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Shahjahanpur News: दूसरे दिन 12 जेसीबी से हुई भैंसी नदी में खोदाई
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पुवायां क्षेत्र में नदी की खोदाई करती जेसीबी। संवाद
पुवायां। भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत शुक्रवार को दूसरे दिन 12 जेसीबी नदी की खोदाई के काम में लगाई गईं। आठ जेसीबी पुवायां और चार जेसीबी बंडा क्षेत्र में खोदाई में लगाई गईं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक नदी के पुनर्जीवन के लिए कार्य कराने के आदेश दिए हैं। इसके तहत शाहजहांपुर में भैंसी नदी के पुनर्जीवन का अभियान चल रहा है। नदी के पुराने स्वरूप को वापस लाने के लिए 12 जून से खोदाई कार्य चल रहा है। खोदाई के बाद चेक डैम का निर्माण होना है और नदी के दोनों किनारों पर पौधरोपण कराया जाएगा।
बंडा के बीडीओ सर्वेश कुमार ने बताया कि बंडा क्षेत्र में रामदेवरी और लुहिची में दूसरे दिन चार जेसीबी खोदाई में लगीं। बंडा क्षेत्र में ढाई किमी तक खोदाई कार्य हो गया है। पुवायां में पन्नघाट, झरसा, करनापुर, मदारपुर में एक-एक और मीरपुर गंगाई, बरौना में दो-दो जेसीबी से खोदाई कार्य किया गया।
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कुल आठ जेसीबी खोदाई में लगाई गई थीं, एक जेसीबी और बुलाई गई थी लेकिन वह खराब हो गई। खोदाई के दौरान लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक भी जुटे रहे। लोकभारती से जुड़े लोग और अन्य स्वयंसेवक भी मौजूद रहे।
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खोदाई में जमीन से निकला ठठेेेरा पक्षी
गांव करनापुर के पास खोदाई के दौरान ठठेरा पक्षी का बच्चा निकला। छोटा होने के कारण यह उड़ नहीं पा रहा था। लोगों ने बताया कि हरे रंग का यह पक्षी कम देखने को मिलता है। कुछ बुजुर्गों ने पक्षी को वसंता पक्षी बताया। ठुकठुक की आवाज निकालने के कारण इसे ठठेरा पक्षी कहा जाता है। रेंजर ने बताया कि अंग्रेजी में इसे कॉपरस्मिथ बारवेट के नाम से जाना जाता है। वसंत ऋतु में लाल सुनहरे सिर, पीली गर्दन और हरे रंग का ये पक्षी सक्रिय हो जाता है। इस कारण पक्षी को बसंता कहा जाता है। ये पक्षी पेड़ की खोह, झाड़ियों में रहते हैं।
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मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक नदी के पुनर्जीवन के लिए कार्य कराने के आदेश दिए हैं। इसके तहत शाहजहांपुर में भैंसी नदी के पुनर्जीवन का अभियान चल रहा है। नदी के पुराने स्वरूप को वापस लाने के लिए 12 जून से खोदाई कार्य चल रहा है। खोदाई के बाद चेक डैम का निर्माण होना है और नदी के दोनों किनारों पर पौधरोपण कराया जाएगा।
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बंडा के बीडीओ सर्वेश कुमार ने बताया कि बंडा क्षेत्र में रामदेवरी और लुहिची में दूसरे दिन चार जेसीबी खोदाई में लगीं। बंडा क्षेत्र में ढाई किमी तक खोदाई कार्य हो गया है। पुवायां में पन्नघाट, झरसा, करनापुर, मदारपुर में एक-एक और मीरपुर गंगाई, बरौना में दो-दो जेसीबी से खोदाई कार्य किया गया।
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कुल आठ जेसीबी खोदाई में लगाई गई थीं, एक जेसीबी और बुलाई गई थी लेकिन वह खराब हो गई। खोदाई के दौरान लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक भी जुटे रहे। लोकभारती से जुड़े लोग और अन्य स्वयंसेवक भी मौजूद रहे।
खोदाई में जमीन से निकला ठठेेेरा पक्षी
गांव करनापुर के पास खोदाई के दौरान ठठेरा पक्षी का बच्चा निकला। छोटा होने के कारण यह उड़ नहीं पा रहा था। लोगों ने बताया कि हरे रंग का यह पक्षी कम देखने को मिलता है। कुछ बुजुर्गों ने पक्षी को वसंता पक्षी बताया। ठुकठुक की आवाज निकालने के कारण इसे ठठेरा पक्षी कहा जाता है। रेंजर ने बताया कि अंग्रेजी में इसे कॉपरस्मिथ बारवेट के नाम से जाना जाता है। वसंत ऋतु में लाल सुनहरे सिर, पीली गर्दन और हरे रंग का ये पक्षी सक्रिय हो जाता है। इस कारण पक्षी को बसंता कहा जाता है। ये पक्षी पेड़ की खोह, झाड़ियों में रहते हैं।

पुवायां क्षेत्र में नदी की खोदाई करती जेसीबी। संवाद