गुस्साए लोगों ने कोतवाली घेरी तो लिखी अपहरण की रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोतवाली क्षेत्र के गांव गंगसरा से अपहृत युवक नवजोत सिंह का सुराग न लगने से गुस्साए घरवालों ने ग्रामीणों के साथ सोमवार को कोतवाली का घेराव कर हंगामा किया। उनका आरोप था कि पुलिस इस मामले में शुरू से ही लापरवाही बरत रही है। रिपोर्ट दर्ज करने में भी 24 घंटे लगा दिए गए। घटना के 12 घंटे बाद कोतवाली प्रभारी ने गांव पहुंचकर घटना के बारे में जानकारी लेने की औपचारिकता निभाई। मामले ने जब तूल पकड़ा तो सीओ डॉग स्क्वायड के साथ गांव पहुंचे। मालूम हो कि गांव गंगसरा निवासी उपजीत सिंह का 20 वर्षीय पुत्र नवजोत सिंह 19 अगस्त की रात साढ़े आठ बजे अपनी बहन से मोबाइल पर बात करते हुए घर से बाहर निकला तो गायब हो गया। बहन रविंदर कौर ने बताया कि फोन पर उसे कुछ लोगों की पकड़ो, पकड़ो की आवाज सुनाई दी। नवजोत उनसे छोड़ने की गुहार कर रहा था। इसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। उपजीत सिंह ने रात में ही पुलिस को सूचना दी, लेकिन कोतवाली प्रभारी हरीश राजपूत ने मामले को बेहद हलके में लिया। उन्होंने मौका मुआयना करने और वाहन चेकिंग कराने की भी जरूरत नहीं समझी। रविवार को उपजीत सिंह ने नौ लोगों के खिलाफ रंजिशन पुत्र का अपहरण करने की कोतवाली में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
इंस्पेक्टर हरीश राजपूत रविवार सुबह दस बजे गांव पहुंचे और घटना के बारे में जानकारी लेने की औपचारिकता निभाकर लौट आए। रिपोर्ट दर्ज न होने पर गुस्साए घरवालों ने गांव के लोगों के साथ रविवार देर रात कोतवाली पहुंचकर हंगामा किया तब कहीं पुलिस ने गांव के ही बाबूराम, उसके बेटे रमाकांत, बादाम सिंह, रामआसरे, बाबूराम के दामाद, वीरपाल, अमर सिंह, सतेंद्र और रंजीत के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की, लेकिन नवजोत की तलाश के लिए कुछ नहीं किया। सोमवार सुबह फिर नवजोत के घरवाले बड़ी संख्या में गांव वालों के साथ कोतवाली पहुंचे औैर पुलिस का घेराव कर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। लोगों के गुस्से को देखते हुए सीओ एमएस रावत पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और जांच श्ुारू की। जिला मुख्यालय से डॉग स्क्वॉयड भी बुला लिया गया लेकिन नवजोत का कोई सुराग नहीं लगा।