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Shahjahanpur News: नरसी का भात प्रसंग का वर्णन, भजनों पर थिरक उठीं महिलाएं
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मुमुक्षु आश्रम परिसर में कथा सुनाते कथाव्यास विजय कौशल। स्रोत: आयोजक
शाहजहांपुर। मुमुक्षु आश्रम परिसर में श्रीराम कथा के तीसरे दिन पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर हो उठा। कथाव्यास संत विजय कौशल ने नरसी का भात प्रसंग का हृदयस्पर्शी वर्णन किया। इस बीच भजनों की रसधार पर महिलाओं ने नृत्य किया।
बृहस्पतिवार को कथाव्यास विजय कौशल ने कहा कि कृष्णभक्त नरसी मेहता अत्यंत दरिद्र थे और अपनी बेटी नानीबाई का भात भरने में असमर्थ थे। नानीबाई के ससुराल वालों ने बहुत लंबी सूची भेजी थी। जब उनकी पुत्री के ससुराल पक्ष में भात देने का अवसर आया, तब समाज के सामने उनकी गरीबी उपहास का कारण बन गई।
लोग ताने कसने लगे कि निर्धन नरसी अपनी पुत्री की लाज कैसे रख पाएंगे। कथाव्यास ने उस दृश्य का जीवंत चित्र खींचते हुए भावपूर्ण स्वर में कहा कि जब संसार साथ छोड़ देता है, तब सच्चा भक्त अपने आराध्य के चरणों पर सिर रख देता है। नरसी ने भी यही किया।
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उन्होंने पूरी निष्ठा से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। नरसी की अटूट भक्ति से विवश होकर श्रीकृष्ण स्वयं एक धनी सेठ के रूप में आए और अद्भुत मायरा भरा। कथा व्यास ने देवर्षि नारद एवं भगवान विष्णु की कथा का प्रसंग भी सुनाया। इस बीच पूजन, आरती व प्रसाद वितरण किया गया। तीसरे दिन के मुख्य यजमान डॉ केके शुक्ला, मधुरानी शुक्ला थे।
इस मौके पर संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद, महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद, अनंत श्रीस्वामी सर्वेश्वरानंद, अनंत श्रीस्वामी अभेदानंद, स्वामी गंगेश्वरानंद, राजीव कृष्ण अग्रवाल, एबी सिंह, अशोक अग्रवाल, रुद्रपुर से आए विष्णु बंसल, राजेंद्र गोयल आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को कथाव्यास विजय कौशल ने कहा कि कृष्णभक्त नरसी मेहता अत्यंत दरिद्र थे और अपनी बेटी नानीबाई का भात भरने में असमर्थ थे। नानीबाई के ससुराल वालों ने बहुत लंबी सूची भेजी थी। जब उनकी पुत्री के ससुराल पक्ष में भात देने का अवसर आया, तब समाज के सामने उनकी गरीबी उपहास का कारण बन गई।
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लोग ताने कसने लगे कि निर्धन नरसी अपनी पुत्री की लाज कैसे रख पाएंगे। कथाव्यास ने उस दृश्य का जीवंत चित्र खींचते हुए भावपूर्ण स्वर में कहा कि जब संसार साथ छोड़ देता है, तब सच्चा भक्त अपने आराध्य के चरणों पर सिर रख देता है। नरसी ने भी यही किया।
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उन्होंने पूरी निष्ठा से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। नरसी की अटूट भक्ति से विवश होकर श्रीकृष्ण स्वयं एक धनी सेठ के रूप में आए और अद्भुत मायरा भरा। कथा व्यास ने देवर्षि नारद एवं भगवान विष्णु की कथा का प्रसंग भी सुनाया। इस बीच पूजन, आरती व प्रसाद वितरण किया गया। तीसरे दिन के मुख्य यजमान डॉ केके शुक्ला, मधुरानी शुक्ला थे।
इस मौके पर संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद, महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद, अनंत श्रीस्वामी सर्वेश्वरानंद, अनंत श्रीस्वामी अभेदानंद, स्वामी गंगेश्वरानंद, राजीव कृष्ण अग्रवाल, एबी सिंह, अशोक अग्रवाल, रुद्रपुर से आए विष्णु बंसल, राजेंद्र गोयल आदि मौजूद रहे।

मुमुक्षु आश्रम परिसर में कथा सुनाते कथाव्यास विजय कौशल। स्रोत: आयोजक