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Shahjahanpur News: आजादी की लड़ाई भी की साक्षी रही है ओसीएफ

Fri, 15 Aug 2025 01:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 Aug 2025 01:35 AM IST
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OCF has also been a witness to the freedom struggle
शाहजहांपुर में स्थापित आर्डनेंस क्लोदिंग फैक्टरी। संवाद
शाहजहांपुर। कैंट क्षेत्र में स्थित आर्डनेंस क्लोदिंग फैक्टरी न सिर्फ देश की सेना को उच्च गुणवत्ता के कपड़े उपलब्ध कराती है बल्कि इसका गौरवशाली इतिहास भी रहा है। अंग्रेजी हुकूमत ने इसकी स्थापना की थी।
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इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि शाहजहांपुर शहर में आजादी की लड़ाई की साक्षी अनेक इतिहास प्रसिद्ध इमारतें और संस्थान हैं। इन्हीं में से एक है कैंट क्षेत्र में स्थित आर्डनेंस क्लोदिंग फैक्टरी।
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नवंबर 1801 में जब रुहेलखंड को अंग्रेजों ने अवध दरबार से छीन कर ब्रिटिश भारत में मिला लिया, तब किलेनुमा इमारत बनाकर उसका नामकरण शाहजहांपुर गैरिसन के रूप में किया गया। इसकी पूर्व दिशा में अंग्रेजों ने जिला जेल बनाई। वर्ष 1858 में क्रांति के समय प्रख्यात मौलवी अहमद उल्लाह शाह ने इसी का घेरा डालकर नौ दिन तक तोप से गोले बरसाए थे।
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यहां एक तोपखाना और ब्रिटिश इंफेंट्री की छह रेजीमेंट तैनात थीं। वर्ष 1901 में शाहजहांपुर गैरीसन से तोपखाना हटा लिया गया। यहां की वर्तमान क्लोदिंग फैक्टरी अपने मूल स्वरूप में अलीपुर में वर्ष 1879 में स्थापित हुई। यह फैक्टरी बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एश्ले ईडन द्वारा स्थापित की गई थी।
देश में ऐसी कुल तीन फैक्ट्रियां मुंबई, अलीपुर तथा मद्रास में बनीं थीं। वर्ष 1914 में अलीपुर फैक्टरी का कुछ हिस्सा एक साल के ट्रायल पर ब्रिटिश भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए शाहजहांपुर लाया गया। वर्ष 1927 में इसका विलय रक्षा मंत्रालय से कर इसके नाम के आगे आर्डनेंस शब्द लगा दिया गया। उस साल इसमें मात्र 127 कर्मचारी थे जो चीन युद्ध के समय सन 1962 तक 13 हजार तक पहुंच गए।

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यहां कभी बनता था राष्ट्रीय ध्वज
डॉ. विकास खुराना ने बताया कि इस फैक्टरी में आजाद भारत की सेना के लिए कंबल, जैकेट, मोजे, जर्सी, ड्रेस इत्यादि बनते रहे। राष्ट्रीय ध्वज भी अनेक वर्षों तक बनता रहा। फैक्टरी का स्टेट 125.5 हेक्टेयर तथा परिसर 20.2 हेक्टेयर तक फैला है। इस फैक्टरी ने शाहजहांपुर के जीवन स्तर को उठाने में बहुत मदद की। फैक्टरी का अपना क्लब, स्टेडियम, स्कूल, स्पोर्ट्स ग्राउंड है। इसके अनेक कर्मचारियों ने खेल जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्ष 1921 में फैक्टरी के निगमीकरण के बाद इसे व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है और अब इसके उत्पाद आम जन के लिए भी उपलब्ध हैं।
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