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उपेक्षाः धन्वंतरि वाटिका को ‘उपचार’ की दरकार
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर स्थापित धन्वंतरी वाटिका में पड़ा कूड़ा,
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर लगाई गई धन्वंतरि वाटिका को अब ‘उपचार’ की दरकार है। अनदेखी के चलते हाल यह है कि यहां लगाए गए औषधीय पेड़ सूख गए और झाड़ियां उग आई हैं। कूड़ा तथा मल पड़ा होने के चलते दुर्गंध आने की वजह से वाटिका में जाना भी मुहाल हो गया है।
वर्ष 2018 में राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर तत्कालीन डीएफओ गोपाल ओझा एवं जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी के प्रयासों से धन्वंतरि वाटिका की लगाई गई थी। वाटिका में आंवला, सीता अशोक, नीम, अर्जुन, बेल, जामुन, मौलश्री, मीठी नीम, कचनार अमलताश, निर्गुंडी, अडूसा, हरसिंगार, गुड़हल, गुलाब, पपीता, गिलोय, शतावरी, तुलसी, नागर मोथा, अदरक, हल्दी, केला, अश्वगंधा, घृतकुमारी, ब्राह्मी, भुंई आंवला, पुनर्नवा, हरण, बहेड़ा सहित 30 प्रजातियों के दो-दो पौधे गए थे।
वाटिका में प्रत्येक पौधे के आगे उसका नाम और औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से शिलापट भी लगाए थे। वाटिका को राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर लगाने का उद्देश्य लोगों में पेड़ों के माध्यम से आयुर्वेद उपचार के लिए प्रेरित करना था। अभी तीन वर्ष भी नहीं हुए कि वाटिका अस्तित्व विहीन हो गई। वाटिका में लगे सभी पेड़ सूखकर उखड़ गए हैं। इसमें कूड़ा और मल डाला जा रहा है। वाटिका का बोर्ड उखड़ कर वाटिका के अंदर जंक खा रहा है। पूरी वाटिका में झाड़ियां उग आई हैं। बाउंड्री वॉल एक तरफ से टूट गई है, जिसमें अराजकतत्व बैठे रहते हैं। वाटिका की दुर्दशा देख पौधरोपण अभियान की हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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50 मीटर की दूरी पर है
वन विभाग कार्यालय
वाटिका से वन क्षेत्राधिकारी सदर एवं प्रभागीय निदेशक वन विभाग कार्यालय की दूरी महज 50 मीटर ही है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने वाटिका की सुध नहीं ली। पौधे सूख कर अस्तित्व विहीन हो गए। वाटिका पर लगा बोर्ड भी तोड़कर फेंक दिया, पर कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
वाटिका की स्थापना राजकीय मेडिकल कॉलेज की भूमि पर की गई थी। इसके संरक्षण की संपूर्ण जिम्मेदारी राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन की है। कॉलेज प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वन विभाग की जिम्मेदारी वाटिका के स्थापना तक थी। कॉलेज प्रशासन से इस संबंध में वार्ता की जाएगी।
- आदर्श कुमार, डीएफओ शाहजहांपुर।
वाटिका की स्थापना के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। अब तक जानकारी में आया था कि नगर निगम के द्वारा कार्य किया जाना है। यदि मेडिकल कॉलेज को वाटिका के संरक्षण की जिम्मेदारी मिली हुई है तो दोबारा से इसे वन विभाग के सहयोग से पुनर्जीवित किया जाएगा।
डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर।
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वर्ष 2018 में राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर तत्कालीन डीएफओ गोपाल ओझा एवं जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी के प्रयासों से धन्वंतरि वाटिका की लगाई गई थी। वाटिका में आंवला, सीता अशोक, नीम, अर्जुन, बेल, जामुन, मौलश्री, मीठी नीम, कचनार अमलताश, निर्गुंडी, अडूसा, हरसिंगार, गुड़हल, गुलाब, पपीता, गिलोय, शतावरी, तुलसी, नागर मोथा, अदरक, हल्दी, केला, अश्वगंधा, घृतकुमारी, ब्राह्मी, भुंई आंवला, पुनर्नवा, हरण, बहेड़ा सहित 30 प्रजातियों के दो-दो पौधे गए थे।
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वाटिका में प्रत्येक पौधे के आगे उसका नाम और औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से शिलापट भी लगाए थे। वाटिका को राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर लगाने का उद्देश्य लोगों में पेड़ों के माध्यम से आयुर्वेद उपचार के लिए प्रेरित करना था। अभी तीन वर्ष भी नहीं हुए कि वाटिका अस्तित्व विहीन हो गई। वाटिका में लगे सभी पेड़ सूखकर उखड़ गए हैं। इसमें कूड़ा और मल डाला जा रहा है। वाटिका का बोर्ड उखड़ कर वाटिका के अंदर जंक खा रहा है। पूरी वाटिका में झाड़ियां उग आई हैं। बाउंड्री वॉल एक तरफ से टूट गई है, जिसमें अराजकतत्व बैठे रहते हैं। वाटिका की दुर्दशा देख पौधरोपण अभियान की हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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50 मीटर की दूरी पर है
वन विभाग कार्यालय
वाटिका से वन क्षेत्राधिकारी सदर एवं प्रभागीय निदेशक वन विभाग कार्यालय की दूरी महज 50 मीटर ही है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने वाटिका की सुध नहीं ली। पौधे सूख कर अस्तित्व विहीन हो गए। वाटिका पर लगा बोर्ड भी तोड़कर फेंक दिया, पर कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
वाटिका की स्थापना राजकीय मेडिकल कॉलेज की भूमि पर की गई थी। इसके संरक्षण की संपूर्ण जिम्मेदारी राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन की है। कॉलेज प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वन विभाग की जिम्मेदारी वाटिका के स्थापना तक थी। कॉलेज प्रशासन से इस संबंध में वार्ता की जाएगी।
- आदर्श कुमार, डीएफओ शाहजहांपुर।
वाटिका की स्थापना के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। अब तक जानकारी में आया था कि नगर निगम के द्वारा कार्य किया जाना है। यदि मेडिकल कॉलेज को वाटिका के संरक्षण की जिम्मेदारी मिली हुई है तो दोबारा से इसे वन विभाग के सहयोग से पुनर्जीवित किया जाएगा।
डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर।