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तहबाजारी के ठेके से शुरू हुई थी खूनी जंग
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ठेकेदार की हत्या का मामला
राकेश के पीछे पीछे आए हत्यारे, मार कर निकल गए
शाहजहांपुर। ठेकेदारी को लेकर गिरंद यादव के परिवार और विरोधियों के बीच शुरू हुआ खूनी खेल जारी है। सोमवार दोपहर गिरंद यादव के बेटे और पीडब्ल्यूडी ठेकेदार राकेश यादव की खुलेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मर्डर की स्क्रिप्ट पहले तैयार कर ली गई थी। अंजाम केवल सोमवार को दिया गया। राकेश यादव के पीडब्ल्यूडी दफ्तर में पहुंचे कुछ ही मिनट गुजरे होंगे। पीछे से कातिल बाइक पर जा धमके और राकेश यादव पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। यानी कातिलों को राकेश के वहां जाने की जानकारी पहले से रही होगी या उनका मुखबिर मौके पर पहले से मौजूद होगा। घटनास्थल और आसपास लोगों के मौजूद होने के बावजूद हत्यारे साफ बचकर निकल गए।
तहबाजारी के ठेके को लेकर गिरंद यादव पक्ष की रंजिश करीब दो दशक पहले शुरू हुई थी। उस दौरान गिरंद यादव के भाई पर जानलेवा हमला हुआ था। मगर ठेकेदारी में उनका वर्चस्व बढ़ता चला गया। नगर पालिका के बाद कैंट बोर्ड और पीडब्ल्यूडी की ठेकेदारी शुरू कर दी। शहर में साइकिल स्टैंड के अधिकतर ठेके गिरंद यादव के बेटे राकेश यादव के पास हैं। पीडब्ल्यूडी के ठेकों में भी उनका दबदबा चलता था। इससे उनके विरोधी खासे परेशान थे। पिता के नक्शे कदम पर राकेश यादव चलते थे। वह बेवजह किसी से दबते नहीं थे। वर्चस्व को लेकर ही गिरंद और उनके बेटे राकेश यादव की दुश्मनी बढ़ती चली गई। राकेश की हत्या के पीछे भी ठेकेदारी मानी जा रही है, जिसको लेकर पुलिस ने काम भी शुरू कर दिया है। पुलिस ने कुछ ठेकेदारों और पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। पुलिस को कुछ सुराग भी मिले हैं, जिन पर काम शुरू कर दिया है।
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राकेश के पीछे पीछे आए हत्यारे, मार कर निकल गए
पूरी योजना बनाकर दिया गया वारदात को अंजाम, नई उम्र के बताए जाते हैं कातिल, लाल जैकेट पहनकर पहुंचे थे
शाहजहांपुर। ठेकेदारी को लेकर गिरंद यादव के परिवार और विरोधियों के बीच शुरू हुआ खूनी खेल जारी है। सोमवार दोपहर गिरंद यादव के बेटे और पीडब्ल्यूडी ठेकेदार राकेश यादव की खुलेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मर्डर की स्क्रिप्ट पहले तैयार कर ली गई थी। अंजाम केवल सोमवार को दिया गया। राकेश यादव के पीडब्ल्यूडी दफ्तर में पहुंचे कुछ ही मिनट गुजरे होंगे। पीछे से कातिल बाइक पर जा धमके और राकेश यादव पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। यानी कातिलों को राकेश के वहां जाने की जानकारी पहले से रही होगी या उनका मुखबिर मौके पर पहले से मौजूद होगा। घटनास्थल और आसपास लोगों के मौजूद होने के बावजूद हत्यारे साफ बचकर निकल गए।
तहबाजारी के ठेके को लेकर गिरंद यादव पक्ष की रंजिश करीब दो दशक पहले शुरू हुई थी। उस दौरान गिरंद यादव के भाई पर जानलेवा हमला हुआ था। मगर ठेकेदारी में उनका वर्चस्व बढ़ता चला गया। नगर पालिका के बाद कैंट बोर्ड और पीडब्ल्यूडी की ठेकेदारी शुरू कर दी। शहर में साइकिल स्टैंड के अधिकतर ठेके गिरंद यादव के बेटे राकेश यादव के पास हैं। पीडब्ल्यूडी के ठेकों में भी उनका दबदबा चलता था। इससे उनके विरोधी खासे परेशान थे। पिता के नक्शे कदम पर राकेश यादव चलते थे। वह बेवजह किसी से दबते नहीं थे। वर्चस्व को लेकर ही गिरंद और उनके बेटे राकेश यादव की दुश्मनी बढ़ती चली गई। राकेश की हत्या के पीछे भी ठेकेदारी मानी जा रही है, जिसको लेकर पुलिस ने काम भी शुरू कर दिया है। पुलिस ने कुछ ठेकेदारों और पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। पुलिस को कुछ सुराग भी मिले हैं, जिन पर काम शुरू कर दिया है।
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अंशुमान की हत्या में राकेश के पिता है नामजद
जुलाई 2017 में शहर के कटिया टोला निवासी अग्निवेश उर्फ अग्नि के छोटे भाई अंशुमान उर्फ आशू समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में राकेश यादव के पिता गिरंद यादव भी नामजद हैं। उनके खिलाफ कोर्ट से कुर्की वारंट भी जारी हुआ था। सीओ सदर परमानंद पांडेय ने बताया कि गिरंद यादव की हिस्ट्रीशीट खुली है।
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