उम्मीदों का अस्पताल और दवा, डॉक्टर नदारद
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कहने को तो जिला अस्पताल में इमरजेंसी से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक की सुविधा है, लेकिन उम्मीदों के इस अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैैं। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को घंटों लाइन में लगना होता है। इमरजेंसी से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक अव्यवस्थाओं का बोल बाला है। किल्लत सिर्फ दवाओं की नहीं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी है। जिला अस्पताल में 23 डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि यहां 32 डॉक्टर होने चाहिए। काम चलाने के लिए पैथालॉजी, ब्लड बैंक के साथ स्टाफ नर्स के पदों को भी आउट सोर्सिंग के जरिए संविदा पर भरा गया है। ट्रॉमा सेंटर युक्त 300 बेड के अस्पताल में सिर्फ एक जनरल सर्जन की तैनाती है। ट्रॉमा सेंटर होने के बावजूद कई बार लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। जीएसटी की वजह से दवाओं की खरीद में देरी से अस्पताल में कई प्रकार की दवाओं की किल्लत भी बनी हुई है।
डेढ़ करोड़ की मशीन प्लास्टर फिर भी मैन्युअल
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से मशीन लगाई गई थी। कुछ दिन चलने के बाद मशीन बंद हो गई। अब यहां प्लास्टर मैन्युअल हो रहे हैं। मशीन के जरिए हड्डी जोड़ने के साथ जटिल से जटिल प्लास्टर भी आसानी से हो जाया करते थे।