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Shahjahanpur News: अब एक जिला-एक उत्पाद में शामिल होगा होजरी
Thu, 29 Feb 2024 02:03 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 29 Feb 2024 02:03 AM IST
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अरुण पांडेय। सहायक विकास अधिकारी। संवाद
शाहजहांपुर। जिले की पहचान जरी-जरदोजी के कारीगराें की कमी होने की वजह से हौजरी को एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे रोजगार के लिए दिल्ली न जाकर कारीगर यहीं व्यापार कर सकेंगे। इसके लिए सरकार उन्हें ऋण देगी।
पूर्व में जरी-जरदोजी का काम गांव से लेकर शहर तक कारखानों और घरों में होता था। बड़े पैमाने पर कारीगर इससे जुड़े थे, लेकिन अधिक मेहनताना नहीं मिलने पर कुशल शिल्पकारों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। कारीगरों के दूसरे रोजगार कर लेने की वजह से जरी-जरदोजी के काम करने वाले अब गिनती के रह गए हैं। इस वजह से शासन से वर्ष 2022-23 में उद्योग केंद्र को मात्र 24 लोगों को 72 लाख रुपये का अनुदान देने का लक्ष्य रखा था। लगातार कम होते लक्ष्य को देखते हुए ओडीओपी में हौजरी को शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया। उद्योग केंद्र के सहायक विकास अधिकारी अरुण पांडेय बताते हैं कि प्रस्ताव पर मुहर लगने से जनपद के टेलरों को रोजगार मिल सकेगा। ओडीओपी के तहत लाभ लेकर वह अपना रोजगार स्थापित कर सकेंगे।
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इनपुट
-24 को ओडीओपी में वर्ष 2022-23 में लाभ देने का लक्ष्य शासन से आया था।
-72 लाख रुपये का अनुदान देने की थी तैयारी।
-37 कारीगरों को ओडीओपी के तहत लाभ दिलाया गया।
-84.10 लाख रुपये के अनुदान का लाभ दिया।
-70 लोगों ने लाभ पाने के लिए आवेदन किया था।
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ओडीओपी के यह हैं मानक
-शैक्षणिक प्रमाण पत्र की अनिवार्यता नहीं।
-18 वर्ष से ऊपर का व्यक्ति लाभ प्राप्त कर सकता है।
-2 करोड़ के ऋण पर 20 लाख का मिलता है अनुदान।
-पूंजीगत व्यय में कोई नियम लागू नहीं होता।
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तिलहर, खुदागंज के साथ शहर में भी होता है काम
-जिले में ओसीएफ फैक्टरी होने की वजह से बड़े पैमाने पर लोग सिलाई के काम से जुड़े हुए हैं, क्योंकि फैक्टरी में भर्तियां बंद हैं। इसके चलते बड़े पैमाने पर कारीगर बेरोजगार घूम रहे हैं। रोजी-रोटी के लिए वह दिल्ली का रुख करते हैं। इसके अतिरिक्त तिलहर, खुदागंज व शहरी क्षेत्र में हौजरी का कारोबार होता है, लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों को लाभ नहीं मिल पाता। ओडीओपी में शामिल होने से लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिलने से स्वरोजगार खड़ा कर सकेंगे।
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फोटो नंबर 35
-जरी-जरदोजी का काम करने वाले काफी कम रह गए। इसके चलते ओडीओपी में हौजरी को शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। उस पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना है।
अरुण पांडेय, सहायक विकास अधिकारी, जिला उद्योग केंद्र।
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पूर्व में जरी-जरदोजी का काम गांव से लेकर शहर तक कारखानों और घरों में होता था। बड़े पैमाने पर कारीगर इससे जुड़े थे, लेकिन अधिक मेहनताना नहीं मिलने पर कुशल शिल्पकारों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। कारीगरों के दूसरे रोजगार कर लेने की वजह से जरी-जरदोजी के काम करने वाले अब गिनती के रह गए हैं। इस वजह से शासन से वर्ष 2022-23 में उद्योग केंद्र को मात्र 24 लोगों को 72 लाख रुपये का अनुदान देने का लक्ष्य रखा था। लगातार कम होते लक्ष्य को देखते हुए ओडीओपी में हौजरी को शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया। उद्योग केंद्र के सहायक विकास अधिकारी अरुण पांडेय बताते हैं कि प्रस्ताव पर मुहर लगने से जनपद के टेलरों को रोजगार मिल सकेगा। ओडीओपी के तहत लाभ लेकर वह अपना रोजगार स्थापित कर सकेंगे।
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इनपुट
-24 को ओडीओपी में वर्ष 2022-23 में लाभ देने का लक्ष्य शासन से आया था।
-72 लाख रुपये का अनुदान देने की थी तैयारी।
-37 कारीगरों को ओडीओपी के तहत लाभ दिलाया गया।
-84.10 लाख रुपये के अनुदान का लाभ दिया।
-70 लोगों ने लाभ पाने के लिए आवेदन किया था।
ओडीओपी के यह हैं मानक
-शैक्षणिक प्रमाण पत्र की अनिवार्यता नहीं।
-18 वर्ष से ऊपर का व्यक्ति लाभ प्राप्त कर सकता है।
-2 करोड़ के ऋण पर 20 लाख का मिलता है अनुदान।
-पूंजीगत व्यय में कोई नियम लागू नहीं होता।
तिलहर, खुदागंज के साथ शहर में भी होता है काम
-जिले में ओसीएफ फैक्टरी होने की वजह से बड़े पैमाने पर लोग सिलाई के काम से जुड़े हुए हैं, क्योंकि फैक्टरी में भर्तियां बंद हैं। इसके चलते बड़े पैमाने पर कारीगर बेरोजगार घूम रहे हैं। रोजी-रोटी के लिए वह दिल्ली का रुख करते हैं। इसके अतिरिक्त तिलहर, खुदागंज व शहरी क्षेत्र में हौजरी का कारोबार होता है, लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों को लाभ नहीं मिल पाता। ओडीओपी में शामिल होने से लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिलने से स्वरोजगार खड़ा कर सकेंगे।
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-जरी-जरदोजी का काम करने वाले काफी कम रह गए। इसके चलते ओडीओपी में हौजरी को शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। उस पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना है।
अरुण पांडेय, सहायक विकास अधिकारी, जिला उद्योग केंद्र।