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Shahjahanpur News: शारीरिक विकारों से मुक्ति दिलाती है पोलेरिटी
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श्री रामचंद्र मिशन आश्रम में पोलेरिटी पर आयोजित कार्यशाला में मौजूद लोग। संवाद
- श्री रामचंद्र मिशन आश्रम में पोलेरिटी पर तीन दिवसीय कार्यशाला का हुआ शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। श्री रामचंद्र मिशन और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की ओर से पोलेरिटी (ध्रुवीयता) पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में सकारात्मक और नकारात्मक ध्रुवीयता के बारे में बताया गया। प्रशिक्षकों ने कहा कि पोलेरिटी से शारीरिक विकारों से मुक्ति मिलती है। श्री रामचंद्र मिशन आश्रम में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कान्हा शांतिवनम, हैदराबाद से आए प्रशिक्षक कश्यप भट्ट ने कहा कि ध्रुवीयता दो प्रकार की होती है। सकारात्मक और नकारात्मक। सकारात्मक संदर्भों में प्रकट होने वाली ध्रुवीयता को सकारात्मक ध्रुवीयता और नकारात्मक संदर्भों में प्रकट होता है तो वह नकारात्मक ध्रुवीयता है। हैदराबाद से ही आईं प्रशिक्षक कृपा मुकेश ने बताया कि ध्रुवीयता एक पद्धति है, जिससे हम अपने शरीर की प्राणमय ऊर्जा को संतुलित कर सकते हैं।
अलीगढ़ से आए प्रशिक्षक हेमंत कुमार ने कहा कि पोलेरिटी कोई थेरिपी, चिकित्सीय पद्धति या दवा का विकल्प नहीं है। इस प्राचीन पद्धति में प्राणमय कोष में जब ऊर्जा असंतुलित हो जाती है तो शरीर में सर्दी, जुकाम, माइग्रेन, अनिद्रा, डिप्रेशन, नसों में ब्लॉकेज, चिड़चिड़ापन, गुस्सा जैसे विकार उत्पन्न हो जाते। इस पद्धति के अभ्यास से इन विकारों पर जल्द काबू पाया जा सकता है। हैदराबाद से माधवी, प्रयागराज से डॉ. अनुराधा अग्रवाल, कानपुर के निरंकार सिंह, गोला के संतोष कुमार सेठ, नीलम सेठ, पूनम जायसवाल आदि ने कार्यशाला में करीब 600 लोगों को पोलेरिटी पर प्रशिक्षण प्रदान किया। आश्रम प्रबंधक दीपक त्यागी, सुयश सिन्हा, अजीत कुमार, कृष्णा भारद्वाज, सुरेंद्र सिन्हा, लक्ष्य बाधवानी, पंकज कुमार, संजीव मौर्य, ब्रह्मा शंकर शर्मा, प्रवीण वाजपेयी, रामजी गुप्ता, ललिता त्यागी, रंजना,प्रतिमा, मन्मत्य मिश्रा आदि का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। श्री रामचंद्र मिशन और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट की ओर से पोलेरिटी (ध्रुवीयता) पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में सकारात्मक और नकारात्मक ध्रुवीयता के बारे में बताया गया। प्रशिक्षकों ने कहा कि पोलेरिटी से शारीरिक विकारों से मुक्ति मिलती है। श्री रामचंद्र मिशन आश्रम में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कान्हा शांतिवनम, हैदराबाद से आए प्रशिक्षक कश्यप भट्ट ने कहा कि ध्रुवीयता दो प्रकार की होती है। सकारात्मक और नकारात्मक। सकारात्मक संदर्भों में प्रकट होने वाली ध्रुवीयता को सकारात्मक ध्रुवीयता और नकारात्मक संदर्भों में प्रकट होता है तो वह नकारात्मक ध्रुवीयता है। हैदराबाद से ही आईं प्रशिक्षक कृपा मुकेश ने बताया कि ध्रुवीयता एक पद्धति है, जिससे हम अपने शरीर की प्राणमय ऊर्जा को संतुलित कर सकते हैं।
अलीगढ़ से आए प्रशिक्षक हेमंत कुमार ने कहा कि पोलेरिटी कोई थेरिपी, चिकित्सीय पद्धति या दवा का विकल्प नहीं है। इस प्राचीन पद्धति में प्राणमय कोष में जब ऊर्जा असंतुलित हो जाती है तो शरीर में सर्दी, जुकाम, माइग्रेन, अनिद्रा, डिप्रेशन, नसों में ब्लॉकेज, चिड़चिड़ापन, गुस्सा जैसे विकार उत्पन्न हो जाते। इस पद्धति के अभ्यास से इन विकारों पर जल्द काबू पाया जा सकता है। हैदराबाद से माधवी, प्रयागराज से डॉ. अनुराधा अग्रवाल, कानपुर के निरंकार सिंह, गोला के संतोष कुमार सेठ, नीलम सेठ, पूनम जायसवाल आदि ने कार्यशाला में करीब 600 लोगों को पोलेरिटी पर प्रशिक्षण प्रदान किया। आश्रम प्रबंधक दीपक त्यागी, सुयश सिन्हा, अजीत कुमार, कृष्णा भारद्वाज, सुरेंद्र सिन्हा, लक्ष्य बाधवानी, पंकज कुमार, संजीव मौर्य, ब्रह्मा शंकर शर्मा, प्रवीण वाजपेयी, रामजी गुप्ता, ललिता त्यागी, रंजना,प्रतिमा, मन्मत्य मिश्रा आदि का सहयोग रहा।
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