगा एक्सप्रेस-वे प्रमुख रूप से जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र से ही गुजर रहा है। यहां के लोगों को एक्सप्रेस-वे का सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है। ऐसे में एक्सप्रेस-वे को सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर क्षेत्र के लोगों को भाजपा से जोड़ने की कवायद चल रही है।
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पहले जलालाबाद क्षेत्र में प्रधानमंत्री की रैली आयोजित करने की तैयारी चल रही थी मगर 29 नवंबर को कोलाघाट पुल टूट गया। मिर्जापुर, कलान क्षेत्र के लोगों की परेशानी देखते हुए रैली स्थल रोजा में निर्धारित कर दिया। फिर भी उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री जलालाबाद सीट पर अपना फोकस रखेंगे।
यह है जलालाबाद सीट का इतिहास
1952 में कांग्रेस से रामगुलाम सिंह यादव, 1957 में सोशलिस्ट पार्टी से हरदयाल सिंह कुशवाहा, 1962 से कांग्रेस के ठाकुर केशव चंद्र सिंह, 1967 में जनसंघ से दल सिंह यादव, 1969 में कांग्रेस से ठा. केशव चंद्र सिंह, 1974 में जनसंघ से दल सिंह यादव, 1977 में निर्दलीय कन्हई सिंह कुशवाहा, 1980 और 84 में कांग्रेस से ठा. उदयवीर सिंह चौहान, 1989 में जनता दल से राममूर्ती सिंह वर्मा, 1991 में जनता दल से राममूर्ती सिंह वर्मा, 1993 में सपा से राममूर्ति सिंह वर्मा, 1996 में सपा से ठा. शरदवीर सिंह चौहान, 2002 में सपा से शरदवीर सिंह चौहान, 2007 में बसपा से नीरज मौर्य कुशवाहा, 2012 में बसपा से नीरज मौर्य कुशवाहा, 2017 में सपा से शरदवीर सिंह विधायक रहे।